शॉर्ट नोट्सः स्टेम सेल थेरेपी।

 Q. शॉर्ट नोट्सः स्टेम सेल थेरेपी। 

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भूमिका

स्टेम सेल थेरेपी (Stem Cell Therapy) या 'मूल कोशिका चिकित्सा' आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी (Biotechnology) और पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Medicine) के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व वैज्ञानिक उपलब्धि है। स्टेम कोशिकाएँ शरीर की वे अदिभेदित (Undifferentiated) या 'कच्ची' कोशिकाएँ होती हैं, जिनमें स्वयं को विभाजित करने और शरीर के किसी भी विशिष्ट अंग या ऊतक (Tissue) की कोशिकाओं (जैसे- हृदय, मस्तिष्क, यकृत या रक्त कोशिकाएं) में परिवर्तित होने की अद्वितीय क्षमता (Pluripotency) होती है।

हाल ही में, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा जारी 'राष्ट्रीय स्टेम सेल अनुसंधान दिशा-निर्देशों' ने इस उन्नत चिकित्सा पद्धति को विनियमित करने और असाध्य रोगों के उपचार में इसके सुरक्षित उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया है।

स्टेम सेल थेरेपी: कार्यप्रणाली और बहुआयामी अनुप्रयोग

इस चिकित्सा पद्धति में क्षतिग्रस्त या मृत कोशिकाओं को स्वस्थ स्टेम कोशिकाओं से प्रतिस्थापित किया जाता है। इसके विविध नैदानिक (Clinical) उपयोग निम्नलिखित हैं:

1. आनुवंशिक और रक्त विकारों का उपचार

  • अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण (Bone Marrow Transplant): ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर), लिंफोमा और मल्टीपल मायलोमा जैसी घातक बीमारियों के उपचार में हेमेटोपोएटिक (रक्त बनाने वाली) स्टेम कोशिकाओं का सफल उपयोग दशकों से किया जा रहा है।

  • थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया: दोषपूर्ण लाल रक्त कोशिकाओं को स्वस्थ कोशिकाओं से बदलकर इन जन्मजात विकारों का स्थायी समाधान प्रस्तुत किया जाता है।

2. स्नायविक और अपक्षयी रोग (Neurological Disorders)

  • अल्जाइमर (Alzheimer's), पार्किंसंस (Parkinson's), और स्पाइनल कॉर्ड इंजरी (Spinal Cord Injury) जैसे रोगों में, जहाँ तंत्रिका कोशिकाएँ (Neurons) स्वतः पुनर्जीवित नहीं हो सकतीं, स्टेम सेल थेरेपी नई तंत्रिका कोशिकाओं का निर्माण कर तंत्रिका तंत्र की कार्यक्षमता को बहाल करने में सक्षम है।

3. अंग निर्माण और ऊतक पुनर्जनन (Tissue Regeneration)

  • ऑर्गन-ऑन-ए-चिप (Organ-on-a-chip) और 3D बायो-प्रिंटिंग: स्टेम कोशिकाओं के उपयोग से प्रयोगशाला में कृत्रिम अंगों का विकास किया जा रहा है, जो भविष्य में अंग दाताओं (Organ donors) की कमी की समस्या को समाप्त कर देगा।

4. बिहार के संदर्भ में प्रशासनिक उपयोगिता और स्वास्थ्य दृष्टिकोण

  • आनुवंशिक रोगों का प्रबंधन: बिहार में थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया का प्रसार एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती है। स्टेम सेल आधारित 'बोन मैरो ट्रांसप्लांट' इन रोगों का एकमात्र स्थायी उपचार है।

  • विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य अवसंरचना: वर्तमान में यह अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा राज्य के कुछ चुनिंदा बड़े अस्पतालों (जैसे- PMCH, IGIMS) तक ही सीमित है। जन कल्याण और संविधान के अनुच्छेद 21 (स्वास्थ्य का अधिकार) को सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि स्वास्थ्य सेवा ग्रिड का विस्तार किया जाए। सरकार को पटना और सभी बिहार के जिलों में जिला स्तरीय सदर अस्पतालों को 'टेली-मेडिसिन' और उन्नत डायग्नोस्टिक केंद्रों के माध्यम से 'हब एंड स्पोक' (Hub and Spoke) मॉडल पर जोड़ना चाहिए, ताकि इस महंगी और जीवन रक्षक चिकित्सा का लाभ दूरस्थ ग्रामीण आबादी तक भी पहुँच सके।

स्टेम सेल थेरेपी के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ

  • नैतिक और विधिक चिंताएँ (Ethical Concerns): भ्रूणीय स्टेम कोशिकाओं (Embryonic Stem Cells) को प्राप्त करने की प्रक्रिया में मानव भ्रूण का नष्ट होना एक गंभीर नैतिक प्रश्न खड़ा करता है, जिसका विश्व स्तर पर धार्मिक और मानवाधिकार समूहों द्वारा विरोध किया जाता है।

  • प्रतिरक्षा अस्वीकृति (Immune Rejection): यदि डोनर और मरीज के ऊतकों का सटीक मिलान (HLA Matching) नहीं होता है, तो मरीज का प्रतिरक्षा तंत्र ट्रांसप्लांट की गई कोशिकाओं पर हमला कर सकता है।

  • अवैज्ञानिक क्लिनिक और भ्रामक विज्ञापन: कड़े विनियामक ढांचे के अभाव में, कई अपंजीकृत क्लिनिक अप्रमाणित 'स्टेम सेल उपचार' (Quackery) का दावा कर मरीजों का आर्थिक और शारीरिक शोषण कर रहे हैं।

  • अत्यधिक लागत: यह तकनीक अत्यंत खर्चीली है, जो भारत की बहुसंख्यक निम्न-मध्यम आय वाली आबादी की पहुँच से बाहर है।

आगे की राह (Way Forward)

  • iPSCs (प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल) को बढ़ावा: वयस्क कोशिकाओं को आनुवंशिक रूप से रीप्रोग्राम करके iPSCs का निर्माण किया जाना चाहिए (जिसके लिए 2012 में नोबेल पुरस्कार दिया गया था)। इससे भ्रूण को नष्ट करने की नैतिक समस्या का समाधान हो जाता है।

  • राष्ट्रीय स्टेम सेल रजिस्ट्री का विस्तार: दाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए 'स्टेम सेल डोनर रजिस्ट्री' का व्यापक विस्तार किया जाना चाहिए और युवाओं को रक्तदान की भांति स्टेम सेल दान करने हेतु जागरूक किया जाना चाहिए।

  • वित्तीय समावेशन: 'आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' (PM-JAY) के तहत चिन्हित स्टेम सेल उपचारों (विशेषकर रक्त कैंसर और थैलेसीमिया) को शामिल कर इसे आम नागरिकों के लिए वहनीय (Affordable) बनाया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

स्टेम सेल थेरेपी आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की चौथी औद्योगिक क्रांति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो पारंपरिक 'रोग प्रबंधन' (Disease Management) से आगे बढ़कर 'रोग निर्मूलन' (Cure) की दिशा में कार्य करती है। यदि कड़े विनियामक ढांचे (ICMR-DBT गाइडलाइंस) के माध्यम से नैतिक चिंताओं और अवैज्ञानिक प्रयोगों पर अंकुश लगा लिया जाए, तो यह तकनीक संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG-3: उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली) को प्राप्त करने तथा भारत को एक उन्नत चिकित्सा पर्यटन केंद्र (Medical Tourism Hub) के रूप में स्थापित करने में एक युगान्तकारी कदम सिद्ध होगी।

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