पौधों में पोषण : आसान भाषा में सम्पूर्ण जानकारी

 


भूमिका: पौधों के लिए पोषण क्यों जरूरी है?

जिस तरह मनुष्य और पशुओं को जीवित रहने, बढ़ने और स्वस्थ रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, उसी तरह पौधों को भी पोषण (Nutrition) की जरूरत होती है। पौधों का पोषण केवल उनकी वृद्धि तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे फसल की गुणवत्ता, उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और जीवन चक्र सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं।

अगर पौधों को सही समय पर और सही मात्रा में पोषक तत्व न मिलें, तो पौधे कमजोर हो जाते हैं, पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, फूल-फल कम लगते हैं और अंततः उत्पादन घट जाता है।

इस लेख में हम पौधों के पोषण को बहुत आसान भाषा में, उदाहरणों के साथ समझेंगे।


पौधों में पोषण की परिभाषा

पौधों द्वारा मिट्टी, पानी और हवा से आवश्यक तत्वों को ग्रहण करके उनका उपयोग ऊर्जा, वृद्धि और विकास के लिए करना ही पौधों का पोषण कहलाता है।

पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, इसलिए उन्हें स्वपोषी (Autotrophic) कहा जाता है।


पौधे भोजन कैसे बनाते हैं? (प्रकाश संश्लेषण)

पौधों का भोजन बनाने का तरीका प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) कहलाता है।

प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक चीजें:

  • सूर्य का प्रकाश
  • कार्बन डाइऑक्साइड (हवा से)
  • पानी (मिट्टी से)
  • क्लोरोफिल (पत्तियों में)

प्रक्रिया:

पौधे सूर्य के प्रकाश की मदद से पानी और कार्बन डाइऑक्साइड से ग्लूकोज (भोजन) बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।

👉 इसलिए पौधों का पोषण केवल खाद तक सीमित नहीं है, बल्कि पानी, हवा और रोशनी भी उतनी ही जरूरी हैं।


पौधों के पोषक तत्व कितने प्रकार के होते हैं?

पौधों को कुल 17 आवश्यक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इन्हें मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जाता है:

  1. मुख्य पोषक तत्व (Macronutrients)
  2. द्वितीयक पोषक तत्व (Secondary nutrients)
  3. सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients)


1️⃣ मुख्य पोषक तत्व (Macronutrients)

ये वे तत्व हैं जिनकी पौधों को अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है।

(क) नाइट्रोजन (Nitrogen – N)

काम:

  • पौधे की हरी वृद्धि
  • पत्तियों का विकास
  • प्रोटीन निर्माण

कमी के लक्षण:

  • पत्तियां पीली पड़ना
  • पौधे की धीमी वृद्धि
  • कमजोर तना

स्रोत:

  • यूरिया
  • डीएपी
  • गोबर खाद


(ख) फास्फोरस (Phosphorus – P)

काम:

  • जड़ों का विकास
  • फूल और फल लगना
  • ऊर्जा का संचार

कमी के लक्षण:

  • जड़ें कमजोर
  • पौधे बौने
  • पत्तियों का रंग गहरा हरा या बैंगनी

स्रोत:

  • डीएपी
  • सिंगल सुपर फास्फेट


(ग) पोटाश (Potassium – K)

काम:

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता
  • फल की गुणवत्ता
  • पानी का संतुलन

कमी के लक्षण:

  • पत्तियों के किनारे जलना
  • फल छोटे और कमजोर

स्रोत:

  • म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP)


2️⃣ द्वितीयक पोषक तत्व (Secondary Nutrients)

इनकी आवश्यकता मध्यम मात्रा में होती है।

(क) कैल्शियम (Calcium – Ca)

काम:

  • कोशिका भित्ति का निर्माण
  • जड़ों की मजबूती

कमी के लक्षण:

  • नई पत्तियों का मुड़ना
  • टमाटर में ब्लॉसम एंड रॉट


(ख) मैग्नीशियम (Magnesium – Mg)

काम:

  • क्लोरोफिल का निर्माण
  • प्रकाश संश्लेषण में सहायता

कमी के लक्षण:

  • पुरानी पत्तियों में पीला रंग
  • नसें हरी रहना


(ग) सल्फर (Sulphur – S)

काम:

  • प्रोटीन निर्माण
  • स्वाद और तेल की मात्रा

कमी के लक्षण:

  • नई पत्तियां पीली
  • पौधे कमजोर


3️⃣ सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients)

इनकी आवश्यकता बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन महत्व बहुत अधिक होता है।

प्रमुख सूक्ष्म तत्व:

  • लोहा (Iron – Fe)
  • जिंक (Zinc – Zn)
  • तांबा (Copper – Cu)
  • मैंगनीज (Manganese – Mn)
  • बोरॉन (Boron – B)
  • मोलिब्डेनम (Mo)
  • क्लोरीन (Cl)

उदाहरण:

जिंक की कमी से धान में “खैरा रोग” होता है।
लोहे की कमी से पत्तियां पीली हो जाती हैं।


पौधों में पोषक तत्व कैसे पहुंचते हैं?

1️⃣ मिट्टी के माध्यम से

जड़ें मिट्टी से घुले हुए पोषक तत्वों को अवशोषित करती हैं।

2️⃣ पत्तियों के माध्यम से (फोलियर स्प्रे)

सूक्ष्म तत्वों की कमी में पत्तियों पर स्प्रे किया जाता है।


संतुलित पोषण क्यों जरूरी है?

केवल एक खाद देने से फसल अच्छी नहीं होती।
संतुलित पोषण का मतलब है—

  • सही तत्व
  • सही मात्रा
  • सही समय

अगर नाइट्रोजन ज्यादा और पोटाश कम होगा, तो पौधा हरा तो होगा लेकिन फल नहीं देगा।


जैविक खाद और रासायनिक खाद में अंतर

जैविक खाद:

  • गोबर खाद
  • वर्मी कंपोस्ट
  • हरी खाद

फायदे:
मिट्टी की सेहत सुधारती है, लंबे समय तक असर।

रासायनिक खाद:

  • यूरिया
  • डीएपी
  • पोटाश

फायदे:
तुरंत असर, लेकिन अधिक प्रयोग से नुकसान।


पोषण की कमी से होने वाले सामान्य नुकसान

  • उत्पादन में कमी
  • रोगों का प्रकोप
  • मिट्टी की उर्वरता कम
  • फसल की गुणवत्ता खराब


निष्कर्ष

पौधों का पोषण कृषि की रीढ़ है।
अगर किसान या बागवान पौधों को सही पोषण दें, तो:

  • उत्पादन बढ़ेगा
  • लागत घटेगी
  • मिट्टी स्वस्थ रहेगी

आज के समय में मिट्टी परीक्षण, संतुलित खाद और जैविक तरीकों को अपनाकर ही टिकाऊ खेती संभव है।

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