शॉर्ट नोट्सः ई-गवर्नेस और सुशासन।
Q. शॉर्ट नोट्सः ई-गवर्नेस और सुशासन।
Ans -
विश्व बैंक (World Bank) और द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) के अनुसार, सुशासन (Good Governance) एक पारदर्शी, उत्तरदायी, समतामूलक और कानून के शासन पर आधारित प्रशासनिक व्यवस्था है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में 'ई-गवर्नेंस' (e-Governance) सबसे सशक्त उत्प्रेरक (Catalyst) है। ई-गवर्नेंस का अर्थ केवल प्रशासनिक कार्यों का कम्प्यूटरीकरण नहीं है, बल्कि सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के माध्यम से सरकारी सेवाओं की पहुंच, गुणवत्ता और दक्षता में आमूलचूल परिवर्तन कर 'SMART' (Simple, Moral, Accountable, Responsive, and Transparent) शासन की स्थापना करना है।
सुशासन की स्थापना में ई-गवर्नेंस की भूमिका
प्रशासनिक कार्यप्रणाली को नागरिक-केंद्रित बनाने में ई-गवर्नेंस निम्नलिखित तंत्रों के माध्यम से कार्य करता है:
1. पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर प्रहार
बिचौलियों की समाप्ति: प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और जेम पोर्टल (GeM Portal) जैसी सार्वजनिक खरीद प्रणालियों ने बिचौलियों को समाप्त कर दिया है। इससे 'लाल फीताशाही' (Red-tapism) और सूचना की विषमता (Information Asymmetry) दूर हुई है।
निर्णय प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण: फाइलों की डिजिटल ट्रैकिंग (जैसे e-Office) से यह सुनिश्चित होता है कि कोई भी फाइल किस अधिकारी के पास कितने समय तक लंबित रही।
2. प्रशासनिक जवाबदेही और गति (Accountability)
CPGRAMS (केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली) और 'मेरी सरकार' (MyGov) जैसी ई-भागीदारी पहलें नागरिकों को नीति-निर्माण और शिकायत निवारण में सीधे जोड़ती हैं, जिससे नौकरशाही की जवाबदेही तय होती है।
डेटा-संचालित निर्णय (Data-driven Decision Making): डेशबोर्ड और रियल-टाइम निगरानी से योजनाओं की प्रगति का सटीक मूल्यांकन संभव हो पाया है।
बिहार के विशेष संदर्भ में ई-गवर्नेंस पहलें
बिहार जैसे राज्य में, जहां विशाल भौगोलिक विस्तार और जनसंख्या के कारण प्रशासनिक पहुंच ऐतिहासिक रूप से एक चुनौती रही है, ई-गवर्नेंस सुशासन का मुख्य आधार बन गया है:
लोक सेवाओं का अधिकार (RTPS) और सर्विस प्लस: पटना से लेकर राज्य के सभी जिलों और प्रखंडों तक जाति, आय और निवास प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन कर दिया गया है। इसने ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की है।
कृषि और समाज कल्याण में DBT: 'कृषि इनपुट अनुदान' और 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' के तहत बिना किसी रिसाव (Leakage) के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में धनराशि का पारदर्शी हस्तांतरण किया जा रहा है।
राजस्व और शिक्षा प्रशासन: निबंधन (Registration) प्रक्रियाओं के लिए 'ओग्रास' (O-GRAS) प्रणाली ने राज्य के राजस्व संग्रहण में भ्रष्टाचार को रोका है। वहीं, शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालयी निगरानी के लिए 'ई-शिक्षाकोष' (e-Shikshakosh) का सफल क्रियान्वयन एक आधुनिक प्रशासनिक कदम है।
विद्यमान चुनौतियां
डिजिटल डिवाइड (Digital Divide): बिहार में ब्रॉडबैंड की पहुंच और डिजिटल साक्षरता अभी भी राष्ट्रीय औसत से कम है। इंटरनेट तक पहुंच का अभाव ग्रामीण-शहरी खाई को और अधिक चौड़ा करता है।
डेटा सुरक्षा और निजता (Cyber Security): नागरिकों के संवेदनशील डेटा (जैसे स्वास्थ्य विवरण और बैंकिंग जानकारी) को साइबर हमलों से सुरक्षित रखना तथा अनुच्छेद 21 (निजता के अधिकार) की रक्षा करना एक गंभीर चुनौती है।
बुनियादी ढांचे का अभाव: निर्बाध बिजली आपूर्ति और उच्च गति वाले इंटरनेट नेटवर्क का सुदूर स्तर पर (विशेषकर उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में) अभाव ई-गवर्नेंस की पूर्ण सफलता में बाधक है।
आगे की राह
सुशासन के लिए ई-गवर्नेंस एक साध्य (End) नहीं, बल्कि एक साधन (Means) है। इसके इष्टतम उपयोग के लिए नीति आयोग के विजन के अनुरूप 'डिजिटल साक्षरता अभियान' (PMGDISHA) को पंचायत स्तर पर और अधिक सुदृढ़ करना होगा। बिहार सरकार द्वारा 'सात निश्चय-2' के अंतर्गत 'सुशासन के कार्यक्रम' में तकनीकी उपयोग को बढ़ावा देना एक सकारात्मक दिशा है।
अंततः, तकनीकी समाधानों के साथ-साथ नौकरशाही की मानसिकता (Mindset) में भी परिवर्तन लाना अनिवार्य है। प्रशासन को केवल 'तकनीक-संचालित' (Technology-driven) ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और 'नागरिक-केंद्रित' (Citizen-centric) भी बनाया जाना चाहिए, ताकि डिजिटल इंडिया का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति (अंत्योदय) तक पहुंच सके।