शॉर्ट नोट्सः इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)।
Q. शॉर्ट नोट्सः इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)।
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भूमिका: इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और डिजिटल परिवर्तन
इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) एक ऐसी तकनीकी अवधारणा है, जिसमें भौतिक उपकरणों (Physical Devices) को सेंसर, सॉफ्टवेयर और नेटवर्क कनेक्टिविटी के माध्यम से इंटरनेट से जोड़ा जाता है, ताकि वे बिना मानवीय हस्तक्षेप के डेटा का आदान-प्रदान और विश्लेषण कर सकें। वर्ष 1999 में केविन एश्टन (Kevin Ashton) द्वारा गढ़ा गया यह शब्द वर्तमान में चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) का मुख्य आधार है, जो डिजिटल और भौतिक दुनिया के बीच की सीमा को समाप्त कर रहा है।
IoT की कार्यप्रणाली के मुख्य घटक (Components)
IoT प्रणाली मुख्य रूप से चार घटकों के समन्वय पर कार्य करती है:
सेंसर और उपकरण (Sensors/Devices): ये वातावरण से वास्तविक समय का डेटा (जैसे तापमान, गति, हृदय गति) एकत्र करते हैं।
कनेक्टिविटी (Connectivity): वाई-फाई, ब्लूटूथ, या 5G नेटवर्क के माध्यम से एकत्र किए गए डेटा को क्लाउड पर भेजा जाता है।
डेटा प्रोसेसिंग (Data Processing): क्लाउड सर्वर या एज कंप्यूटिंग (Edge Computing) के माध्यम से मशीन लर्निंग (ML) एल्गोरिदम का उपयोग कर डेटा का विश्लेषण किया जाता है।
यूजर इंटरफेस (User Interface): अंतिम परिणाम को मोबाइल ऐप, स्मार्टवॉच या वेब पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाता है, जिससे उपयोगकर्ता निर्णय ले सकें।
प्रमुख अनुप्रयोग और बिहार के संदर्भ में प्रासंगिकता (Applications)
सार्वजनिक सेवा वितरण और बुनियादी ढांचे के विकास में IoT के अनुप्रयोग अत्यंत व्यापक हैं:
ई-गवर्नेंस और प्रशासनिक दक्षता: IoT के उपयोग से सेवाओं की डिलीवरी को पारदर्शी और त्वरित बनाया जा सकता है। पटना और बिहार के सभी जिलों में स्मार्ट मीटरिंग (Smart Prepaid Meters), डिजिटल गवर्नेंस पोर्टल (जैसे RTPS सेवाओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग) और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन प्रणालियों को लागू करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
कृषि और आपदा प्रबंधन (Smart Agriculture): स्मार्ट सेंसर आधारित कृषि से मृदा की नमी, पोषक तत्वों और मौसम की सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, उत्तरी बिहार की प्रमुख नदियों (कोसी, गंडक) में बाढ़ पूर्वानुमान (Flood Forecasting) के लिए जलस्तर की रियल-टाइम निगरानी हेतु IoT आधारित सेंसर नेटवर्क अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं।
स्मार्ट सिटी मिशन (Smart City Mission): बिहार के चयनित स्मार्ट शहरों (पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बिहारशरीफ) में स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट, स्मार्ट लाइटिंग, और कुशल ऊर्जा वितरण के लिए IoT उपकरणों की तैनाती की जा रही है।
स्वास्थ्य देखभाल (Healthcare): दूरदराज के क्षेत्रों में मरीजों की 'रिमोट हेल्थ मॉनिटरिंग' (Remote Health Monitoring) और टेलीमेडिसिन के सुदृढ़ीकरण में यह तकनीक क्रांतिकारी है।
संबंधित चुनौतियाँ (Associated Challenges)
यद्यपि IoT के लाभ बहुआयामी हैं, फिर भी इसके मार्ग में कई रणनीतिक बाधाएँ विद्यमान हैं:
साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता: उपकरणों की बढ़ती संख्या से हैकिंग, रैनसमवेयर और डेटा चोरी का खतरा बढ़ गया है। हाल ही में पारित डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के आलोक में यह एक संवेदनशील मुद्दा है।
डिजिटल डिवाइड (Digital Divide): ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच इंटरनेट कनेक्टिविटी और ब्रॉडबैंड बैंडविड्थ में भारी असमानता (विशेषकर भारत नेट परियोजना की धीमी गति)।
नियामक और ढांचागत अभाव: IoT उपकरणों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकरण (Standardization) और इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) की कमी है।
उच्च लागत: बुनियादी ढाँचे की स्थापना, सेंसर उपकरणों और क्लाउड स्टोरेज की प्रारंभिक लागत काफी अधिक है।
आगे की राह (Way Forward)
भारत सरकार की राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति 2018 (NDCP) और देश में 5G तकनीक का तीव्र विस्तार IoT के लिए एक मजबूत और सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि सुशासन, आर्थिक विकास और समावेशी नीति-निर्माण का एक सशक्त माध्यम है।
यदि साइबर सुरक्षा अवसंरचना और ग्रामीण डिजिटल साक्षरता की चुनौतियों का रणनीतिक रूप से समाधान किया जाए, तो IoT भारत को एक ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने तथा बिहार जैसे विकासशील राज्यों को तकनीकी मुख्यधारा में तेजी से एकीकृत करने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा।
