ऊतक (पौधों व जंतुओं के) : आसान भाषा में सम्पूर्ण जानकारी

 


ऊतक (पौधों व जंतुओं के ऊतक) Tissues in Plants and Animals in Hindi

भूमिका (Introduction)

जीवों का शरीर केवल कोशिकाओं से ही नहीं, बल्कि कोशिकाओं के संगठित समूहों से मिलकर बना होता है। जब एक जैसी संरचना और समान कार्य करने वाली कोशिकाएं मिलकर एक समूह बनाती हैं, तो उसे ऊतक (Tissue) कहा जाता है। ऊतक शरीर को सुव्यवस्थित बनाते हैं और विभिन्न कार्यों को सरल तथा प्रभावी ढंग से पूरा करने में मदद करते हैं।

पौधों और जंतुओं—दोनों में ऊतक पाए जाते हैं, लेकिन उनकी संरचना और कार्य में काफी अंतर होता है। इस लेख में हम ऊतक की परिभाषा, प्रकार, पौधों के ऊतक और जंतुओं के ऊतक को आसान भाषा में विस्तार से समझेंगे।

ऊतक क्या है? (What is Tissue?)

परिभाषा:
👉 समान उत्पत्ति, समान संरचना और समान कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह को ऊतक कहते हैं।

उदाहरण के लिए, मांसपेशियों की कोशिकाएं मिलकर मांसपेशी ऊतक बनाती हैं, जो शरीर की गति में सहायक होती हैं।

ऊतक का महत्व (Importance of Tissues)

  • शरीर के कार्यों का विभाजन आसान होता है
  • जटिल जीवों का निर्माण संभव होता है
  • कार्य कुशलता बढ़ती है
  • वृद्धि और विकास में सहायता मिलती है

ऊतक के प्रकार (Types of Tissues)

ऊतकों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:

  1. पौधों के ऊतक (Plant Tissues)
  2. जंतुओं के ऊतक (Animal Tissues)

🌿 पौधों के ऊतक (Plant Tissues)

पौधों में ऊतकों का मुख्य कार्य वृद्धि, सहारा, परिवहन और भोजन निर्माण होता है। पौधों के ऊतक दो प्रकार के होते हैं:

  1. विभज्योतक ऊतक
  2. स्थायी ऊतक

1. विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue)

यह ऊतक पौधों में निरंतर विभाजन करता रहता है, जिससे पौधे की वृद्धि होती है।

विशेषताएं:

  • कोशिकाएं लगातार विभाजित होती हैं
  • कोशिकाएं जीवित होती हैं
  • अंतरकोशिकीय स्थान नहीं होता

विभज्योतक ऊतक के प्रकार:

(क) शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem)

स्थान: जड़ और तने के सिरे पर
कार्य: पौधे की लंबाई बढ़ाना

(ख) पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem)

स्थान: तने और जड़ के किनारों पर
कार्य: मोटाई बढ़ाना

(ग) अंतर्वर्ती विभज्योतक (Intercalary Meristem)

स्थान: पत्तियों के आधार पर
कार्य: तेजी से वृद्धि करना

2. स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)

जब विभज्योतक कोशिकाएं विभाजन की क्षमता खो देती हैं, तब वे स्थायी ऊतक बनाती हैं।

स्थायी ऊतक दो प्रकार के होते हैं:

  1. सरल स्थायी ऊतक
  2. जटिल स्थायी ऊतक

(A) सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissue)

1. पैरेंकाइमा (Parenchyma)

  • कोशिकाएं जीवित होती हैं
  • कोशिका भित्ति पतली होती है

कार्य:

  • भोजन संग्रह
  • प्रकाश संश्लेषण (क्लोरेनकाइमा)
  • गैसों का आदान-प्रदान

2. कोलेनकाइमा (Collenchyma)

  • कोशिका भित्ति मोटी होती है
  • कोशिकाएं जीवित होती हैं

कार्य:

  • पौधे को लचीलापन और सहारा देना

3. स्क्लेरेंकाइमा (Sclerenchyma)

  • कोशिकाएं मृत होती हैं
  • कोशिका भित्ति बहुत मोटी होती है

कार्य:

  • पौधे को कठोरता और मजबूती देना

(B) जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissue)

1. जाइलम (Xylem)

कार्य:

  • जड़ों से पत्तियों तक जल और खनिजों का परिवहन

2. फ्लोएम (Phloem)

कार्य:

  • पत्तियों में बने भोजन को पूरे पौधे में पहुंचाना

🐾 जंतुओं के ऊतक (Animal Tissues)

जंतुओं में ऊतकों का कार्य अधिक जटिल होता है, जैसे—गति, संवेदन, सुरक्षा और परिवहन।

जंतुओं के ऊतक चार प्रकार के होते हैं:

  1. उपकला ऊतक
  2. संयोजी ऊतक
  3. मांसपेशी ऊतक
  4. तंत्रिका ऊतक

1. उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)

यह ऊतक शरीर की बाहरी और आंतरिक सतह को ढकता है।

कार्य:

  • सुरक्षा
  • अवशोषण
  • स्राव

प्रकार:

  • स्क्वैमस उपकला
  • क्यूबॉयडल उपकला
  • कॉलम्नर उपकला

2. संयोजी ऊतक (Connective Tissue)

यह ऊतक शरीर के विभिन्न अंगों को जोड़ता है।

प्रकार:

  • रक्त
  • अस्थि
  • उपास्थि
  • वसा ऊतक

कार्य:

  • सहारा देना
  • पदार्थों का परिवहन
  • सुरक्षा

3. मांसपेशी ऊतक (Muscular Tissue)

यह ऊतक शरीर की गति में सहायक होता है।

प्रकार:

  1. धारीदार मांसपेशी
  2. अधारीदार मांसपेशी
  3. हृदय मांसपेशी

कार्य:

  • शरीर की गति
  • अंगों की गति
  • रक्त प्रवाह में सहायता

4. तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)

यह ऊतक संदेशों का आदान-प्रदान करता है।

कार्य:

  • संवेदनाओं को पहचानना
  • मस्तिष्क और शरीर के बीच संदेश पहुंचाना

पौधों और जंतुओं के ऊतकों में अंतर

आधार            पौधों के ऊतक                जंतुओं के ऊतक
गति               नहीं होती                   होती है
वृद्धि               जीवनभर                    सीमित
प्रमुख कार्य               भोजन, सहारा                   गति, नियंत्रण
संरचना                 सरल                      जटिल

ऊतक का जैविक महत्व

  • शरीर को संगठित बनाना
  • कार्यों का विशेषीकरण
  • ऊर्जा की बचत
  • जटिल जीवन का विकास

निष्कर्ष (Conclusion)

ऊतक जीवों के शरीर की संरचनात्मक और क्रियात्मक आधारशिला हैं। पौधों और जंतुओं—दोनों में ऊतकों की संरचना उनके कार्यों के अनुसार विकसित हुई है। ऊतकों के बिना न तो पौधों की वृद्धि संभव है और न ही जंतुओं की गति और संवेदन। इसलिए ऊतक जीव विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है।

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