भूमिका: जंतुओं के लिए पोषण क्यों आवश्यक है?
धरती पर पाए जाने वाले सभी जंतु—चाहे वे मनुष्य हों, पशु हों या पक्षी—अपने जीवन को बनाए रखने के लिए भोजन पर निर्भर रहते हैं। जंतुओं में पोषण (Animal Nutrition) वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से जंतु भोजन प्राप्त करते हैं, उसे पचाते हैं और उससे ऊर्जा, वृद्धि तथा शरीर की मरम्मत के लिए आवश्यक तत्व प्राप्त करते हैं।
पोषण के बिना किसी भी जंतु का जीवित रहना असंभव है। सही पोषण से जंतु स्वस्थ रहते हैं, बीमारियों से लड़ पाते हैं और सामान्य रूप से अपना जीवन-चक्र पूरा करते हैं।
जंतुओं में पोषण की परिभाषा
भोजन को ग्रहण करना, उसका पाचन करना, पोषक तत्वों का अवशोषण और शरीर में उनका उपयोग करना—इन सभी प्रक्रियाओं को मिलाकर जंतुओं में पोषण कहा जाता है।
जंतु स्वयं भोजन नहीं बना सकते, इसलिए उन्हें परपोषी (Heterotrophic) कहा जाता है।
जंतुओं को भोजन की आवश्यकता क्यों होती है?
जंतुओं को भोजन निम्न कारणों से आवश्यक होता है—
- ऊर्जा प्राप्त करने के लिए
- शरीर की वृद्धि और विकास के लिए
- टूटी-फूटी कोशिकाओं की मरम्मत के लिए
- रोगों से बचाव के लिए
- शारीरिक क्रियाओं को सुचारु रखने के लिए
जंतुओं के पोषक तत्व कितने प्रकार के होते हैं?
जंतुओं को भोजन से मिलने वाले पोषक तत्व मुख्य रूप से छह प्रकार के होते हैं—
- कार्बोहाइड्रेट
- प्रोटीन
- वसा
- विटामिन
- खनिज लवण
- जल (पानी)
1️⃣ कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates)
कार्य:
कार्बोहाइड्रेट जंतुओं के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत होते हैं।
उदाहरण:
चावल, गेहूं, मक्का, आलू, चीनी
कमी के लक्षण:
- थकान
- कमजोरी
- वजन कम होना
2️⃣ प्रोटीन (Proteins)
कार्य:
- शरीर की वृद्धि
- मांसपेशियों और ऊतकों का निर्माण
- शरीर की मरम्मत
उदाहरण:
दालें, दूध, अंडा, मांस, मछली
कमी के लक्षण:
- बच्चों में कुपोषण
- शरीर का विकास रुकना
- रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना
3️⃣ वसा (Fats)
कार्य:
- अधिक ऊर्जा प्रदान करना
- शरीर को ठंड से बचाना
- अंगों की सुरक्षा
उदाहरण:
घी, तेल, मक्खन, मेवे
कमी के लक्षण:
- त्वचा रूखी
- ऊर्जा की कमी
4️⃣ विटामिन (Vitamins)
विटामिन शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
प्रमुख विटामिन और उनके कार्य:
- विटामिन A: आंखों के लिए
- विटामिन B: ऊर्जा और तंत्रिका तंत्र
- विटामिन C: रोग प्रतिरोधक क्षमता
- विटामिन D: हड्डियों के लिए
- विटामिन E: त्वचा
- विटामिन K: रक्त का थक्का
5️⃣ खनिज लवण (Minerals)
कार्य:
- हड्डियों और दांतों का निर्माण
- रक्त निर्माण
- तंत्रिका क्रियाएं
उदाहरण:
कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस, आयोडीन
6️⃣ जल (Water)
जल के बिना जीवन संभव नहीं।
कार्य:
- पाचन में सहायता
- शरीर का तापमान नियंत्रित
- अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालना
जंतुओं में पोषण की प्रक्रिया
जंतुओं में पोषण पाँच चरणों में होता है—
- भोजन ग्रहण (Ingestion)
- पाचन (Digestion)
- अवशोषण (Absorption)
- समाकलन (Assimilation)
- मलत्याग (Egestion)
मानव में पाचन तंत्र (संक्षेप में)
मानव पाचन तंत्र में शामिल हैं—
- मुख
- ग्रसनी
- अन्ननली
- आमाशय
- छोटी आंत
- बड़ी आंत
मुख में लार भोजन को नरम करती है।
आमाशय में अम्ल भोजन को तोड़ता है।
छोटी आंत में पोषक तत्व अवशोषित होते हैं।
विभिन्न जंतुओं में पोषण के प्रकार
1️⃣ शाकाहारी जंतु
घास, पत्तियां खाते हैं।
उदाहरण: गाय, बकरी
2️⃣ मांसाहारी जंतु
मांस खाते हैं।
उदाहरण: शेर, बाघ
3️⃣ सर्वाहारी जंतु
पौधे और मांस दोनों खाते हैं।
उदाहरण: मनुष्य, कुत्ता
जुगाली करने वाले जंतु
गाय, भैंस जैसे जंतु भोजन को बार-बार चबाते हैं। इनके पेट में चार कक्ष होते हैं।
पोषण की कमी से होने वाले रोग
- एनीमिया: आयरन की कमी
- रिकेट्स: विटामिन D की कमी
- स्कर्वी: विटामिन C की कमी
- क्वाशियोरकर: प्रोटीन की कमी
संतुलित आहार क्या है?
जिस भोजन में सभी आवश्यक पोषक तत्व सही मात्रा में मौजूद हों, उसे संतुलित आहार कहते हैं।
निष्कर्ष
जंतुओं में पोषण जीवन की आधारशिला है।
सही और संतुलित पोषण से जंतु स्वस्थ, सक्रिय और रोग-मुक्त रहते हैं। आज के समय में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि कुपोषण और बीमारियों से बचा जा सके।
