एटीट्यूड (Attitude) और एप्टीट्यूड (Aptitude) में क्या अंतर है? एक सफल लोक सेवक के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है?

 Q. एटीट्यूड (Attitude) और एप्टीट्यूड (Aptitude) में क्या अंतर है? एक सफल लोक सेवक के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है?

Ans - 

लोक प्रशासन की जटिलताओं और एक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की बढ़ती अपेक्षाओं के परिप्रेक्ष्य में, एक लोक सेवक के व्यक्तित्व में अभिवृत्ति (Attitude) और अभिक्षमता (Aptitude) दोनों का होना अपरिहार्य है।

द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) ने अपनी 'शासन में नैतिकता' रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सुशासन के लिए केवल तकनीकी या बौद्धिक दक्षता पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनसेवा के प्रति एक सकारात्मक और संवेदशनशील दृष्टिकोण भी अनिवार्य है। अभिवृत्ति यह निर्धारित करती है कि एक अधिकारी परिस्थितियों और नागरिकों के प्रति कैसी मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया देता है, जबकि अभिक्षमता उसके बौद्धिक और तकनीकी कौशल को दर्शाती है। नोलन समिति द्वारा अनुशंसित सार्वजनिक जीवन के सिद्धांत भी इन्हीं दोनों आयामों के उत्कृष्ट समन्वय पर बल देते हैं।

एटीट्यूड (Attitude) और एप्टीट्यूड (Aptitude) के मध्य मूलभूत अंतर

इन दोनों अवधारणाओं के मध्य अंतर को निम्नलिखित विश्लेषणात्मक सारणी के माध्यम से समझा जा सकता है:

तुलना का आधारअभिवृत्ति (Attitude)अभिक्षमता (Aptitude)
परिभाषाकिसी व्यक्ति, विचार या परिस्थिति के प्रति सकारात्मक या नकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया।किसी विशेष कौशल, ज्ञान या कार्य को सीखने और निष्पादित करने की अंतर्निहित क्षमता।
प्रकृति (Nature)यह मुख्य रूप से भावनात्मक और मूल्य-आधारित (Value-based) है।यह मुख्य रूप से संज्ञानात्मक और कौशल-आधारित (Skill-based) है।
परिवर्तनशीलतायह अनुभवों, सामाजीकरण और प्रशिक्षण से अपेक्षाकृत आसानी से परिवर्तित की जा सकती है।यह काफी हद तक जन्मजात या स्थायी होती है, हालांकि अभ्यास से इसे निखारा जा सकता है।
दिशा (Focus)यह व्यक्ति के 'चरित्र' और 'दृष्टिकोण' को निर्धारित करती है (Will to do)।यह व्यक्ति की 'दक्षता' और 'संभाव्यता' को निर्धारित करती है (Capability to do)।
प्रशासनिक उदाहरणकमजोर वर्गों के प्रति करुणा, सत्यनिष्ठा, और संवैधानिक नैतिकता के प्रति समर्पण।तार्किक विश्लेषण, ई-गवर्नेंस का तकनीकी ज्ञान, और त्वरित समस्या-समाधान क्षमता।

एक सफल लोक सेवक के लिए कौन अधिक महत्वपूर्ण है?

यद्यपि दोनों का अपना विशिष्ट महत्व है, परंतु प्रशासनिक नीतिशास्त्र और समकालीन शासन व्यवस्था में अभिवृत्ति (Attitude) को अभिक्षमता (Aptitude) की तुलना में अधिक मूलभूत और महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बहुआयामी कारण निम्नलिखित हैं:

1. उच्च अभिक्षमता + नकारात्मक अभिवृत्ति = समाज के लिए खतरा (Administrative/Legal Aspect)

  • यदि एक अधिकारी बौद्धिक रूप से अत्यंत कुशाग्र (High Aptitude) है, परंतु उसकी सत्यनिष्ठा संदिग्ध है (Negative Attitude), तो वह अपने कौशल का उपयोग भ्रष्टाचार, 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) या क्रोनी कैपिटलिज्म (Crony capitalism) के लिए कर सकता है।

  • भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के अनुसार, "बुद्धिमत्ता के बिना सत्यनिष्ठा खतरनाक है, लेकिन सत्यनिष्ठा के बिना बुद्धिमत्ता विनाशकारी है।"

2. सामाजिक न्याय और अंत्योदय की प्राप्ति (Social Aspect)

  • संविधान के अनुच्छेद 38 (सामाजिक-आर्थिक न्याय) और सतत विकास लक्ष्य 10 (SDG 10 - असमानताओं में कमी) को प्राप्त करने के लिए केवल डेटा विश्लेषण पर्याप्त नहीं है।

  • वंचित वर्गों (महिलाओं, वृद्धों, जनजातियों) की पीड़ा को समझने और उनके कल्याण के लिए नीतियां लागू करने हेतु सहानुभूति (Empathy) और करुणा (Compassion) जैसी अभिवृत्ति का होना अनिवार्य है।

3. संकट प्रबंधन में भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Crisis Management)

  • दंगों, प्राकृतिक आपदाओं या महामारी के दौरान 'टेक्स्टबुक ज्ञान' (Aptitude) से अधिक अधिकारी का धैर्य, वस्तुनिष्ठता (Objectivity) और दबाव झेलने की क्षमता (Attitude) कार्य आती है।

क्या अभिक्षमता (Aptitude) अप्रासंगिक है?

कदापि नहीं। आधुनिक युग में केवल 'अच्छे इरादों' (Good Attitude) से प्रशासन नहीं चलाया जा सकता।

  • तकनीकी और आर्थिक आयाम (Technological/Economic): बिग डेटा (Big Data), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और जटिल वित्तीय संरचनाओं के युग में, नीतियों के निर्माण और ई-गवर्नेंस के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उच्च अभिक्षमता अनिवार्य है।

  • यदि 'अभिवृत्ति' वाहन का स्टीयरिंग व्हील (दिशा-निर्देशक) है, तो 'अभिक्षमता' उस वाहन का इंजन (शक्ति) है। बिना इंजन के स्टीयरिंग किसी काम का नहीं।

आगे की राह (Way Forward)

  • मिशन कर्मयोगी (Mission Karmayogi): भारत सरकार की यह पहल इसी वैचारिक संतुलन पर आधारित है, जो 'नियम-आधारित' (Rule-based) व्यवस्था से 'भूमिका-आधारित' (Role-based) व्यवस्था की ओर जाने पर बल देती है। इसमें अधिकारियों की व्यावहारिक (Behavioral) और कार्यात्मक (Functional) दोनों दक्षताओं का विकास किया जा रहा है।

  • प्रशिक्षण में नवाचार: लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में तकनीकी प्रशिक्षण (Aptitude) के साथ-साथ 'विलेज विजिट' और केस-स्टडीज के माध्यम से भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Attitude) को सुदृढ़ किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

एक सफल लोक प्रशासन के लिए अभिक्षमता (मस्तिष्क का कौशल) और अभिवृत्ति (हृदय की पवित्रता) के मध्य एक पूर्ण सामंजस्य आवश्यक है। जब एक लोक सेवक अपनी उत्कृष्ट बौद्धिक क्षमता (Aptitude) का उपयोग संवैधानिक नैतिकता और जन-कल्याण की सकारात्मक अभिवृत्ति (Attitude) के साथ करता है, तभी शासन व्यवस्था पारदर्शी और जवाबदेह बनती है। इन दोनों के समन्वय से ही 'सबका साथ, सबका विकास' का विजन धरातल पर उतर सकता है और 'वसुधैव कुटुंबकम' के आदर्शों से प्रेरित एक सशक्त एवं समावेशी 'नव भारत 2047' (New India 2047) के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।

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