भारत के उद्योग | भारत के उद्योग क्षेत्र

भारत के उद्योग | भारत के उद्योग क्षेत्र


General Competition | Geography | भारत के उद्योग

  • उद्योग का तात्पर्य वैसी आर्थिक उच्च क्रियाओं से है जिसके अंतर्गत वस्तु एवं सेवाओं का उत्पादन एवं संवर्धन किया जाता है। 
  • स्वतंत्र भारत की प्रथम औद्योगिक नीति अप्रैल, 1948 में आयी थी वही भारत की द्वितीय औद्योगिक नीति अप्रैल, 1956 में आयी थी।
  • भारत की तीसरी और नई औद्योगिक नीति जुलाई, 1991 में आयी है जिसमें उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की घोषणा की गई है।
  • लौह-इस्पात उद्योग : इस उद्योग को आधारभूत उद्योग कहा जाता है क्योंकि यह अन्य उद्योगों जैसे - मशीनरी उद्योग, औजार उद्योग इत्यादि को कच्चा माल प्रदान करता है। भारत में आधुनिक रूप से इस्पात बनाने का प्रथम प्रयास 1830 ई० में तमिलनाडु के पोटोनोवा में किया गया। लेकिन यह असफल रहा।
  • देश का प्रथम लौह इस्पात संयंत्र पश्चिम बंगाल के कल्टी में 1874 ई. में बंगाल आयरन वर्क्स के नाम से स्थापित हुआ लेकिन फंड के अभाव के कारण यह असफल हो गया। बाद में बंगाल की सरकार ने इसका अधिग्रहण कर लिया और इसका नाम बदलकर बराकर आयरन वर्क्स कर दिया। 
  • देश का बड़े पैमाने पर प्रथम सफलतम लौह इस्पात उद्योग TISCO (Tata Iron and Steel Company) है। यह 1907 ई० में जमशेदजी टाटा के द्वारा झारखंड राज्य के जमशेदपुर के साक्ची में स्थापित किया गया था।
  • TISCO को लौह अयस्क की प्राप्ति ओडिशा के बादाम पहाड़ी, गुरूमहिसानी और झारखंड के सिंहभूम से होता है।
  • TISCO को कोयला की प्राप्ति झरिया और बोकारो से होता है।
  • IISCO (Indian iron and steel company) : इसकी स्थापना 1918 ई० में पश्चिम बंगाल के बर्नपुर में दामोदर नदी के किनारे की गई थी। इसको कोयला की प्राप्ति झारखंड के झरिया और रामगढ़ से तथा लौह अयस्क की प्राप्ति सिंहभूम से होता है।
  • विश्वेरैया आयरन एण्ड स्टील लिमिटेड (VISL) : यह कर्नाटक के शिमोगा जिले में भद्रा नदी के तट पर 1923 ई० में स्थापित किया गया है। इस संयंत्र को लौह-अयस्क की प्राप्ति कर्नाटक के बाबाबूदन की पहाड़ी से होता है। यह एक ऐसा संयंत्र है जो कोयला क्षेत्र से दूर स्थापित किया गया है। इसे पहले मैसूर आयरन वर्क्स के नाम से जाना जाता था ।
  • द्वितीय पंचवर्षीय योजना के दौरान स्थापित लौह इस्पात संयंत्र : द्वितीय पंचवर्षीय योजना के दौरान भारत सरकार ने भारी उद्योग को बढ़ावा दिया। इस पंचवर्षीय योजना के दौरान तीन बड़े लौह-इस्पात संयंत्र भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थापित किये गये जो निम्न हैं-
    1. हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड, भिलाई : यह वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में है। यह इस्पात संयंत्र रूस की मदद से स्थापित हुआ। 1959 से प्लांट उत्पादन कार्य आरंभ हुआ। इसका कोयला की प्राप्ति कोरबा (छत्तीसगढ़), बोकारो व झरिया से होता है तथा लौह अयस्क की प्राप्ति दल्लिराजहरा (ओडिशा) से होता है ।
    2. हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड, राउरकेला : इसकी स्थापना जर्मनी की सहयोग से वर्ष 1959 ई॰ में ओडिशा में शंख एवं कोयल नदी के संगम पर हुआ है। इसको कोवला की प्राप्ति झरिया व कोरबा से होता है।
    3. हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड, दुर्गापुर: इसकी स्थापना 1959 ई० में ब्रिटेन की सहायता से प॰ बंगाल में हुआ। इसको कोयला की प्राप्ति रानीगंज और झरिया से होता है।
  • तीसरे पंचवर्षीय योजना के दौरान झारखंड के बोकारो में 1964 ई० में रूस की मदद से बोकारो इस्पात संयंत्र की स्थापना की गई। इसको कोयला बोकारो व झरिया से लौह अयस्क किरिबुरू से प्राप्त होता है।
  • विशाखापत्तनम लौह इस्पात संयंत्र : यह देश का प्रथम तटवर्ती या तटीय लौह इस्पात संयंत्र है इसकी स्थापना रूस की मदद से हुई है। यह आंध्र प्रदेश राज्य में स्थित हैं। इसका लौह अयस्क की प्राप्ति बेलाडिला के खान (छत्तीसगढ़) से होता है।
  • सलेह लौह इस्पात संयंत्र : यह तमिलनाडु राज्य में स्थित है। यह लौह इस्पात संयंत्र 1982 ई० से काम करना शुरू किया है। यह लौह इस्पात संयंत्र स्टेनलेस स्टील का उत्पादन करता है।
  • विजयनगर स्टील संयंत्र (कर्नाटक) : यह कर्नाटक के विजयनगर जिले के दासपेट क्षेत्र में तुंगभद्रा जलाशय के समीप स्थापित किया गया है। इसे लौह अयस्क की प्राप्ति बाबाबूदन की पहाड़ी से होता है।
  • एल्युमीनियम उद्योग : लौह इस्पात उद्योग के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण उद्योग एल्युमीनियम उद्योग है। देश में सर्वप्रथम एल्युमीनियम कम्पनी की स्थापना 1937 ई० में पश्चिम बंगाल के जे० के० नगर में एल्युमीनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया नाम से किया गया।
  • द्वितीय पंचवर्षीय योजना के दौरान ओडिशा के मेटुर तथा चतुर्थ पंचवर्षीय योजना के दौरान एल्युमीनियम कम्पनी हीराकुंड, उत्तर प्रदेश के रेणुकुंड, तृतीय पंचवर्षीय योजना के दौरान तमिलनाडु कर्नाटक के बेलगाँव में नये एल्युमीनियम कम्पनी की स्थापना हुई।
एल्युमीनियम कम्पनीसहयोगी देशस्थापित केन्द्र
BALCO (भारत एल्युमीनियम कम्पनी)रूसकोरबा (छत्तीसगढ़)
NALCO (नेशनल एल्युमीनियम कम्पनी)फ्रांसरत्नागिरी (महाराष्ट्र)
HINDALCO (हिंदुस्तान एल्युमीनियम कम्पनी)यू० एस० ए०रेणुकुंड (उत्तर प्रदेश)
IINDALCO (इंडियन एल्युमीनियम कम्पनी)कनाडामुरी (बिहार), अल्वाय (केरल) और जे० के० नगर (प. बंगाल)
MALCO (मद्रास एल्युमीनियम कम्पनी)इटलीचेन्नई, मेटुर, सलेम
वेदांता एल्युमीनियम कम्पनीजर्मनीओडिशा के झारसुगुरा
  • सूती वस्त्र उद्योग : प्राचीन काल से ही भारत में सूती वस्त्र का उत्पादन किया जा रहा है। भारत में सर्वाधिक रोजगार कृषि के क्षेत्र में लोगों को प्राप्त होता है। कृषि के बाद दूसरा सर्वाधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र सूती वस्त्र उद्योग है। भारत में पहला सूती वस्त्र उद्योग पश्चिम बंगाल के फोर्ट ग्लास्टर में 1818 ई. में स्थापित हुआ जो कि असफल रहा। वही देश का प्रथम सफलतम सूती वस्त्र उद्योग 1854 में मुंबई में कावस जी डाबर के द्वारा स्थापित किया गया। इस उद्योग में उत्पादन कार्य 1856 ई० में प्रारंभ हुआ।
  • मैनचेस्टर : यह ब्रिटेन का एक प्रमुख औद्योगिक नगर है जो सूती वस्त्र उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। उत्तर भारत का मैनचेस्टर कानपुर को कहा जाता है। दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कोयम्बटूर को कहा जाता है।
  • भारत का मैनचेस्टर अहमदाबाद को कहा जाता है।
  • सूती वस्त्रों की राजधानी मुंबई को कहा जाता है।
  • वस्त्र पार्क : सिले सिलाए वस्त्रों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए देश का पहला वस्त्र पार्क तमिलनाडु के तिरूपुर जिला में स्थापित किया गया।
  • रेशमी वस्त्र उद्योग : भारत एक ऐसा देश है जहाँ शहतूती, इरी, टसर, ओक एवं मूँगा सभी किस्मों के रेशम का उत्पादन करता है। मूँगा रेशम के उत्पादन में भारत का एकाधिकार है। भारत में सबसे अधिक रेशम का उत्पादन कर्नाटक राज्य करता है। रेशमी वस्त्र उद्योग का प्रमुख केन्द्र कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, असम और प० बंगाल का क्षेत्र है ।
  • Note : केन्द्रीय रेशम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र मैसूर एवं ब्रह्मपुर में स्थित है।
  • ऊनी वस्त्र उद्योग : भारत में प्रथम ऊनी वस्त्र उद्योग 1876 ई० में कानपुर में स्थापित किया गया लेकिन ऊनी वस्त्र उद्योग का विकास आजादी के बाद भारत में संभव हो पाया। सामान्यतः ऊनी वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अंगोरा ऊन और पश्मीना ऊन का प्रयोग किया जाता है। अंगोरा ऊन की प्राप्ति खरगोश के रोएँ से होता है जबकि पश्मीना ऊन की प्राप्ति बकरियों के रोएँ से होता है। ऊनी वस्त्र उद्योग का प्रमुख केन्द्र जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा इत्यादि राज्य है।
  • जूट उद्योग (पटसन ) : जूट को गोल्डन फाइबर ऑफ इंडिया (सोने का रेशा ) कहा जाता है। जूट उद्योग कच्चा माल पर आधारित उद्योग है। भारत में प्रथम जूट उद्योग 1855 ई० में जॉर्ज ऑकलैंड के द्वारा पश्चिम बंगाल के रिसरों में स्थापित किया गया। भारत में जूट का सर्वाधिक उत्पादन पश्चिम बंगाल राज्य करता है। पश्चिम बंगाल के बाद जूट उत्पादन में बिहार का दूसरा स्थान हैं। भारतीय जूट को कड़ी प्रतिस्पर्धा बांग्लादेश के जूट से मिलती है। भारतीय जूट के निर्यात को बढ़ावा देने हेतु भारतीय जूट निगम की स्थापना 1971 ई० में हुई थी। वही अंतर्राष्ट्रीय जूट संगठन की स्थापना 1984 ई० में हुई जिसका मुख्यालय ढाका में है।
  • चीनी उद्योग : यह कच्चे माल पर आधारित उद्योग हैं। यह उद्योग गन्ना की उपलब्धता पर निर्भर करता है । भारत वर्ष के भीतर प्रथम चीनी मिल या चीनी उद्योग बिहार के सारण के मढ़ौरा में 1903 ई० में स्थापित हुआ (कुछ अन्य स्रोत 1904 ई० देता है)।
  • गन्ना उत्पादन की आदर्श जलवायु दक्षिण भारत में पायी जाती है। (उष्ण कटिबंधीय ) 100-150 cm वर्षा ।
  • देश में सबसे ज्यादा गन्ना का उत्पादन उत्तर प्रदेश राज्य करता है ।
  • प्रति हेक्टेयर के दृष्टिकोण से सबसे ज्यादा गन्ना का उत्पादन तमिलनाडु राज्य करता है।
  • चीनी का सबसे ज्यादा उत्पादन उत्तर प्रदेश राज्य करता है ।
  • सबसे ज्यादा चीनी मील महाराष्ट्र राज्य में है।
  • दियासलाई उद्योग : भारत में प्रथम दियासलाई उद्योग गूजरात के अहमदाबाद में 1921 ई० में स्थापित हुआ था। यह कुटीर उद्योग के अंतर्गत आता हैं।
  • कागज उद्योग : कागज की खोज 12वीं, 13वीं सदी में चीन में हुआ था। कागज का उपयोग शैक्षणिक कार्यों में, अखबारों में, नोटों के रूप में किया जाता है। देश में प्रथम कागज उद्योग 1812 ई० में पश्चिम बंगाल के सेरामपुर में किया गया जो कि असफल रहा वही देश का प्रथम सफलतम कागज उद्योग पश्चिम बंगाल के बालीगंज में 1867 ई० में स्थापित हुआ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में प्रथम कागज उद्योग 1879 ई० में स्थापित हुआ।
  • Note : मध्य प्रदेश के नेपानगर में अखबारी कागज का उत्पादन होना शुरू 1947 ई० से हुआ है।
  • उर्वरक उद्योग : अधिक फसलों के उत्पादन हेतु किसानों के द्वारा अपने खेत में उर्वरक का प्रयोग किया जाता है। भारत में प्रथम उर्वरक उद्योग तमिलनाडु के रानीपेट 1906 में स्थापित किया गया। लेकिन देश में वास्तविक तौर पर उर्वरक उद्योग का विकास होना प्रारंभ आजादी के बाद तब हुआ जब 1951 में झारखंड के सिंदरी में सिंदरी उर्वरक कारखाना की स्थापना हुई ।
  • सीमेंट उद्योग : बड़े-बड़े पुल भवन अथवा वारभूत संरचना के विकास हेतु सीमेंट का उपयोग किया जाता है। आधुनिक ढंग से पहली बार सीमेंट का उत्पादन 1824 में ब्रिटेन के पोर्टलैंड शहर में हुआ। भारत में प्रथम सीमेंट उद्योग कारखाना 1904 में मद्रास में स्थापित हुआ जो असफल रहा। देश का प्रथम सफलतम सीमेंट उद्योग गुजरात के पोरबंदर में 1914 ई० में स्थापित हुआ। प्रथम स्थान - गुजरात |
  • Note : ACC (Associate Cement Company) की स्थापना 1936 ई० में हुई।
  • औद्योगिक क्षेत्र : भारत के उन क्षेत्रों में बड़े उद्योग मिलते हैं जहाँ कच्चे माल की उपलब्धता हो, परिवहन की अच्छी व्यवस्था हो, कम मजदूरी पर श्रमिकों की उपलब्धता हो इत्यादि । भारत को 8 बड़े औद्योगिक क्षेत्र और 13 लघु औद्योगिक क्षेत्र में बाँटा गया है। 8 बड़े औद्योगिक क्षेत्र निम्न हैं-
    1. गुरूग्राम - दिल्ली-मेरठ औद्योगिक क्षेत्र 
    2. गुजरात औद्योगिक क्षेत्र 
    3. 3. मुंबई - पुणे औद्योगिक क्षेत्र
    4. बंगलुरू- तमिलनाडु औद्योगिक क्षेत्र
    5. कोल्लम-तिरूवनंतपुरम औद्योगिक क्षेत्र
    6. विशाखापत्तनम - गुंटुर औद्योगिक क्षेत्र
    7. छोटानागपुर औद्योगिक क्षेत्र
    8. हुगली औद्योगिक क्षेत्र |
  • Note : 1. मोटरगाड़ी उद्योग का विकास उद्योग कहा जाता है।
    2. प्लास्टिक उद्योग को सनराइज इंडस्ट्री कहा जाता है।
    3. सॉफ्टवेयर उद्योग को फुटलुज उद्योग की श्रेणी में रखा जाता है।
  • फुटलुज उद्योग : वैसे उद्योग जिसको किसी भी स्थान पर स्थापित करने से कोई हानि नहीं होता है, उसे फुटलुज उद्योग कहा जाता है।
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