भारत की जनजातियाँ | भारत की प्रमुख जनजातियाँ

भारत की जनजातियाँ | भारत की प्रमुख जनजातियाँ


General Competition | Geography | भारत की जनजातियाँ

  • भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को परिभाषित नहीं किया गया है लेकिन इन जनजातियों की चर्चा हमारे संविधान में है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 341 में अनुसूचित जाति और अनुच्छेद-342 में अनुसूचित जनजाति की चर्चा की गई है।
  • किसी भी जाति को SC और ST घोषित करने का अधिकार राष्ट्रपति को होता है ।
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का गठन अनुच्छेद- 338 के तहत तो वही राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन अनुच्छेद- 338A के तहत हुआ है।
  • हर्बर्ट रिजले ने सर्वप्रथम भारतीय जनसंख्या में प्रजातियों का विवरण प्रस्तुत किया।
  • 1931 ई० में जाति आधारित जनगणना के बाद बी० एस० गुहा ने भारतीय प्रजातियों का विवरण छ: वर्गों में किया है- 1. नीग्रो/निग्रिटो : यह भारत आने वाली पहली प्रजाति है यह प्रजाति अंडमान निकोबार द्वीप समूह में मुख्य तौर पर निवास करती है। 2. प्रोटे ऑस्ट्रेलायड 3. अल्पाइन 4. मंगोलायड 5. भूमध्य नगरीय 6. नार्डिक (आर्य)। 7. नार्डिक : सबसे अंतिम में भारत आने वाली प्रजाति नॉर्डिक है।
  • भारत की पहली सभ्यता हड़प्पा सभ्यता में चार प्रजाति के लोग निवास करते थे जो निम्न हैं- 1. प्रोटे ऑस्ट्रेलायड 2. अल्पाइन 3. भूमध्यसागरीय 4. मंगोलॉयड।
  • अनुसूचित जाति (SC) : वैदिक काल में अनुसूचित जाति के लिए चाण्डाल शब्द का प्रयोग किया जाता था। भारत वर्ष में साइमन कमीशन आयोग न पहली बार अनुसूचित जाति शब्द का प्रयोग किया। भारत शासन अधिनियम 1935 में अछूतों के लिए अनुसूचित जाति शब्द का प्रयोग किया गया। गिरिजन शब्द का प्रयोग अनुसूचित जातियों के लिए ही किया गया था। लेकिन महात्मा गाँधी ने गिरिजन शब्द के स्थान पर हरिजन शब्द का प्रयोग किया।
  • अनुसूचित जनजाति : भारत में आदिवासी समुदाय के लोगों के लिए अनुसूचित जनजाति शब्द का प्रयोग किया जाता है। आदिवासी शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम ठक्कर बप्पा ने किया है जिस कारण उन्हें आदिवासी का मसीहा कहा जाता है। आदिवासी भारत के मूल निवासी है। भारत की कुल आबादी का मध्य प्रदेश में पाया जाता है वही प्रतिशतता के सवासी आबादी है। भारत में सबसे ज्यादा आदिवासी आबादी आदिवासी आबादी मिजोरम में पाया जाता है ।
  • युवा गृह : आदिवासी समुदाय के लोगों के शैक्षणिक संस्थान को युवा गृह कहा जाता है। मुरिया जनजाति के लोग इसे घोटुल, उराँव जनजाति के लोग धूमकुरिया तथा बीरहोर जनजाति के लोग इसे गितुओना कहते हैं।
  • भारत की तीन बड़ी जनजातियों का क्रम निम्न है- भील > गोंड > संथाल |
  • प्रमुख जनजातियाँ
  • टोडा : वह तमिलनाडु के नीलगिरि पहाड़ी क्षेत्र में पायी जाने वाली जनजातियाँ हैं। इस जनजाति के लोग पशुपालन किया करते हैं। इस जनजाति में बहुपति प्रथा का प्रचलन देखने को मिलता है।
  • भील : भील शब्द की उत्पत्ति द्रविड़ भाषा के बील से हुई है जिसका अर्थ धनुषधारी होता है। इस जनजाति के लोग अपने आप को महादेव का संतान बताते हैं। इस जनजाति में संयुक्त परिवार का प्रचलन है । इस जनजाति के लोग कृषक होते हैं। इस जनजाति के लोगों के द्वारा भीली भाषा बोली जाती है। इस जनजाति का संबंध प्रोटो ऑस्ट्रेलायड प्रजाति से है। यह जनजाति निम्नलिखित राज्य जैसे-महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश इत्यादि राज्यों में पायी जाती है।
  • मीणा : यह राजस्थान में पायी जाने वाली प्रमुख जनजाति इस जनजाति के लोग अपने आप को भगवान विष्णु के मीण अवतार से जोड़कर दिखाता है।
  • गोंड : इस जनजाति का संबंध द्रविड़ प्रजाति से है। इस जनजाति के लोग गोंडी भाषा बोलते हैं। यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति है। यह जनजाति भूत-प्रेत में अत्यधिक विकास करता है। यह जनजाति भारत के 13 राज्यों में निवास करती है जैसे - मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात इत्यादि ।
  • संथाल : यह भारत की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति है । इस जनजाति के लोग कृषक और शिकारी होते हैं। इसका संबंध प्रोटो ऑस्ट्रेलायड प्रजाति से है। यह जनजाति मुख्यत: झारखंड राज्य में निवास करती हैं इसके अलावे यह जनजाति बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश इत्यादि राज्यों में निवास करती है। इस जनजाति के लोग नाटे कद, चौड़े और चपटी नाकों वाले होते हैं।
  • मुंडा : इस जनजाति का प्रमुख क्षेत्र झारखंड राज्य है। इस जनजाति का ही सबसे प्रमुख त्योहार सरहुल हैं।
  • थारू : यह जनजाति मुख्यत: उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश राज्यों में पायी जाती है। इस जनजाति के लोगों का संबंध हिंदू धर्म से है। इस जनजाति के लोग हिंदू धर्म के सभी त्योहारों को मनाते है । इस जनजाति के लोग दीवाली को पहले शोक पर्व के रूप में मनाते थे लेकिन अब शोक पर्व के रूप में नहीं मनाते हैं।
  • बुक्सा : यह जनजाति मूलत: उत्तराखंड राज्य में निवास करती है। इस जनजाति का संबंध राजपूत घरानों से है। इस जनजाति -के लोग हिंदी बोलते हैं। इस जनजाति में अनुलोम विवाह और प्रतिलोम विवाह का प्रचलन देखने को मिलता है।
  • जौनसारी : यह जनजाति मुख्यत: उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में पायी जाती है। इस जनजाति का संबंध भूमध्यसागरीय प्रजाति से है। इस जनजाति में बहुपति विवाह का प्रचलन देखने को मिलता है ।
  • नागा : यह मूलत: नागालैंड में पायी जाने वाली जनजाति है। नागालैंड के अलावा यह जनजाति पूर्वोत्तर भारत के अन्य राज्य जैसे - असम, मणिपुर राज्यों में निवास करती है। इस जनजाति के लोग नागमिस भाषा बोला करते हैं। नागा भाषा और असमिया भाषा के सम्मिश्रण से नागमिस भाषा का विकास हुआ है।
  • Note : मीथन नागा जनजाति का त्योहार हैं।
  • भूटिया / भोटिया : यह जनजाति मुख्यतः पर्वतीय राज्य जैसे- सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश, उत्तराखंड में पायी जाती है। यह पशुपालक जनजाति होती है।
  • Note : ऋतु प्रवास भोटिया / भूटिया जनजाति में पायी जाती है।
  • बोडो जनजाति : यह मूलत: असम में पायी जाने वाली जनजाति है। यह जनजाति बोडी नामक भाषा बोलती है। इस जनजाति को 6ठी अनुसूची में शामिल किया गया है।
राज्यजनजाति
अरूणाचल प्रदेशडाफला, अबोर, मीशमी, आपतानी, अकावट
नागालैंडनागा, अंगामी, कूकी, मिकिर
मणिपुरकूकी, माओ, मारिंग, कोम
असमचकमा, डिमासा
मिजोरममिजो, लाखेर, पाबी, चकमा
मेघालयगारो, खासी, जैनतिया
त्रिपुरात्रिपुरी, रियांग, ओरांग
अंडमान निकोबार द्वीप समूहसेंटिलिज, जारबा, जोरबे, सोम्पैन, अंडमानी, निकोबारी, टाबू, येरे
सिक्किमलेपचा, तमांग, शेरपा, भूटिया
जम्मू-कश्मीरएक्करवाल, गुज्जर, गद्दी
हिमाचल प्रदेशगद्दी, किन्नौर, श्वांगला
झारखंडसंथाल, मुंडा, हो, उराँव, बीरहोर, खड़िया, असुर, मालपहाड़िया
राजस्थानमीणा, सहारिया, गरसिया
महाराष्ट्रबरदा, भील, कोल, वर्दी
गुजरातभील, बंजारा, पटेलिया
मध्य प्रदेशभील, अगरिया, खैरबार, कोल, कार्कू, कमार
छत्तीसगढ़धनवार, खड़िया, अगरिया
केरलइरुला, पनियान
बिहारकौल, मुंडा, हौ, उराँव


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