प्रजनन (मानव और अन्य जीवों में) | Class 10 Biology हिंदी में
भूमिका (Introduction)
प्रजनन जीवों की एक महत्वपूर्ण जीवन प्रक्रिया है। इसके माध्यम से जीव अपने जैसे नए जीव उत्पन्न करते हैं। यदि प्रजनन न हो, तो किसी भी जाति का अस्तित्व कुछ समय में समाप्त हो जाएगा। प्रजनन न केवल जीवों की संख्या बढ़ाता है, बल्कि आनुवंशिक विविधता भी उत्पन्न करता है, जिससे जीव पर्यावरण के अनुसार स्वयं को ढाल पाते हैं।
कक्षा 10 जीवविज्ञान का यह अध्याय मानव तथा अन्य जीवों में प्रजनन की पूरी प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाता है।
प्रजनन क्या है? (What is Reproduction)
प्रजनन वह जैविक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा कोई जीव अपने समान नए जीव उत्पन्न करता है।
इसका मुख्य उद्देश्य:
- जीवन की निरंतरता बनाए रखना
- जाति को विलुप्त होने से बचाना
प्रजनन के प्रकार
प्रजनन को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:
- अलैंगिक प्रजनन (Asexual Reproduction)
- लैंगिक प्रजनन (Sexual Reproduction)
1️⃣ अलैंगिक प्रजनन (Asexual Reproduction)
इस प्रकार के प्रजनन में केवल एक जनक भाग लेता है और गैमेट्स का निर्माण नहीं होता।
अलैंगिक प्रजनन की विशेषताएं
- प्रक्रिया सरल और तेज होती है
- संतानों में विविधता नहीं होती
- जनक और संतान समान होते हैं
अलैंगिक प्रजनन के प्रकार
🔹 (क) द्विखंडन (Binary Fission)
एक कोशिका दो समान कोशिकाओं में विभाजित हो जाती है।
उदाहरण: अमीबा, पैरामीशियम
🔹 (ख) बहुखंडन (Multiple Fission)
एक कोशिका एक साथ कई कोशिकाओं में टूट जाती है।
उदाहरण: प्लास्मोडियम
🔹 (ग) कली द्वारा प्रजनन (Budding)
जनक के शरीर पर एक कली बनती है, जो बढ़कर नया जीव बन जाती है।
उदाहरण: यीस्ट, हाइड्रा
🔹 (घ) विखंडन (Fragmentation)
शरीर के टुकड़े अलग होकर नए जीव बनाते हैं।
उदाहरण: स्पाइरोजाइरा
🔹 (ङ) बीजाणु द्वारा प्रजनन (Spore Formation)
बीजाणु अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होकर नया पौधा बनाते हैं।
उदाहरण: फर्न, फंगस
2️⃣ लैंगिक प्रजनन (Sexual Reproduction)
इस प्रकार के प्रजनन में नर और मादा दोनों जनक भाग लेते हैं।
इसमें गैमेट्स का निर्माण और उनका संलयन होता है।
लैंगिक प्रजनन की विशेषताएं
- संतानों में विविधता होती है
- विकास धीमा होता है
- जटिल प्रक्रिया होती है
मानव में लैंगिक प्रजनन
🔸 पुरुष जनन तंत्र (Male Reproductive System)
मुख्य भाग:
- वृषण (Testes): शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण
- शुक्रवाहिका (Vas deferens)
- प्रोस्टेट ग्रंथि
- लिंग (Penis)
🔸 महिला जनन तंत्र (Female Reproductive System)
मुख्य भाग:
- अंडाशय (Ovary): अंडाणु और एस्ट्रोजन हार्मोन
- अंडवाहिनी (Fallopian Tube)
- गर्भाशय (Uterus)
- योनि (Vagina)
निषेचन (Fertilization)
जब शुक्राणु और अंडाणु का संलयन होता है, तब युग्मनज (Zygote) बनता है।
यह प्रक्रिया सामान्यतः अंडवाहिनी में होती है।
भ्रूण विकास और गर्भधारण
- युग्मनज विभाजित होकर भ्रूण बनाता है
- भ्रूण गर्भाशय की दीवार में स्थापित होता है
- लगभग 9 महीने में शिशु का विकास पूर्ण होता है
किशोरावस्था (Puberty)
इस अवस्था में:
- हार्मोनल परिवर्तन होते हैं
- शारीरिक और मानसिक विकास होता है
- प्रजनन अंग सक्रिय हो जाते हैं
मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle)
महिलाओं में लगभग 28 दिनों का चक्र होता है।
यदि निषेचन नहीं होता, तो गर्भाशय की आंतरिक परत झड़ जाती है।
गर्भनिरोध (Contraception)
गर्भधारण को रोकने की प्रक्रिया को गर्भनिरोध कहते हैं।
गर्भनिरोध के तरीके
- कंडोम
- गर्भनिरोधक गोलियां
- कॉपर-टी
- नसबंदी
अन्य जीवों में प्रजनन
पौधों में प्रजनन
- अलैंगिक: कलम, परत, कंद
- लैंगिक: फूल, परागण और निषेचन
परागण (Pollination)
परागकणों का परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुंचना।
निषेचन के बाद
- बीज और फल का निर्माण
- नए पौधे का विकास
प्रजनन का महत्व
- जीवन की निरंतरता
- आनुवंशिक विविधता
- अनुकूलन की क्षमता
निष्कर्ष (Conclusion)
प्रजनन जीवन की आधारभूत प्रक्रिया है। मानव और अन्य जीवों में प्रजनन की अलग-अलग विधियां जीवन को बनाए रखने में सहायक हैं। यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और जीवन के वैज्ञानिक रहस्यों को समझने में मदद करता है।
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