भारत की प्राकृतिक वनस्पति | प्राकृतिक वनस्पति क्या है

भारत की प्राकृतिक वनस्पति | प्राकृतिक वनस्पति क्या है


General Competition | Geography | भारत की प्राकृतिक वनस्पति

  • बिना मानवीय हस्तक्षेप के जो पेड़, पौधे, वृक्ष, घास, इत्यादि उगता है, उसे प्राकृतिक वनस्पति कहते हैं।
  • प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए कुल क्षेत्रफल के 33% भू-भाग पर वन होना चाहिए ।
  • भारत की प्रथम राष्ट्रीय वन नीति 1952 में आयी हैं, जिसमें संशोधन 1988 ई० में हुआ है। इस वन नीति का लक्ष्य भारत के कुल क्षेत्रफल के 33% भूभाग पर वन लगाया जाना है।
  • भारतीय वन रिपोर्ट फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया नामक संस्था के द्वारा 1987 ई० से प्रत्येक दो वर्ष की अवधि पर जारी किया जाता रहा है।
  • 2021 के आँकड़ों के अनुसार भारत में सर्वाधिक वनों का क्षेत्रफल वाला राज्य मध्य प्रदेश (77,493 वर्ग किमी) तथा सबसे कम वनों का क्षेत्रफल वाला राज्य हरियाणा (1603 वर्ग किमी) है।
  • भारत में कुल 17 राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश ऐसे हैं जहाँ 33% से अधिक वन पाया जाता है। जैसे-मध्य प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम, लक्षद्वीप इत्यादि ।
  • प्रतिशतता के आधार पर सर्वाधिक वन प्रतिशत वाला राज्य मिजोरम (84% से अधिक) है।
  • प्रतिशतता के आधार पर सबसे कम वन प्रतिशत वाला राज्य हरियाणा है।
  • केन्द्रशासित प्रदेशों में सर्वाधिक वन प्रतिशत वाला केन्द्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप जबकि सबसे कम वन प्रतिशत लद्दाख में पाया जाता है।
  • भारतीय वन अनुसंधान केन्द्र देहरादून में स्थित हैं।
  • सामाजिक वानिकी : समाज के लोगों के हस्तक्षेप से सरकारी भूमि पर जो वनों का विस्तार किया जाता है उसे सामाजिक वानिकी कहते हैं। इस कार्यक्रम की शुरूआत 1978 ई० से हुई है। 1980 ई० में इस कार्यक्रम को छठी पंचवर्षीय योजना का अंग बनाया गया।
  • कृषि वानिकी : किसी भूमि पर जब कृषि कार्य के साथ-साथ वन लगाये जाते हैं उसे ही कृषि वानिकी कहते हैं। कृषि वानिकी से मृदा अपरदन को रोका जाता है। 
  • वर्षा के आधार पर वनस्पति कई प्रकार के होते हैं-
    1. उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनस्पति : वैसा क्षेत्र जहाँ 250 cm से अधिक वर्षा होता है उन क्षेत्रों में पायी जाने वाली वनस्पति को उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनस्पति कहा जाता है। इसके अंतर्गत आने वाले वन सदा हरा-भरा रहता है जिस कारण इसे सदाबहार वनस्पति भी कहते हैं। यह वनस्पति पश्चिमी घाट, उत्तरी-पूर्वी पहाड़ी अंडमान निकोबार द्वीप समूह इत्यादि क्षेत्रों में पायी जाती हैं।
      • Note : (i) अंडमान निकोबार द्वीप समूह को उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनस्पति का घर कहा जाता है।
        (ii) सभी प्रकार की वनस्पतियों में सर्वाधिक उत्पादकता वाला वनस्पति उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनस्पति है। इसके प्रमुख वृक्ष निम्न हैं, जैसे- बाँस, रबड़, सिनकोना, आबनूस, रोजवुड इत्यादि ।
    2. अर्ध सदाबहार वनस्पति : वैसा क्षेत्र जहाँ 200 cm से 250 cm के बीच वर्षा होता है, उन क्षेत्रों में पायी जाने वाली वनस्पति को अर्धसदाबहार वनस्पति कहा जाता है। इस वनस्पति के प्रमुख वृक्ष साइडर, होलक, चंपा इत्यादि प्रमुख हैं। यह वन पश्चिमी घाट, मेघालय का पठारी इलाका, अंडमान निकोबार द्वीप समूह में पाया जाता है।
    3. उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वनस्पति : वैसा क्षेत्र जहाँ 100 cm से 200 cm के बीच में वर्षा होता हैं, उन क्षेत्रों में पायी जाने वाली वनस्पति उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वनस्पति कहलाता है। भारत में सबसे ज्यादा यही वनस्पति पायी जाती है। वसंत एवं ग्रीष्म ऋतु के शुरू होने पर यह वनस्पति पत्ता गिरा देती है जिस कारण इसे पर्णपाती वनस्पति कहते हैं। इसके प्रमुख वृक्ष सागवान, शीशम, सखवा, साल, आम, कटहल, चंदन इत्यादि है। यह वनस्पति मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, बिहार, उत्तर प्रदेश में पायी जाती है।
  • उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वनस्पति : वैसा क्षेत्र जहाँ 70 cm से 100 cm के बीच में वर्षा होता है, उन क्षेत्रों में जो वनस्पति पायी जाती है, उसे उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वनस्पति कहा जाता है। इसके प्रमुख वृक्ष तेंदु, बेल इत्यादि हैं।
  • शुष्क कटीली वनस्पति : वैसा क्षेत्र जहाँ 70 cm से कम वर्षा होता है उन क्षेत्रों में पायी जाने वाली वनस्पति शुष्क कटीली वनस्पति कहलाती है, जैसे- बबूल, खजूर इत्यादि ।
  • सवाना वनस्पति : वैसा क्षेत्र जहाँ 40-60cm के बीच में वर्षा होता है, उन क्षेत्रों में पायी जाने वाली वनस्पति को सवाना वनस्पति कहते हैं। इस वनस्पति के अंतर्गत छोटे-छोटे घास के मैदान तथा छोटी-छोटी वृक्ष और झारियाँ आती है।
  • मरूस्थलीय वनस्पति : वैसा क्षेत्र जहाँ 50 cm से कम वर्षा होता है, उन क्षेत्रों में पायी जाने वाली वनस्पति मरुस्थलीय वनस्पति कहलाती है। जैसे- नागफनी, आकाशिया के वृक्ष इत्यादि ।
  • ज्वारीय वनस्पति : भारत के समुद्र तटीय राज्यों में ज्वारीय वनस्पति पायी जाती है। भारत में सबसे ज्यादा ज्वारीय वनस्पति पश्चिम बंगाल राज्य में पायी जाती है ! पश्चिम बंगाल के बाद दूसरा सबसे अधिक ज्वारीय वनस्पति गुजरात राज्य में पायी जाती है। ज्वारीय जन के प्रमुख वृक्ष सुंदरी और मैंग्रोव है। ज्वारीय वनस्पति को कई अन्य नाम जैसे- अनूप वन, कच्छ वनस्पति, वेलांचली वन कहा जाता है।
Note : 1. समुद्री और स्थलीय पारिस्थितिकी के बीच ज्वारीय वनस्पति सेतु के रूप में काम करता है ।
2. पश्चिमी हिमालय की तुलना में पूर्वी हिमालय में जैव विविधता अधिक पायी जाती है क्योंकि पूर्वी हिमालय विषुवत रेखा के नजदीक स्थित हैं तथा इन क्षेत्रों में अधिक होता है।
3. यूकेलिप्टस को पारिस्थितिकी का आतंकवाद कहा जाता है।
4. प्लास को जंगल की आग कहा जाता है। (ब्यूटियामोनोस्पर्मा)
  • आर्द्र भूमि (Wetlands) : वैसा क्षेत्र जहाँ नम और शुष्क दोनों प्रकार के वातावरण मौजूद हो उसे आर्द्र भूमि कहा जाता है। आर्द्रभूमि वाला क्षेत्र जैव विविधता को लेकर महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए आर्द्र भूमि का संरक्षण प्रदान किया जाता है। आर्द्र भूमि के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रति वर्ष 2 फरवरी को विश्व आर्द्र भूमि दिवस मनाया जाता है।
  • विश्व के समस्त आर्द्र भूमियों को संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से ईरान के रामसर शहर में 1971 में सम्मेलन आयोजित किया गया जिसे रामसर सम्मेलन कहते हैं।
  • भारतीय आर्द्र भूमि को रामसर साइट्स में शामिल किया जाना प्रारंभ 1982 ई० से हुआ।
  • बिहार का एकमात्र बेगुसराय का कांवर ताल झील को रामसर साइट्स में शामिल किया गया है। वही भारत के भीतर सर्वाधिक उत्तर प्रदेश के 10 स्थलों को रामसर साइट्स में शामिल किए गए हैं। जैसे - बखिरा वन्य जीव अभ्यारण्य, हैदरपुर आर्द्र भूमि, ऊपरी- गंगा नदी तंत्र, etc.
  • वर्तमान में भारत के 49 स्थलों को रामसर साइट्स में शामिल किए गए हैं। फरवरी, 2022 ई० में 2 स्थलों को रामसर साइटस में शामिल किया गया है जो निम्न हैं- 1. गुजरात का खिजड़िया वन्य जीव अभ्यारण्य और 2. उत्तर प्रदेश का बखिरा वन्य जीव अभयारण्य।
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