जैव विविधता और संरक्षण (Biodiversity and Conservation) – Class 10
भूमिका
हमारी पृथ्वी पर जीवन की विविधता ही प्रकृति की सबसे बड़ी शक्ति है। पेड़-पौधे, जानवर, कीट-पतंगे, सूक्ष्मजीव और मनुष्य – सभी मिलकर एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं। इस विविध जीवन रूपों को ही जैव विविधता (Biodiversity) कहा जाता है।
लेकिन आज औद्योगीकरण, वनों की कटाई, प्रदूषण और जनसंख्या वृद्धि के कारण जैव विविधता तेजी से नष्ट हो रही है। इसलिए जैव विविधता का संरक्षण आज मानव जाति की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।
जैव विविधता क्या है?
जैव विविधता का अर्थ है – पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी प्रकार के जीवों में विविधता। इसमें तीन स्तर शामिल होते हैं:
1️⃣ आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity)
एक ही प्रजाति के जीवों में पाए जाने वाले गुणों की भिन्नता को आनुवंशिक विविधता कहते हैं।
उदाहरण: गेहूं, चावल, आम की अलग-अलग किस्में।
👉 यह विविधता जीवों को बदलते पर्यावरण में जीवित रहने में मदद करती है।
2️⃣ प्रजातीय विविधता (Species Diversity)
किसी क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियों की संख्या को प्रजातीय विविधता कहते हैं।
उदाहरण: जंगल में शेर, हाथी, हिरण, पक्षी, कीट आदि।
3️⃣ पारिस्थितिक विविधता (Ecosystem Diversity)
विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता को पारिस्थितिक विविधता कहते हैं।
उदाहरण: जंगल, रेगिस्तान, समुद्र, घास के मैदान, पर्वतीय क्षेत्र।
जैव विविधता का महत्व
जैव विविधता हमारे जीवन के हर क्षेत्र से जुड़ी है।
🌱 पर्यावरण संतुलन
सभी जीव एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। अगर एक कड़ी टूटती है तो पूरा संतुलन बिगड़ जाता है।
🌾 भोजन और कृषि
हमारा भोजन पौधों और जानवरों से मिलता है। जैव विविधता से ही नई फसल किस्में विकसित होती हैं।
💊 औषधीय महत्व
लगभग 70% दवाएं पौधों और जीवों से प्राप्त होती हैं।
🌧️ जलवायु नियंत्रण
वन वर्षा, तापमान और वायुमंडलीय संतुलन बनाए रखते हैं।
🧬 विकास और अनुकूलन
जैव विविधता से ही जीव समय के साथ विकसित होते हैं और नई परिस्थितियों में ढलते हैं।
भारत में जैव विविधता
भारत विश्व के 17 मेगा जैव विविधता वाले देशों में शामिल है।
🔹 भारत में विश्व की लगभग
- 7% पौधों की प्रजातियां
- 6.5% पशु प्रजातियां
भारत के प्रमुख जैव विविधता क्षेत्र:
- हिमालय
- पश्चिमी घाट
- सुंदरबन
- पूर्वोत्तर भारत
- अंडमान-निकोबार द्वीप
जैव विविधता को होने वाले खतरे
आज जैव विविधता गंभीर संकट में है।
🚫 वनों की कटाई
पेड़ कटने से जानवरों का आवास नष्ट हो जाता है।
🏭 प्रदूषण
जल, वायु और भूमि प्रदूषण जीवों के लिए घातक है।
🧑🤝🧑 जनसंख्या वृद्धि
अधिक संसाधनों की मांग से प्रकृति पर दबाव बढ़ता है।
🔫 अवैध शिकार
जानवरों की संख्या तेजी से घट रही है।
🌍 जलवायु परिवर्तन
तापमान बढ़ने से कई प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं।
विलुप्त और संकटग्रस्त प्रजातियां
- विलुप्त (Extinct): जो प्रजातियां पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं।
- संकटग्रस्त (Endangered): जो विलुप्त होने की कगार पर हैं।
जैव विविधता संरक्षण क्या है?
प्राकृतिक जीवों, उनके आवास और पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को जैव विविधता संरक्षण कहते हैं।
संरक्षण के प्रकार
🟢 इन-सीटू संरक्षण (In-situ Conservation)
प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में ही सुरक्षित रखना।
उदाहरण:
- राष्ट्रीय उद्यान
- वन्यजीव अभयारण्य
- जैवमंडल रिज़र्व
👉 भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान:
- जिम कॉर्बेट
- काजीरंगा
- रणथंभौर
🔵 एक्स-सीटू संरक्षण (Ex-situ Conservation)
जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर सुरक्षित रखना।
उदाहरण:
- चिड़ियाघर
- वनस्पति उद्यान
- बीज बैंक
- जीन बैंक
राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य में अंतर
| राष्ट्रीय उद्यान | वन्यजीव अभयारण्य |
|---|---|
| मानव गतिविधियां प्रतिबंधित | सीमित गतिविधियां संभव |
| कठोर सुरक्षा | तुलनात्मक रूप से कम |
जैवमंडल रिज़र्व
ये बड़े क्षेत्र होते हैं जहां वन, जीव, मानव और संस्कृति तीनों का संतुलन रखा जाता है।
भारत के प्रमुख जैवमंडल रिज़र्व:
- नीलगिरी
- सुंदरबन
- नंदा देवी
जैव विविधता संरक्षण में सरकार की भूमिका
- वन संरक्षण अधिनियम
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण
जनभागीदारी का महत्व
केवल सरकार ही नहीं, आम लोगों की भूमिका भी बेहद जरूरी है।
✔️ पेड़ लगाना
✔️ प्लास्टिक का कम उपयोग
✔️ वन्यजीवों की रक्षा
✔️ पर्यावरण के प्रति जागरूकता
छात्रों की भूमिका
- पर्यावरण क्लब से जुड़ना
- स्कूल में पौधारोपण
- जल और ऊर्जा की बचत
- जैव विविधता पर जागरूकता फैलाना
निष्कर्ष
जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन का आधार है। अगर हमने आज इसे नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी। संरक्षण केवल एक विषय नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है।
“प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य बचेगा।”
