शॉर्ट नोट्स: भारत में अमृत काल का विजन 2047।

 Q. शॉर्ट नोट्स: भारत में अमृत काल का विजन 2047।

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शॉर्ट नोट्स: भारत में 'अमृत काल' का विजन 2047

भूमिका

भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर उद्घोषित 'अमृत काल' (Amrit Kaal) का विजन आगामी 25 वर्षों (2022 से 2047 तक) की एक महत्वाकांक्षी और रणनीतिक रूपरेखा है। इसका मूल उद्देश्य स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष (2047) तक भारत को एक 'विकसित राष्ट्र' (Developed Nation) के रूप में स्थापित करना है। यह विजन केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समावेशी विकास, तकनीकी संप्रभुता, पर्यावरणीय स्थिरता और वैश्विक पटल पर 'विश्व मित्र' के रूप में भारत की सशक्त उपस्थिति का समग्र ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करता है।

विजन 2047 के प्रमुख स्तंभ एवं रणनीतिक लक्ष्य

भारत सरकार और नीति आयोग द्वारा परिकल्पित अमृत काल के विजन को निम्नलिखित प्रमुख आयामों के माध्यम से समझा जा सकता है:

  • 'पंच प्रण' (Panch Pran) का वैचारिक आधार: प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत 'पंच प्रण' इस विजन की वैचारिक धुरी हैं—(1) विकसित भारत का लक्ष्य, (2) औपनिवेशिक मानसिकता का पूर्ण उन्मूलन, (3) अपनी विरासत पर गर्व, (4) राष्ट्रीय एकता, और (5) नागरिकों के कर्तव्यों का निर्वहन (अनुच्छेद 51A)।

  • आर्थिक महाशक्ति की ओर अग्रसर: 2047 तक भारत को विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने हेतु 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियानों को गति दी जा रही है। अवसंरचना विकास के लिए 'पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान' (PM Gati Shakti) के तहत लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर बल दिया जा रहा है।

  • तकनीकी संप्रभुता और डिजिटल इंडिया: अमृत काल का एक प्रमुख लक्ष्य भारत को नवाचार और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना है। डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के माध्यम से भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक अपरिहार्य अंग बनाने की रणनीति है।

  • सतत विकास और जलवायु कार्रवाई: आर्थिक विकास को पारिस्थितिक संतुलन के साथ जोड़ने हेतु भारत ने वर्ष 2070 तक 'शुद्ध शून्य उत्सर्जन' (Net Zero Emissions) का लक्ष्य रखा है। 'मिशन LiFE' (Lifestyle for Environment) और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन इस दिशा में महत्वपूर्ण नीतिगत उपकरण हैं।

  • महिला-नेतृत्व वाला विकास (Women-Led Development): लैंगिक समानता को केंद्र में रखते हुए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' (106वां संविधान संशोधन) जैसे वैधानिक कदम उठाए गए हैं, ताकि नीति-निर्माण और प्रशासन में महिलाओं की प्रत्यक्ष और समान भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

बिहार के संदर्भ में अमृत काल की प्रासंगिकता और चुनौतियां

अमृत काल का विजन 'सहकारी संघवाद' के बिना अपूर्ण है, और इसमें बिहार जैसे राज्यों की भूमिका अत्यंत निर्णायक है:

  • जनसांख्यिकीय लाभांश का यथार्थवादी उपयोग: भारत की युवा आबादी का एक बड़ा हिस्सा बिहार में निवास करता है। विजन 2047 की प्राप्ति हेतु पटना और बिहार के सभी जिलों में विश्वस्तरीय कौशल विकास केंद्रों की स्थापना और शिक्षा के बुनियादी ढांचे (NEP 2020 के अनुरूप) का विकेंद्रीकृत विस्तार अनिवार्य है।

  • कृषि का आधुनिकीकरण: राज्य की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate Resilient Agriculture), खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विस्तार और कृषि-तकनीक (Agri-tech) स्टार्टअप्स को बढ़ावा देकर ही ग्रामीण आय को राष्ट्रीय औसत के समकक्ष लाया जा सकता है।

  • औद्योगिक निवेश: बिहार को मानव संसाधन के निर्यातक राज्य से बदलकर एक प्रमुख विनिर्माण और सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है, जिसके लिए पारदर्शी नीतियां और सुदृढ़ कानून-व्यवस्था पूर्वशर्त हैं।

आगे की राह (Way Forward)

  1. विकेंद्रीकृत शासन: विजन 2047 को केवल केंद्र या राज्य सरकारों तक सीमित न रखकर, 73वें और 74वें संविधान संशोधन की मूल भावना के अनुरूप पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के माध्यम से इसे ग्राम स्तर तक ले जाना होगा।

  2. अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश: जीडीपी के अनुपात में R&D पर निवेश को वर्तमान लगभग 0.7% से बढ़ाकर 2-3% तक करना होगा, ताकि वैश्विक स्तर के स्वदेशी नवाचार को बल मिल सके।

  3. प्रशासनिक सुधार: एक चुस्त, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित नौकरशाही का निर्माण आवश्यक है, जो औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर 'मिशन कर्मयोगी' के आदर्शों पर कार्य करे।

अंतिम विचार

'अमृत काल' का विजन 2047 कोई स्वतः पूर्ण होने वाली भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक संकल्प और अथक परिश्रम की मांग करता है। जनसांख्यिकीय लाभांश, लोकतांत्रिक मूल्य और तकनीकी क्षमता के अभिसरण से भारत न केवल अपनी आंतरिक चुनौतियों (गरीबी, कुपोषण, बेरोजगारी) पर विजय प्राप्त कर सकता है, बल्कि एक शांतिपूर्ण और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में 'विश्वगुरु' की अपनी ऐतिहासिक भूमिका को पुनः प्राप्त कर सकता है।

क्या आप मानते हैं कि अमृत काल के इस दीर्घकालिक विजन को सफल बनाने के लिए हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली में कौशल विकास (Skill Development) के साथ-साथ नैतिक और नागरिक कर्तव्यों (Civic Duties) के व्यावहारिक शिक्षण को भी अनिवार्य रूप से एकीकृत किया जाना चाहिए?

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