संगठित अपराध (Organized Crime) और आतंकवाद के बीच गठजोड़ (Nexus) का आलोचनात्मक परीक्षण करें।

 Q. संगठित अपराध (Organized Crime) और आतंकवाद के बीच गठजोड़ (Nexus) का आलोचनात्मक परीक्षण करें।

Ans - 

पारंपरिक रूप से, संगठित अपराध (जिसका प्राथमिक उद्देश्य अवैध आर्थिक लाभ कमाना है) और आतंकवाद (जिसका उद्देश्य वैचारिक, धार्मिक या राजनीतिक सत्ता परिवर्तन है) स्वतंत्र रूप से संचालित होते थे। किंतु वैश्वीकरण, पारराष्ट्रीय नेटवर्क और तकनीकी प्रगति के वर्तमान परिदृश्य में, इन दोनों के मध्य एक 'सहजीवी संबंध' (Symbiotic Relationship) स्थापित हो गया है। वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के संकल्पों ने इस गठजोड़ को संप्रभु राज्यों की स्थिरता के लिए सबसे गंभीर समकालीन खतरों में से एक माना है। भारत में इस गठजोड़ का सबसे स्पष्ट और विभत्स रूप 1993 के मुंबई बम धमाकों में देखा गया था, जहां एक पारराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट ने आतंकवादियों को हथियार, रसद और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराए थे।

गठजोड़ का उदय: कारण और कार्यप्रणाली (PESTLE विश्लेषण)

यह गठजोड़ 'परस्पर निर्भरता' के सिद्धांत पर कार्य करता है, जहां आतंकवादी समूह आपराधिक सिंडिकेट की विशेषज्ञता का लाभ उठाते हैं, और अपराधी आतंकवादियों की मारक क्षमता का उपयोग करते हैं।

1. आर्थिक और वित्तीय एकीकरण (Economic)

  • नार्को-टेररिज्म (Narco-Terrorism): भारत रणनीतिक रूप से अफीम उत्पादक क्षेत्रों—'स्वर्णिम अर्धचंद्र' (Golden Crescent) और 'स्वर्णिम त्रिभुज' (Golden Triangle) के मध्य स्थित है। आतंकवादी संगठन नशीले पदार्थों की तस्करी से प्राप्त भारी धन (Black money) का उपयोग हथियारों की खरीद और कैडरों के वित्तपोषण में करते हैं।

  • हवाला और धन शोधन (Money Laundering): आतंकवादियों को सीमाओं के पार बिना किसी भौतिक निशान (Paper trail) के धन स्थानांतरित करने के लिए संगठित अपराधियों के स्थापित 'हवाला नेटवर्क' और शेल कंपनियों (Shell Companies) की आवश्यकता होती है।

2. तार्किक और तकनीकी अवसंरचना (Technological & Logistical)

  • तस्करी के नेटवर्क का उपयोग: संगठित अपराधियों के पास जाली पासपोर्ट बनाने, सीमा पार घुसपैठ कराने और सुरक्षित पनाहगाह (Safe Havens) प्रदान करने की विशेषज्ञता होती है। आतंकवादी इन स्थापित रास्तों का उपयोग करते हैं।

  • साइबर अपराध और क्रिप्टोकरेंसी: आधुनिक गठजोड़ डार्क वेब (Dark Web) और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग कर रहा है। साइबर फिरौती (Ransomware), हैकिंग और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से धन का लेन-देन इस गठजोड़ को भौगोलिक सीमाओं से मुक्त कर रहा है।

3. राजनीतिक और प्रशासनिक शून्यता का दोहन (Political & Legal)

  • भ्रष्टाचार और संस्थागत क्षरण: वोहरा समिति (Vohra Committee, 1993) की रिपोर्ट ने स्पष्ट रूप से राजनेताओं, नौकरशाही और अपराधियों के बीच के गठजोड़ को उजागर किया था। आतंकवादी इसी भ्रष्ट तंत्र का लाभ उठाकर राज्य की मशीनरी को पंगु बनाते हैं।

  • जाली भारतीय मुद्रा (FICN): राज्य-प्रायोजित आतंकवाद (विशेषकर पड़ोसी देशों से) संगठित अपराधियों के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था में उच्च गुणवत्ता वाली जाली मुद्रा प्रवाहित करता है, जो 'आर्थिक आतंकवाद' का एक रूप है।

इस गठजोड़ को तोड़ने में विद्यमान चुनौतियां

  • विधिक परिभाषाओं में भिन्नता: वैश्विक स्तर पर और घरेलू कानूनों में आतंकवाद और संगठित अपराध को अलग-अलग खानों (Silos) में रखा गया है। इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का टकराव होता है।

  • पारराष्ट्रीय प्रकृति (Transnational Nature): अपराध की योजना एक देश में बनती है, वित्तपोषण दूसरे देश से होता है, और निष्पादन तीसरे देश में। प्रत्यर्पण संधियों (Extradition treaties) की कमी और 'डेटा स्थानीयकरण' का अभाव जांच को धीमा कर देता है।

  • तकनीकी गुमनामी: 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' और 'पीयर-टू-पीयर' नेटवर्क के कारण वित्तीय लेनदेन और संचार के 'प्रथम प्रवर्तक' (First Originator) का पता लगाना अत्यंत कठिन हो गया है।

समाधान के लिए संस्थागत और रणनीतिक ढांचा

भारत सरकार ने इस दोहरे खतरे से निपटने के लिए एक मजबूत बहु-एजेंसी दृष्टिकोण अपनाया है:

विधिक और संस्थागत उपायमुख्य कार्य और उत्तरदायित्व
विधिक सुदृढ़ीकरण (Legal)UAPA (1967) और PMLA (2002) में संशोधन कर जांच एजेंसियों को अधिक शक्तियां प्रदान की गई हैं। संगठित अपराध से निपटने के लिए MCOCA की तर्ज पर अन्य राज्यों में भी कानून बनाए जा रहे हैं।
संस्थागत समन्वय (Institutional)राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को पारराष्ट्रीय अपराधों की जांच का अधिकार दिया गया है। NATGRID और MAC (मल्टी-एजेंसी सेंटर) के माध्यम से वास्तविक समय (Real-time) में खुफिया जानकारी साझा की जा रही है।
वित्तीय निगरानी (Financial)वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) संदिग्ध लेनदेन (STRs) पर नजर रखती है और बैंकिंग प्रणालियों में KYC मानदंडों को सख्त किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग (Global)संयुक्त राष्ट्र पारराष्ट्रीय संगठित अपराध कन्वेंशन (पालेर्मो कन्वेंशन) का अनुसमर्थन और इंटरपोल (INTERPOL) के साथ उन्नत समन्वय।

आगे की राह (Way Forward)

संगठित अपराध और आतंकवाद के गठजोड़ को समाप्त करने के लिए एक 'संपूर्ण-सरकार' (Whole-of-Government) और 'संपूर्ण-समाज' (Whole-of-Society) दृष्टिकोण की आवश्यकता है। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) की 'क्षमता निर्माण और संघर्ष समाधान' रिपोर्ट के अनुरूप, राज्य पुलिस बलों का आधुनिकीकरण और उन्हें संघीय एजेंसियों के बराबर तकनीकी रूप से सक्षम बनाना अनिवार्य है।

सतत विकास लक्ष्य (SDG 16 - शांति, न्याय और सशक्त संस्थाएं) की प्राप्ति के लिए भारत को 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन' (CCIT) को संयुक्त राष्ट्र में पारित कराने का नेतृत्व करना चाहिए। इस वैश्विक खतरे का कोई स्थानीय समाधान नहीं हो सकता। 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन को यथार्थ में बदलते हुए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सूचना साझाकरण और संयुक्त कार्रवाई के लिए एकजुट होना होगा, ताकि 'विकसित भारत @2047' के लिए एक सुरक्षित, पारदर्शी और अभेद्य राष्ट्रीय सुरक्षा अवसंरचना का निर्माण किया जा सके।

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