'धर्म के बिना विज्ञान लंगड़ा है, और विज्ञान के बिना धर्म अंधा है।' (दार्शनिक विषय)

 Q. 'धर्म के बिना विज्ञान लंगड़ा है, और विज्ञान के बिना धर्म अंधा है।' (दार्शनिक विषय)

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'धर्म के बिना विज्ञान लंगड़ा है, और विज्ञान के बिना धर्म अंधा है': एक दार्शनिक और व्यावहारिक विश्लेषण

भूमिका

महान भौतिक विज्ञानी अल्बर्ट आइंस्टीन का यह प्रसिद्ध कथन मानव सभ्यता के विकास में विज्ञान और धर्म (नीतिशास्त्र एवं आध्यात्मिक मूल्यों) की पूरक प्रकृति को रेखांकित करता है। व्यापक अर्थों में, 'विज्ञान' प्रकृति के रहस्यों को उद्घाटित करने और भौतिक प्रगति का साधन है, जबकि भारतीय दर्शन में 'धर्म' (धार्यते इति धर्मः) का तात्पर्य केवल कर्मकांडों से नहीं, बल्कि कर्तव्य, नैतिकता और शाश्वत मूल्यों से है। इन दोनों का समन्वय ही एक सुरक्षित, प्रगतिशील और मानवीय समाज की आधारशिला है।

'विज्ञान के बिना धर्म अंधा है' का निहितार्थ

जब धर्म और आध्यात्मिकता से वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) को अलग कर दिया जाता है, तो समाज अंधविश्वास और रूढ़िवादिता का शिकार हो जाता है।

  • अंधविश्वास और तार्किकता का अभाव: विज्ञान धर्म को तार्किकता की कसौटी पर कसता है। इसके अभाव में धर्म कुरीतियों (जैसे- सती प्रथा, छुआछूत, बलि प्रथा) का रूप ले लेता है।

  • संवैधानिक दायित्व: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51A(h) प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह 'वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे।' बिना विज्ञान के, धर्म इस मानववाद से भटक जाता है।

  • ऐतिहासिक प्रमाण: स्वामी विवेकानंद और राजा राममोहन राय जैसे समाज सुधारकों ने धर्म को वैज्ञानिक तार्किकता से जोड़कर ही भारतीय समाज का पुनर्जागरण किया था।

'धर्म (नैतिकता) के बिना विज्ञान लंगड़ा है' का निहितार्थ

विज्ञान मनुष्य को असीम शक्ति प्रदान करता है, परंतु उस शक्ति के उचित और रचनात्मक उपयोग की दिशा धर्म और नैतिकता ही तय करते हैं।

  • विनाशकारी प्रौद्योगिकियों का उदय: बिना नैतिक मार्गदर्शन के विज्ञान ने परमाणु हथियारों, जैविक अस्त्रों (Bioweapons) और अनियंत्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी विनाशकारी शक्तियों को जन्म दिया है।

  • पर्यावरणीय संकट: भौतिक विकास की अंधी दौड़ (विज्ञान का अनियंत्रित उपयोग) ने जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी वैश्विक चुनौतियाँ खड़ी की हैं। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वैश्विक जोखिम रिपोर्ट लगातार तकनीकी और पर्यावरणीय खतरों के प्रति आगाह करती है।

  • दिशाहीन विकास: विज्ञान हमें क्लोनिंग या जीन एडिटिंग की तकनीक दे सकता है, लेकिन यह तकनीक समाज के लिए उचित है या नहीं, इसका निर्णय नीतिशास्त्र (Bio-ethics) और मानवीय धर्म ही करता है।

बिहार के संदर्भ में विज्ञान और धर्म का ऐतिहासिक व आधुनिक समन्वय

बिहार की ऐतिहासिक और भौगोलिक पृष्ठभूमि इस समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है, जो आज भी प्रशासनिक नीतियों के लिए प्रासंगिक है:

  • ज्ञान की प्राचीन भूमि: प्राचीन काल में पटना (पाटलिपुत्र) और इसके आसपास के क्षेत्रों में स्थित नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय केवल धर्म और दर्शन के केंद्र नहीं थे, बल्कि वहाँ खगोल विज्ञान, गणित और चिकित्सा विज्ञान का भी उच्च स्तरीय अध्ययन होता था।

  • आर्यभट्ट का योगदान: कुसुम्पुर (पटना) में रहकर कार्य करने वाले आर्यभट्ट ने खगोल विज्ञान को धार्मिक मिथकों से बाहर निकालकर उसे तार्किक और गणितीय आधार प्रदान किया, जो विज्ञान और धर्म (सत्य की खोज) के संतुलन का प्रतीक है।

  • आधुनिक प्रशासनिक चुनौतियाँ: वर्तमान में, बिहार के सभी ज़िलों में बाढ़ और सूखे जैसी आपदाओं के प्रबंधन के लिए नवीनतम सैटेलाइट और राडार तकनीक (विज्ञान) का उपयोग किया जा रहा है। परंतु, इन तकनीकों का लाभ पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की प्रेरणा 'लोक कल्याण' (प्रशासनिक धर्म) से ही आती है। राज्य सरकार की 'जल-जीवन-हरियाली' योजना विज्ञान (पारिस्थितिक संरक्षण) और धर्म (प्रकृति के प्रति कर्तव्य) का एक सफल प्रशासनिक समन्वय है, जिसे पूरे राज्य में लागू किया जा रहा है।

आगे की राह एवं समग्र मूल्यांकन

विज्ञान हमें 'गति' (Speed) प्रदान करता है, जबकि धर्म हमें 'दिशा' (Direction) प्रदान करता है। बिना दिशा के गति विनाशकारी है और बिना गति के दिशा अर्थहीन है।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने स्पष्ट किया था कि "विज्ञान और आध्यात्मिकता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जो मानव कल्याण के लिए अनिवार्य हैं।" आधुनिक प्रशासन, नीति-निर्माण और शिक्षा प्रणाली (राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप) में इन दोनों का समन्वय आवश्यक है। एक सशक्त, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज के निर्माण के लिए यह अपरिहार्य है कि वैज्ञानिक नवाचारों की बागडोर मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों (धर्म) के हाथों में सुरक्षित रहे।

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