विजयनगर साम्राज्य की सांस्कृतिक और स्थापत्य उपलब्धियों पर प्रकाश डालें।

 Q. विजयनगर साम्राज्य की सांस्कृतिक और स्थापत्य उपलब्धियों पर प्रकाश डालें।

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वर्ष 1336 में हरिहर और बुक्का द्वारा स्थापित विजयनगर साम्राज्य दक्षिण भारतीय इतिहास में सांस्कृतिक पुनर्जागरण और स्थापत्य चरमोत्कर्ष (Architectural Zenith) का एक अद्वितीय कालखंड था। तत्कालीन विदेशी यात्रियों, जैसे डोमिंगो पेस और अब्दुर रज्जाक ने विजयनगर को रोम के समान विशाल और समृद्ध बताया था। अपनी राजनीतिक शक्ति के साथ-साथ, इस साम्राज्य ने कला, साहित्य और धर्मनिरपेक्ष वास्तुकला को जो संरक्षण प्रदान किया, वह आज भी यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल 'हम्पी' के खंडहरों में जीवंत है।

विजयनगर साम्राज्य की स्थापत्य उपलब्धियां

विजयनगर के शासकों ने पारंपरिक द्रविड़ वास्तुकला शैली को परिष्कृत किया और उसमें नवीन तत्वों का समावेश कर एक विशिष्ट 'विजयनगर शैली' को जन्म दिया।

1. मंदिर वास्तुकला में नवाचार (Innovations in Temple Architecture)

  • कल्याण मंडप और अमान श्राइन: मंदिरों के परिसर में एक अलग 'कल्याण मंडप' (ईश्वरीय विवाह समारोहों के लिए) और मुख्य देवता की पत्नी के लिए 'अमान श्राइन' का निर्माण इस काल की प्रमुख विशेषता थी।

  • विशाल गोपुरम (Raya Gopurams): कृष्णदेवराय जैसे शासकों ने मंदिरों के प्रवेश द्वारों पर अत्यंत ऊंचे और भव्य गोपुरमों का निर्माण करवाया, जो साम्राज्य की आर्थिक समृद्धि और सत्ता के वैधीकरण (Legitimization of Power) का प्रतीक थे।

  • अलंकृत स्तंभ (Ornamental Pillars): स्तंभों पर पौराणिक पशु 'याली' (Yali) और उछलते हुए घोड़ों की नक्काशी इस शैली का हस्ताक्षर (Signature) है। विट्ठल स्वामी मंदिर के 'संगीतमय स्तंभ' (Musical Pillars) तत्कालीन पाषाण शिल्पकला और ध्वनिकी (Acoustics) के उन्नत ज्ञान को दर्शाते हैं।

2. इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का समन्वय (Syncretic Architecture)

  • धर्मनिरपेक्ष संरचनाएं: धार्मिक संरचनाओं के इतर, नागरिक और प्रशासनिक भवनों में इस्लामी वास्तुकला के तत्वों (मेहराब और गुंबद) का स्वतंत्र रूप से उपयोग किया गया।

  • लोटस महल और एलिफेंट स्टेबल: लोटस महल (Lotus Mahal) और शाही हाथियों का अस्तबल (Elephant Stables) हिंदू और इस्लामी स्थापत्य कला के निर्बाध एकीकरण (Seamless Integration) के सर्वोत्कृष्ट उदाहरण हैं।

3. उन्नत जल प्रबंधन इंजीनियरिंग (Hydraulic Infrastructure)

  • पारिस्थितिक अनुकूलन: तुंगभद्रा नदी की शुष्क भौगोलिक परिस्थितियों से निपटने के लिए उन्नत जल अवसंरचनाओं का निर्माण किया गया।

  • पुर्तगाली यात्री नूनिज के वृत्तांतों के अनुसार, कमलापुरम जलाशय और हिरिया नहर (Hiriya Canal) का निर्माण कृषि सिंचाई और शहरी जल आपूर्ति के लिए किया गया था, जो तत्कालीन जल-विज्ञान (Hydrology) की समझ को प्रमाणित करता है।

विजयनगर साम्राज्य की सांस्कृतिक उपलब्धियां

1. बहुभाषी साहित्यिक स्वर्ण युग (Literary Renaissance)

  • विजयनगर का दरबार संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़ और तमिल साहित्य का महान संरक्षक था।

  • राजा कृष्णदेवराय स्वयं एक महान विद्वान थे; उनकी तेलुगु रचना 'अमुक्तमाल्यदा' (शासनकला पर) और संस्कृत नाटक 'जाम्बवती कल्याणम' साहित्य के मील के पत्थर हैं।

  • उनके दरबार में अष्टदिग्गज (तेलुगु के आठ महान कवि, जिनमें अल्लसानी पेद्दाना प्रमुख थे) निवास करते थे, जिन्होंने दक्षिण भारतीय साहित्य को एक नया आयाम दिया।

2. ललित कला और संगीत का विकास

  • इस काल में कर्नाटक संगीत की नींव मजबूत हुई। महान संत और संगीतकार पुरंदर दास (कर्नाटक संगीत के पितामह) इसी काल से संबंधित हैं।

  • लोक कलाओं के रूप में यक्षगान (Yakshagana) जैसे नाट्य-नृत्य रूपों को व्यापक शाही संरक्षण प्राप्त हुआ।

3. धार्मिक सहिष्णुता और बहुलवाद (Religious Pluralism)

  • यद्यपि विजयनगर के शासक कट्टर वैष्णव और शैव (विरूपाक्ष के उपासक) थे, परंतु राज्य की नीतियां अत्यधिक धर्मनिरपेक्ष थीं।

  • देवराय द्वितीय (प्रौढ़ देवराय) द्वारा अपनी सेना में मुस्लिम तीरंदाजों की भर्ती करना और उनके लिए मस्जिदों का निर्माण करवाना, राज्य के समावेशी चरित्र को रेखांकित करता है।

विजयनगर साम्राज्य मात्र एक भू-राजनीतिक इकाई नहीं था, बल्कि यह एक ऐसा सांस्कृतिक क्रूसिबल (Cultural Crucible) था जहाँ विभिन्न कलाओं, भाषाओं और वास्तुकला शैलियों का अभूतपूर्व संश्लेषण हुआ। महानवमी डिब्बा पर होने वाले भव्य उत्सवों से लेकर विट्ठल मंदिर की सूक्ष्म नक्काशी तक, विजयनगर की विरासत भारतीय उपमहाद्वीप की रचनात्मकता का उद्घोष करती है। वर्तमान में, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा इन विरासतों का संरक्षण सतत विकास लक्ष्य 11.4 (SDG 11.4 - विश्व की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत की रक्षा) के अनुरूप है। इस समृद्ध सांस्कृतिक पूंजी को सहेजना और वैश्विक पटल पर प्रस्तुत करना 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना को पुष्ट करता है तथा 'विकसित भारत @2047' के विजन में हमारी सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) का एक सशक्त आधार प्रदान करता है।

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