शॉर्ट नोट्सः वीवीपैट (VVPAT) मशीन।

 Q. शॉर्ट नोट्सः वीवीपैट (VVPAT) मशीन।

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भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता और 'स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव' (Free and Fair Elections) के अनुच्छेद 324 में निहित संवैधानिक जनादेश को सुनिश्चित करने में वीवीपैट (Voter Verifiable Paper Audit Trail - VVPAT) एक युगांतकारी तकनीकी नवाचार है। सर्वोच्च न्यायालय ने सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत निर्वाचन आयोग (2013) के ऐतिहासिक निर्णय में वीवीपैट को पारदर्शी मतदान प्रक्रिया के लिए "अपरिहार्य" (Indispensable) घोषित किया था। भारत में इसका प्रथम प्रयोग वर्ष 2013 में नागालैंड के नोकसेन विधानसभा क्षेत्र में किया गया था।

वीवीपैट: कार्यप्रणाली और प्रभावशीलता

तकनीकी संरचना एवं कार्यप्रणाली

  • एकीकृत प्रणाली: वीवीपैट मशीन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की बैलेट यूनिट (BU) और कंट्रोल यूनिट (CU) के साथ जुड़ी एक स्वतंत्र प्रिंटर प्रणाली है।

  • दृश्यता (Visibility): जब कोई मतदाता वोट डालता है, तो वीवीपैट एक कागज की पर्ची छापता है, जिसमें उम्मीदवार का क्रमांक, नाम और चुनाव चिह्न अंकित होता है। यह पर्ची पारदर्शी स्क्रीन के पीछे 7 सेकंड तक दिखाई देती है, जिससे मतदाता अपने मत की दृष्टिगत पुष्टि कर सकता है।

  • ऑडिट ट्रेल (Audit Trail): 7 सेकंड पश्चात पर्ची स्वतः कटकर एक सीलबंद ड्रॉप बॉक्स (Sealed Drop Box) में गिर जाती है। किसी विवाद की स्थिति में, यह पर्ची भौतिक साक्ष्य (Physical Evidence) के रूप में कार्य करती है और मतों के पुनर्मूल्यांकन का आधार बनती है।

लोकतांत्रिक महत्व

  • पारदर्शिता और विश्वास बहाली: यह मशीन EVM की कार्यप्रणाली पर उठने वाले तकनीकी संदेहों (EVM Tampering Allegations) को निर्मूल साबित कर मतदाताओं के मन में चुनावी प्रक्रिया के प्रति अटूट विश्वास स्थापित करती है।

  • सटीक विवाद समाधान: चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 56D के तहत, यदि किसी प्रत्याशी को मतगणना में विसंगति का संदेह होता है, तो वह रिटर्निंग ऑफिसर (RO) से वीवीपैट पर्चियों की गिनती की मांग कर सकता है। EVM और वीवीपैट के आंकड़ों में भिन्नता होने पर वीवीपैट पर्चियों की गिनती को ही अंतिम माना जाता है।

बिहार के विशेष संदर्भ में प्रासंगिकता

बिहार जैसे उच्च राजनीतिक चेतना और सघन जनसांख्यिकी वाले राज्य में चुनावी सत्यनिष्ठा (Electoral Integrity) बनाए रखने में वीवीपैट ने एक निवारक (Deterrent) की भूमिका निभाई है।

  • मतदाता सशक्तिकरण: राज्य के सुदूर अंचलों, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और हाशियाकृत वर्गों (Marginalized Sections) के मतदाताओं में यह उपकरण एक भौतिक आश्वस्ति (Physical Assurance) उत्पन्न करता है कि उनके द्वारा दिया गया मत सटीक रूप से दर्ज हुआ है।

  • चुनावी विसंगतियों पर रोक: 2015 के बिहार विधानसभा चुनावों से लेकर हालिया लोक सभा चुनावों तक, राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर इसके शत-प्रतिशत उपयोग ने पूर्व के 'फर्जी मतदान' और तकनीकी हेराफेरी के आरोपों को समाप्त कर एक पारदर्शी चुनावी संस्कृति की स्थापना की है।

वर्तमान चुनौतियाँ

  • तकनीकी और लॉजिस्टिक बाधाएं: अत्यधिक गर्मी, आर्द्रता या प्रकाश के कारण वीवीपैट मशीनों के सेंसर में खराबी (Malfunctioning) और थर्मल पेपर की छपाई का फीका पड़ जाना एक आम परिचालन समस्या रही है।

  • मतगणना में विलंब: वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार प्रति विधानसभा क्षेत्र के 5 मतदान केंद्रों (Polling Stations) की वीवीपैट पर्चियों का अनिवार्य मिलान किया जाता है। राजनीतिक दलों द्वारा '100% वीवीपैट पर्चियों के मिलान' की मांग अव्यावहारिक है, क्योंकि इससे चुनाव परिणामों की घोषणा में कई दिनों का विलंब हो सकता है और मानव संसाधन पर भारी दबाव पड़ता है।

आगे की राह (Way Forward)

वीवीपैट केवल एक मशीन नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र के 'सुशासन' (Good Governance) का एक तकनीकी प्रहरी है। भविष्य के चुनावों को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को मौसम-प्रतिरोधी मशीनों (Weather-resistant mechanisms) के निर्माण हेतु शोध एवं विकास (R&D) में निवेश करना चाहिए। इसके साथ ही, भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) द्वारा सुझाए गए सांख्यिकीय मॉडल का उपयोग कर वीवीपैट पर्चियों के मिलान के अनुपात को वैज्ञानिक रूप से अनुकूलित किया जाना चाहिए, ताकि चुनावी सटीकता (Accuracy) और परिणाम घोषित करने की गति (Speed) के बीच एक आदर्श संतुलन स्थापित किया जा सके।

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