'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के प्रमुख स्तंभों की विवेचना करें। क्या यह वैश्वीकरण के विपरीत है?
Q. 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के प्रमुख स्तंभों की विवेचना करें। क्या यह वैश्वीकरण के विपरीत है?
Ans -
भूमिका
कोविड-19 महामारी जनित अभूतपूर्व संकट ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी राष्ट्र की आर्थिक सुरक्षा उसकी घरेलू उत्पादन क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता पर निर्भर करती है। इसी रणनीतिक आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए, भारत सरकार द्वारा मई 2020 में 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' (Aatmanirbhar Bharat Abhiyan) की उद्घोषणा की गई।
इस अभियान के तहत ₹20 लाख करोड़ (भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 10%) के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई। इस पहल का मूल उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को विदेशी निर्भरता से मुक्त कर उसे अधिक लचीला (Resilient), आत्मनिर्भर और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) का एक विश्वसनीय केंद्र बनाना है। यह नीति केवल आर्थिक पैकेज नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा का एक नया संरचनात्मक प्रतिमान है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान के पाँच प्रमुख स्तंभ
'आत्मनिर्भर भारत' की संकल्पना पांच सुदृढ़ स्तंभों पर टिकी है, जो अर्थव्यवस्था के प्रत्येक आयाम को समग्रता में संबोधित करते हैं:
1. अर्थव्यवस्था (Economy)
यह स्तंभ अर्थव्यवस्था में क्रमिक वृद्धि (Incremental change) के बजाय 'क्वांटम जंप' (Quantum Jump) लाने पर केंद्रित है।
इसके तहत उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (Production Linked Incentive - PLI) योजनाओं के माध्यम से 14 प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों (जैसे- इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल्स) में निवेश और उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
2. अवसंरचना (Infrastructure)
यह आधुनिक भारत की वह पहचान है जो 21वीं सदी की आवश्यकताओं को पूरा करती है।
इसके अंतर्गत 'पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान' (PM Gati Shakti) और 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (NIP) के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का निर्माण किया जा रहा है, ताकि उत्पादन और परिवहन लागत (Logistics Cost) को वैश्विक मानकों (8-9%) के अनुरूप लाया जा सके।
3. प्रणाली (System)
यह एक ऐसी प्रणाली के निर्माण पर बल देता है जो अतीत के नियमों के बजाय प्रौद्योगिकी-संचालित (Technology-driven) हो।
'डिजिटल इंडिया', 'ई-गवर्नेंस', 'UPI' का वैश्विक विस्तार और 'ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स' (ONDC) जैसे नवाचार इस स्तंभ के जीवंत उदाहरण हैं, जो लाल फीताशाही (Red Tapism) को समाप्त कर अनुपालन को सुगम बनाते हैं।
4. जीवंत जनसांख्यिकी (Vibrant Demography)
भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश है। यह स्तंभ इस 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) को राष्ट्र की ऊर्जा और उत्पादकता में बदलने का मार्ग प्रशस्त करता है।
'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' (NEP 2020) और 'कौशल भारत मिशन' के माध्यम से युवाओं को उद्योग-अनुकूल (Industry-ready) बनाना इस स्तंभ का मुख्य लक्ष्य है।
5. मांग (Demand)
यह स्तंभ भारत की विशाल घरेलू मांग और आपूर्ति श्रृंखला की पूर्ण क्षमता के इष्टतम उपयोग पर केंद्रित है।
'वोकल फॉर लोकल' (Vocal for Local) के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड बनाने की रणनीति इसके अंतर्गत आती है, जिससे MSME क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण होता है।
क्या आत्मनिर्भर भारत वैश्वीकरण के विपरीत है? (एक विश्लेषणात्मक मूल्यांकन)
आलोचकों द्वारा यह आशंका व्यक्त की जाती रही है कि यह अभियान 1991-पूर्व की 'आयात प्रतिस्थापन' (Import Substitution) और 'संरक्षणवादी' (Protectionist) नीतियों की ओर वापसी है। परंतु, एक वस्तुनिष्ठ प्रशासनिक और आर्थिक विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि आत्मनिर्भर भारत वैश्वीकरण के विपरीत नहीं, बल्कि एक संशोधित और अधिक न्यायसंगत वैश्वीकरण का पूरक है:
'वसुधैव कुटुंबकम' का दर्शन: आत्मनिर्भर भारत का उद्देश्य दुनिया से कटना (Isolationism) नहीं है। यह भारत की उस प्राचीन दृष्टि से प्रेरित है जहाँ घरेलू मजबूती से वैश्विक कल्याण सुनिश्चित होता है।
वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chain) में एकीकरण: यह नीति आयात पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाती, बल्कि भारत को 'कच्चे माल के निर्यातक' की भूमिका से निकालकर एक सशक्त 'विनिर्माण केंद्र' (Manufacturing Hub) के रूप में स्थापित करती है। इसका लक्ष्य भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय और लचीला भागीदार बनाना है ('Make in India, Make for the World')।
सकारात्मक प्रतिस्पर्धात्मकता (Positive Competitiveness): यह घरेलू उद्योगों (विशेषकर MSMEs) को तकनीकी और अवसंरचनात्मक सहायता प्रदान कर उन्हें वैश्विक मानकों पर प्रतिस्पर्धा करने योग्य बनाता है, न कि टैरिफ की दीवारों के पीछे छुपाता है।
वैश्विक संकटों में भारत का योगदान: महामारी के दौरान 100 से अधिक देशों को 'वैक्सीन मैत्री' के तहत टीकों की आपूर्ति और विश्व को आवश्यक दवाइयों (APIs) का निर्यात इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि आत्मनिर्भर भारत एक बहिर्मुखी (Outward-looking) और विश्व-कल्याणकारी नीति है।
बिहार के विशेष संदर्भ में प्रासंगिकता एवं प्रभाव
आत्मनिर्भर भारत अभियान की वास्तविक सफलता राज्यों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर है। बिहार जैसे संसाधन-सीमित परंतु मानव पूंजी से समृद्ध राज्य के लिए यह अभियान एक 'गेम चेंजर' (Game Changer) सिद्ध हो रहा है:
'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) का विस्तार: राज्य सरकार के प्रयासों से मखाना, शाही लीची, कतरनी चावल और मक्का प्रसंस्करण जैसे कृषि-उद्योगों का विकास केवल राजधानी क्षेत्र तक सीमित न रहकर पटना और बिहार के सभी जिलों में सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSMEs) के नए क्लस्टर्स के रूप में हो रहा है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता में बिहार का नेतृत्व: भारत की हरित ऊर्जा रणनीति के अंतर्गत, बिहार सरकार की 'एथेनॉल उत्पादन संवर्धन नीति 2021' ने राज्य को जैव-ईंधन (Bio-fuel) उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में लाकर खड़ा कर दिया है, जिससे कृषि अपशिष्ट और अधिशेष मक्के का उपयोग कर किसानों की आय बढ़ रही है।
युवा शक्ति का नियोजन: 'मुख्यमंत्री उद्यमी योजना' जैसी पहलों के माध्यम से राज्य के युवा 'रोजगार मांगने वाले' से 'रोजगार प्रदाता' बन रहे हैं, जिससे राज्य के जनसांख्यिकीय लाभांश का सटीक उपयोग हो रहा है।
आगे की राह (Way Forward) एवं भविष्य का दृष्टिकोण
'आत्मनिर्भर भारत' केवल एक आर्थिक पैकेज नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय संकल्प है। इसे पूर्णतः धरातल पर उतारने हेतु कुछ संरचनात्मक सुधारों को निरंतर गति देनी होगी:
अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश: भारत को अपने R&D निवेश को जीडीपी के वर्तमान 0.7% से बढ़ाकर कम से कम 2% तक ले जाना होगा, ताकि डीप-टेक (Deep-tech) और एआई (AI) में देश अग्रणी बन सके।
संस्थागत सुधार: नौकरशाही की प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाकर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और निजी निवेश के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के साथ 'ईज ऑफ लिविंग' को सुनिश्चित करना होगा।
कौशल विकास का विकेंद्रीकरण: तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार राज्य के टियर-2 और टियर-3 शहरों तक होना चाहिए।
भारतीय अर्थव्यवस्था की यह अंतर्निहित शक्ति ही उसे बाहरी झटकों से बचाती है। यदि केंद्र और राज्य सरकारें सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना के साथ इन पाँच स्तंभों को सुदृढ़ करती हैं, तो भारत निश्चित रूप से एक सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से एकीकृत अर्थव्यवस्था के रूप में 'विकसित भारत @ 2047' के ऐतिहासिक लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा।