शॉर्ट नोट्सः मुंगेर और बेगूसराय में औद्योगिक विकास।
Q. शॉर्ट नोट्सः मुंगेर और बेगूसराय में औद्योगिक विकास।
Ans -
बिहार के आर्थिक और ढांचागत परिदृश्य में मुंगेर और बेगूसराय ऐतिहासिक रूप से औद्योगिक विकास के प्रमुख 'वृद्धि ध्रुव' (Growth Poles) रहे हैं। गंगा नदी के तटीय क्षेत्र में अवस्थित होने तथा उत्कृष्ट रेल और सड़क संपर्क (Connectivity) के कारण, इन दोनों जिलों ने स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता पश्चात बिहार के औद्योगीकरण की आधारशिला रखी है। बेगूसराय को विशेष रूप से बिहार की 'औद्योगिक राजधानी' (Industrial Capital) के रूप में जाना जाता है।
मुंगेर: ऐतिहासिक और विनिर्माण उद्योग का केंद्र
मुंगेर का औद्योगिक इतिहास अत्यंत प्राचीन है, जिसकी शुरुआत नवाब मीर कासिम द्वारा स्थापित गन फैक्ट्री (Gun Factory) से हुई थी। वर्तमान में यह जिला मुख्य रूप से भारी इंजीनियरिंग और उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण के लिए जाना जाता है:
जमालपुर लोकोमोटिव वर्कशॉप: 1862 में स्थापित, यह भारत और एशिया का पहला और सबसे पुराना रेलवे वर्कशॉप है। इसने लौह और इस्पात आधारित इंजीनियरिंग कौशल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
आईटीसी (ITC) प्लांट: मुंगेर में स्थित इंडियन टोबैको कंपनी का सिगरेट और पैकेजिंग कारखाना राज्य में संगठित क्षेत्र के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं और राजस्व जनकों में से एक है।
बेगूसराय (बरौनी): भारी और ऊर्जा उद्योगों का गढ़
बेगूसराय का बरौनी औद्योगिक क्षेत्र बिहार में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) का सबसे बड़ा केंद्र है, जो राज्य की ऊर्जा और कृषि जरूरतों को पूरा करता है:
बरौनी तेल शोधक कारखाना (Barauni Refinery): 1964 में सोवियत संघ के सहयोग से स्थापित (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के तहत), यह रिफाइनरी पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है और हाल ही में इसके क्षमता विस्तार (Capacity Expansion) को मंजूरी दी गई है।
हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL): दशकों तक बंद रहने के बाद, बरौनी खाद कारखाने को हाल ही में पुनर्जीवित किया गया है। यहाँ 'नीम कोटेड यूरिया' का उत्पादन राज्य की कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में मील का पत्थर है।
बरौनी थर्मल पावर स्टेशन (BTPS): यह राज्य की आधारभूत ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला एक प्रमुख ताप विद्युत संयंत्र है।
कृषि-आधारित उद्योग: 'सुधा डेयरी' का बरौनी प्लांट बिहार के सबसे बड़े दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्रों में से एक है, जो श्वेत क्रांति (White Revolution) को सफल बना रहा है।
औद्योगिक विकास में प्रमुख चुनौतियाँ (रुग्णता के कारण)
ऐतिहासिक लाभ के बावजूद, पिछले कुछ दशकों में इन क्षेत्रों के औद्योगिक विकास की गति धीमी हुई है, जिसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
तकनीकी उन्नयन का अभाव: जमालपुर वर्कशॉप जैसे पुराने कारखानों में आधुनिकीकरण (Modernization) की कमी के कारण उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है।
लॉजिस्टिक और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाएं: माल ढुलाई के लिए समर्पित फ्रेट कॉरिडोर और आधुनिक अंतर्देशीय जलमार्ग (Inland Waterways) का पूरी तरह से विकसित न होना।
निजी निवेश की कमी: भारी सार्वजनिक उपक्रमों के इर्द-गिर्द सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) का जो एक 'सहायक उद्योग' (Ancillary Industry) इकोसिस्टम बनना चाहिए था, वह पर्याप्त निवेश के अभाव में विकसित नहीं हो सका।
आगे की राह और रणनीतिक समाधान
मुंगेर और बेगूसराय की औद्योगिक क्षमता का वास्तविक दोहन करने के लिए नीतिगत सुधार और ढांचागत निवेश अनिवार्य है।
लॉजिस्टिक लागत को कम करने के लिए राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। साथ ही, औद्योगिक विकेंद्रीकरण की दृष्टि से यह आवश्यक है कि मुंगेर और बेगूसराय के इस भारी औद्योगिक मॉडल को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रखा जाए। राज्य के समग्र आर्थिक उत्थान के लिए इन औद्योगिक क्लस्टर्स को निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला और एक्सप्रेसवे के माध्यम से पटना और सभी बिहार के जिलों के साथ एक समेकित औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridor) के रूप में एकीकृत किया जाना चाहिए।
बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति (BIPPS) के तहत इन क्षेत्रों में कृषि-प्रसंस्करण, पेट्रोकेमिकल्स और पैकेजिंग के क्षेत्र में नए निजी निवेश को आकर्षित कर रोजगार सृजन को बढ़ाया जा सकता है, जो 'आत्मनिर्भर बिहार' के लक्ष्य को प्राप्त करने में निर्णायक सिद्ध होगा।