डिजिटल इंडिया प्रोग्राम ने भारत के सुदूर क्षेत्रों (ग्रामीण अर्थव्यवस्था) को कैसे सशक्त बनाया है?

 Q. डिजिटल इंडिया प्रोग्राम ने भारत के सुदूर क्षेत्रों (ग्रामीण अर्थव्यवस्था) को कैसे सशक्त बनाया है?

Ans - 

डिजिटल इंडिया और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

वर्ष 2015 में भारत सरकार द्वारा 'डिजिटल इंडिया' (Digital India) कार्यक्रम का शुभारंभ एक नवोन्मेषी नीतिगत हस्तक्षेप था, जिसका मूल उद्देश्य भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था (Knowledge Economy) में परिवर्तित करना है। वर्तमान में, 'इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (IAMAI) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ग्रामीण इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या शहरी उपयोगकर्ताओं को पार कर गई है। यह जनसांख्यिकीय बदलाव इस बात का प्रमाण है कि इस कार्यक्रम ने देश के सुदूर क्षेत्रों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को व्यापक रूप से पुनर्परिभाषित किया है।

1. सुदूर क्षेत्रों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का डिजिटल सशक्तिकरण

डिजिटल इंडिया ने ग्रामीण भारत को विकास की परिधि से निकालकर मुख्यधारा में लाने का कार्य किया है, जिसके प्रभाव बहुआयामी हैं:

क. वित्तीय समावेशन और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT)

  • JAM त्रिमूर्ति (जन-धन, आधार, मोबाइल): इस त्रिमूर्ति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक अभूतपूर्व पारदर्शिता स्थापित की है। मनरेगा (MGNREGA) मजदूरी, पेंशन और छात्रवृत्ति सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित हो रही है।

  • बिचौलियों की समाप्ति: आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, DBT के माध्यम से कल्याणकारी योजनाओं में होने वाले रिसाव (Leakage) और 'घोस्ट लाभार्थियों' (Ghost Beneficiaries) की पहचान कर सरकारी खजाने की भारी बचत की गई है।

ख. कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति (Agriculture 4.0)

  • e-NAM (राष्ट्रीय कृषि बाजार): यह अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल ग्रामीण किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए देश भर के बाजारों तक सीधे पहुंच प्रदान करता है।

  • सटीक सूचना तंत्र: पीएम-किसान (PM-KISAN) पोर्टल और किसान सुविधा ऐप के माध्यम से सुदूर क्षेत्रों के किसानों को मौसम के पूर्वानुमान, मिट्टी के स्वास्थ्य (Soil Health Card) और मंडी कीमतों की रीयल-टाइम जानकारी प्राप्त हो रही है।

ग. ई-गवर्नेंस और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण

  • कॉमन सर्विस सेंटर (CSC): ग्राम पंचायत स्तर पर स्थापित ये डिजिटल कियोस्क (Kiosks) जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र, पैन कार्ड और बैंकिंग सेवाएं (बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट) ग्रामीण द्वार पर उपलब्ध करा रहे हैं।

  • ई-ग्राम स्वराज (e-Gram Swaraj): पंचायतों की कार्यप्रणाली, लेखांकन और विकास कार्यों की प्रगति को डिजिटल कर स्थानीय सुशासन में जवाबदेही (Accountability) सुनिश्चित की गई है।

घ. स्वास्थ्य और शिक्षा का सार्वभौमिकरण

  • टेलीमेडिसिन: ई-संजीवनी (e-Sanjeevani) के माध्यम से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज महानगरों के विशेषज्ञ चिकित्सकों से निःशुल्क परामर्श ले रहे हैं, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच बढ़ी है।

  • डिजिटल शिक्षा: दीक्षा (DIKSHA) पोर्टल और पीएम ई-विद्या (PM e-VIDYA) ने दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री सुलभ कराई है।

2. बिहार के विशेष संदर्भ में डिजिटल इंडिया का प्रभाव

बिहार जैसे राज्य में, जहाँ ग्रामीण आबादी का अनुपात अत्यधिक है, डिजिटल इंडिया ने सुशासन (Good Governance) का मार्ग प्रशस्त किया है। भारतनेट (BharatNet) परियोजना के माध्यम से ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार केवल राजधानी तक सीमित न रहकर पटना और सभी बिहार के जिलों के सुदूर ग्राम पंचायतों तक किया जा रहा है। इससे राज्य भर में डिजिटल अवसंरचना का एक समान वितरण सुनिश्चित हो रहा है।

  • RTPS (लोक सेवाओं का अधिकार) पोर्टल: इसके माध्यम से जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र जैसी आवश्यक प्रशासनिक सेवाएं घर बैठे उपलब्ध हैं, जिसने ब्लॉक कार्यालयों में भ्रष्टाचार पर प्रहार किया है।

  • कृषि में पारदर्शिता: कृषि विभाग का 'बिहान' (BIHAN) ऐप फसल निगरानी में सहायक है। इसके साथ ही, किसानों को बीज सब्सिडी तथा सूखा राहत (कृषि इनपुट सब्सिडी) का वितरण पूरी तरह से DBT के माध्यम से किया जा रहा है, जो संपूर्ण बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान कर रहा है।

3. वर्तमान चुनौतियाँ एवं सीमाएँ

  • डिजिटल डिवाइड (Digital Divide): बुनियादी ढांचे (विशेषकर निर्बाध विद्युत आपूर्ति) और ब्रॉडबैंड की गति में शहरी और ग्रामीण भारत के बीच अभी भी एक गहरी खाई मौजूद है।

  • व्यावहारिक साक्षरता का अभाव: NSSO के आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्टफोन की पहुँच तो बढ़ी है, परंतु ई-गवर्नेंस पोर्टलों का स्वतंत्र रूप से उपयोग करने के लिए आवश्यक 'डिजिटल साक्षरता' अभी भी निम्न स्तर पर है।

  • भाषाई बाधा और साइबर सुरक्षा: इंटरनेट पर अधिकांश सामग्री अंग्रेजी में है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय साइबर धोखाधड़ी (Phishing/Cyber Frauds) के बढ़ते मामले डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वास को कमजोर करते हैं।

आगे की राह (Way Forward)

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को इसके इष्टतम स्तर तक ले जाने के लिए नीतिगत सुदृढ़ीकरण आवश्यक है:

  1. भाषाई एकीकरण: भारत सरकार की 'भाषिणी' (Bhashini) जैसी AI-संचालित भाषा अनुवाद प्रणालियों का विस्तार ग्रामीण स्तर पर किया जाना चाहिए, ताकि किसान स्थानीय भाषाओं में इंटरनेट का उपयोग कर सकें।

  2. डिजिटल साक्षरता मिशन: पीएम-दिशा (PM-GDISHA) कार्यक्रम को अधिक परिणामोन्मुखी बनाते हुए इसे व्यावहारिक वित्तीय और साइबर साक्षरता से जोड़ा जाना चाहिए।

  3. 5G का ग्रामीण उपयोग: कृषि, ड्रोन तकनीक और ग्रामीण एमएसएमई (MSMEs) में 5G के उपयोग-मामलों (Use-cases) को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान को प्रोत्साहित करना होगा।

डिजिटल इंडिया मात्र एक तकनीकी ढांचा नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का एक दर्शन है। इसे सतत विकास लक्ष्य (SDG 9: उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा तथा SDG 10: असमानताओं में कमी) के साथ गहराई से जोड़कर ही भारत और बिहार के ग्रामीण अंचलों को वास्तविक रूप में 'आत्मनिर्भर' बनाया जा सकता है।

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