शॉर्ट नोट्सः वित्तीय समावेशन और जन धन योजना।
Q. शॉर्ट नोट्सः वित्तीय समावेशन और जन धन योजना।
Ans -
वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) से तात्पर्य समाज के वंचित और हाशिए पर स्थित वर्गों को वहनीय लागत (Affordable Cost) पर बैंकिंग, ऋण, बीमा और पेंशन जैसी औपचारिक वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराना है। संविधान के अनुच्छेद 39(c) (धन के संकेंद्रण पर रोक) और समावेशी विकास के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने के लिए, भारत सरकार द्वारा 28 अगस्त 2014 को 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' (PMJDY) की शुरुआत की गई, जो विश्व का सबसे बड़ा वित्तीय समावेशन कार्यक्रम है।
जन धन योजना (PMJDY) के प्रमुख स्तंभ और प्रावधान
'सबका साथ, सबका विकास' के दर्शन पर आधारित यह योजना निम्नलिखित छह स्तंभों पर टिकी है:
सार्वभौमिक बैंकिंग पहुंच: प्रत्येक असंबद्ध (Unbanked) परिवार के लिए कम से कम एक 'शून्य शेष' (Zero Balance) बुनियादी बचत बैंक खाता खोलना।
वित्तीय सुरक्षा का जाल: खाताधारकों को स्वदेशी 'रुपे' (RuPay) डेबिट कार्ड के साथ ₹2 लाख का मुफ्त दुर्घटना बीमा और ₹30,000 का जीवन बीमा (शुरुआती खातों के लिए) प्रदान करना।
सूक्ष्म-ऋण सुविधा (Micro-credit): आपातकालीन जरूरतों को पूरा करने के लिए 6 महीने के संतोषजनक संचालन के बाद ₹10,000 की ओवरड्राफ्ट (Overdraft) सुविधा प्रदान करना, ताकि साहूकारों पर निर्भरता कम हो सके।
योजना का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव (Impact)
JAM ट्रिनिटी और प्रत्यक्ष नकद अंतरण (DBT): जन धन, आधार और मोबाइल (JAM) की त्रिमूर्ति ने कल्याणकारी योजनाओं (जैसे- मनरेगा मजदूरी, पीएम किसान) के लाभ हस्तांतरण में होने वाले भ्रष्टाचार और 'लीकेज' (Leakages) को समाप्त कर दिया है।
महिला सशक्तिकरण: आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, कुल खोले गए 50 करोड़ से अधिक खातों में 55% से अधिक खाते महिलाओं के हैं। यह पितृसत्तात्मक ढांचे में उन्हें वित्तीय स्वायत्तता (Financial Autonomy) और निर्णय क्षमता प्रदान कर रहा है।
पूंजी निर्माण (Capital Formation): ग्रामीण और गरीब आबादी की छोटी बचतों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में लाकर अर्थव्यवस्था में एक 'गुणक प्रभाव' (Multiplier Effect) उत्पन्न किया गया है।
बिहार के परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिकता और चुनौतियाँ
बिहार जैसे राज्य में, जहाँ एक बड़ी आबादी ऐतिहासिक रूप से संस्थागत ऋण (Institutional Credit) से वंचित रही है, जन धन योजना ने एक ढांचागत क्रांति का कार्य किया है। कोविड-19 महामारी के दौरान, राज्य के लाखों प्रवासी श्रमिकों और महिलाओं को जन धन खातों के माध्यम से ही त्वरित वित्तीय राहत प्राप्त हुई थी।
तथापि, राज्य के समक्ष कुछ स्पष्ट चुनौतियाँ विद्यमान हैं। वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) के अभाव में बड़ी संख्या में खाते निष्क्रिय (Dormant) पड़े हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य का साख-जमा अनुपात (Credit-Deposit Ratio) अभी भी राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है।
इस योजना के वास्तविक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए यह नितांत आवश्यक है कि बैंकिंग अवसंरचना, 'बैंक मित्र' (Business Correspondents) और डिजिटल साक्षरता नेटवर्क का सुदृढ़ विस्तार पटना और सभी बिहार के जिलों में समान एवं विकेंद्रीकृत रूप से किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित किए बिना निर्बाध वित्तीय समावेशन संभव नहीं है।
आगे की राह
प्रधानमंत्री जन धन योजना ने भारत में 'वित्तीय छुआछूत' (Financial Untouchability) को समाप्त कर बैंकिंग प्रणाली का लोकतंत्रीकरण किया है। अब समय आ गया है कि नीति-निर्माता केवल 'खाते खोलने' (Financial Access) से आगे बढ़कर 'वित्तीय एकीकरण' (Financial Integration) की ओर बढ़ें।
जन धन खातों को 'प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना' (PMJJBY) और 'अटल पेंशन योजना' (APY) के साथ गहराई से एकीकृत किया जाना चाहिए। साथ ही, वित्तीय संस्थानों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित क्रेडिट स्कोरिंग का उपयोग कर छोटे किसानों और सूक्ष्म उद्यमियों को संपार्श्विक-मुक्त (Collateral-free) ऋण प्रदान करना चाहिए। इससे भारत और बिहार में सतत विकास लक्ष्यों (SDG-1: गरीबी समाप्ति और SDG-10: असमानता में कमी) को धरातल पर साकार किया जा सकेगा।