ई-गवर्नेस (e-Governance) में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की भूमिका और बिहार के संदर्भ में इसकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें।
Q. ई-गवर्नेस (e-Governance) में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की भूमिका और बिहार के संदर्भ में इसकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन करें।
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भूमिका
सुशासन (Good Governance) के लक्ष्यों—पारदर्शिता, जवाबदेही, और त्वरित सेवा वितरण—को प्राप्त करने के लिए ई-गवर्नेस (e-Governance) एक अनिवार्य उपकरण बन चुका है। विश्व बैंक के अनुसार, ई-गवर्नेस का तात्पर्य सरकारी संस्थाओं द्वारा सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के उपयोग से है, जो नागरिकों, व्यवसायों और सरकार के अन्य अंगों के साथ संपर्क और सेवाओं को रूपांतरित करने की क्षमता रखता है। भारत में 'डिजिटल इंडिया' मिशन ने ई-गवर्नेस को एक नई दिशा दी है, जिसका मूल उद्देश्य 'SMART' (सरल, नैतिक, जवाबदेह, उत्तरदायी और पारदर्शी) शासन की स्थापना करना है। इस परिवर्तनकारी प्रक्रिया में ICT एक रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करता है, जो सरकारी नीतियों और आम जनमानस के बीच की दूरी को पाटने का सबसे सशक्त माध्यम है।
ई-गवर्नेस में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की भूमिका
शासन व्यवस्था में ICT का एकीकरण केवल सेवाओं के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण प्रशासनिक प्रतिमान (Paradigm) का बदलाव है। इसकी बहुआयामी भूमिका को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
1. सेवा वितरण में दक्षता और सुगमता (Service Delivery)
G2C (सरकार से नागरिक): ICT के माध्यम से जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, और राशन कार्ड जैसी आवश्यक सेवाएं घर बैठे प्राप्त की जा सकती हैं। उमंग (UMANG) ऐप और ई-प्रमाण जैसी पहलों ने कतारों को खत्म कर दिया है।
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT): JAM (जन-धन, आधार, मोबाइल) ट्रिनिटी के उपयोग ने बिचौलियों को समाप्त कर दिया है, जिससे कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रहा है।
2. पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर अंकुश
ICT आधारित प्रक्रियाएं मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम करती हैं। निविदाओं के लिए ई-प्रोक्योरमेंट (e-Procurement) और सरकारी खरीद के लिए GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल ने भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया है।
3. नीति निर्माण में डेटा-संचालित दृष्टिकोण (Data-Driven Decision Making)
बिग डेटा एनालिटिक्स (Big Data Analytics) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग कर सरकारें जनसांख्यिकीय डेटा का विश्लेषण करती हैं, जिससे लक्षित और साक्ष्य-आधारित नीतियां (Evidence-based policies) बनाने में मदद मिलती है।
4. प्रशासनिक समन्वय (G2G और G2E)
विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच रियल-टाइम डेटा साझाकरण (ई-ऑफिस, प्रगति पोर्टल) ने 'रेड टेपिज्म' (लालफीताशाही) को कम किया है और अंतर-विभागीय समन्वय को सुदृढ़ किया है।
बिहार के संदर्भ में ICT और ई-गवर्नेस की प्रभावशीलता का मूल्यांकन
बिहार जैसे भौगोलिक और जनसांख्यिकीय रूप से जटिल राज्य में, जहां ग्रामीण आबादी का अनुपात अत्यधिक है, ई-गवर्नेस ने समावेशी विकास और अनुच्छेद 38 (लोक कल्याणकारी राज्य) के आदर्शों को धरातल पर उतारने में एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है।
बिहार में ई-गवर्नेस की प्रमुख उपलब्धियां
लोक सेवाओं का अधिकार (RTPS) और ServicePlus: बिहार सरकार का 'लोक सेवा अधिकार अधिनियम, 2011' ICT के सहयोग से अत्यधिक सफल रहा है। वर्तमान में आय, जाति, और निवास प्रमाण पत्र जैसी दर्जनों सेवाएं ऑनलाइन ServicePlus पोर्टल के माध्यम से तय समय-सीमा के भीतर प्रदान की जा रही हैं।
भूमि रिकॉर्ड का आधुनिकीकरण (DILRMP): 'भूमि जानकारी' पोर्टल और 'ई-म्यूटेशन' (e-Mutation) के लागू होने से भूमि विवादों में कमी आई है। ऑनलाइन लगान भुगतान और पार्सल मैप्स के डिजिटलीकरण ने राजस्व प्रशासन में क्रांति ला दी है।
DBT और शिक्षा/स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति: 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना', साइकिल/पोशाक योजना, और छात्रवृत्ति का वितरण मेधासॉफ्ट (Medhasoft) पोर्टल के माध्यम से सीधे किया जा रहा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में संजीवनी (e-Sanjeevani) टेलीमेडिसिन और अश्विन (ASHA) पोर्टल ने ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत किया है।
BSWAN और ई-ऑफिस: बिहार स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (BSWAN) ने राज्य मुख्यालय को ब्लॉक स्तर तक निर्बाध कनेक्टिविटी से जोड़ दिया है। सचिवालय में ई-ऑफिस (e-Office) प्रणाली ने फाइलों की ट्रैकिंग को पारदर्शी बनाया है।
प्रभावशीलता के समक्ष विद्यमान चुनौतियां
बिहार में ई-गवर्नेस के उत्कृष्ट प्रयासों के बावजूद, इसकी पूर्ण प्रभावशीलता में कई संरचनात्मक और तकनीकी बाधाएं हैं:
विस्तृत डिजिटल अंतराल (Digital Divide): ट्राई (TRAI) की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, बिहार की टेली-डेंसिटी (Tele-density) और इंटरनेट पहुंच राष्ट्रीय औसत (लगभग 85%) की तुलना में काफी कम (लगभग 55-60%) है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच भारी असमानता है।
डिजिटल साक्षरता का अभाव: विशेषकर ग्रामीण महिलाओं और वृद्धजनों में स्मार्टफोन और इंटरनेट के उपयोग की समझ सीमित है, जिससे वे जन-सुविधा केंद्रों (CSCs) या बिचौलियों पर निर्भर हो जाते हैं।
बुनियादी ढांचे की सीमाएं: निर्बाध बिजली आपूर्ति में सुधार के बावजूद, भारतनेट (BharatNet) परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की गति और रखरखाव अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
साइबर सुरक्षा चिंताएं: वित्तीय धोखाधड़ी (जैसे जामताड़ा/नवादा मॉड्यूल) और डेटा गोपनीयता के प्रति जागरूकता की कमी ई-गवर्नेस में लोगों के विश्वास को कमजोर करती है।
आगे की राह
बिहार में ई-गवर्नेस को अधिक जन-केंद्रित और प्रभावी बनाने के लिए कुछ सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए:
स्थानीय भाषाओं में इंटरफेस: सरकारी ऐप्स और पोर्टल्स को केवल हिंदी/अंग्रेजी तक सीमित न रखकर मैथिली, भोजपुरी, मगही, और अंगिका में वॉइस-कमांड (Voice-command) आधारित AI बॉट्स के साथ विकसित किया जाना चाहिए।
डिजिटल अवसंरचना और साक्षरता: PM-DISHA (प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान) का विस्तार करते हुए प्रत्येक पंचायत में 'डिजिटल साक्षरता मित्र' की नियुक्ति की जानी चाहिए और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (NOFN) के अंतिम छोर तक विस्तार (Last-mile connectivity) को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मोबाइल गवर्नेस (m-Governance): चूंकि बिहार में कंप्यूटर की तुलना में मोबाइल की पहुंच अधिक है, अतः सभी ई-गवर्नेस सेवाओं को मोबाइल-प्रथम (Mobile-first) दृष्टिकोण से डिज़ाइन किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) ने ई-गवर्नेस को मात्र एक तकनीकी व्यवस्था से आगे बढ़ाकर सशक्तिकरण के एक सामाजिक-आर्थिक अस्त्र में परिवर्तित कर दिया है। बिहार ने RTPS, DBT और ई-राजस्व जैसे नवाचारों के माध्यम से सुशासन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। यदि राज्य डिजिटल अवसंरचना के विस्तार, साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने और भाषाई अवरोधों को समाप्त करने पर केंद्रित नीतियां अपनाता है, तो ई-गवर्नेस बिहार की समावेशी विकास यात्रा में सबसे सशक्त इंजन साबित होगा, जो अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति (अंत्योदय) तक शासन की पहुँच सुनिश्चित करेगा।