शॉर्ट नोट्स: बिहार में वन स्थिति रिपोर्ट 2021।
Q. शॉर्ट नोट्स: बिहार में वन स्थिति रिपोर्ट 2021।
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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अधीन भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) द्वारा द्विवार्षिक रूप से प्रकाशित 'भारत वन स्थिति रिपोर्ट' (ISFR) 2021 (17वां संस्करण) देश के वन और वृक्ष संसाधनों का एक प्रामाणिक आकलन है। रिमोट सेंसिंग उपग्रह (Resourcesat-2) पर आधारित यह रिपोर्ट बिहार की पारिस्थितिक स्थिति और हरित आवरण की दिशा में किए गए नीतिगत प्रयासों (जैसे 'जल-जीवन-हरियाली') की सफलता और भविष्य की चुनौतियों को रेखांकित करती है।
ISFR 2021: बिहार के प्रमुख आंकड़े
कुल वनावरण (Forest Cover): राज्य में कुल वनावरण 7,380.79 वर्ग किमी है, जो बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल (94,163 वर्ग किमी) का 7.84% है।
वृक्षावरण (Tree Cover): वनों के बाहर स्थित वृक्षावरण 2,341 वर्ग किमी (2.49%) दर्ज किया गया है।
समग्र हरित आवरण: कुल वनावरण और वृक्षावरण मिलाकर 9,721.79 वर्ग किमी है, जो राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 10.3% है।
सकारात्मक वृद्धि: 2019 की पिछली रिपोर्ट की तुलना में वनावरण में 75 वर्ग किमी (1.03%) और वृक्षावरण में 338 वर्ग किमी की उत्साहजनक वृद्धि दर्ज की गई है।
जिलों के स्तर पर वनावरण का वितरण और विषमता
रिपोर्ट राज्य में वनों के असमान भौगोलिक वितरण को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जहाँ दक्षिणी और तराई क्षेत्रों में वन अधिक हैं, जबकि मध्य और उत्तरी मैदानों में इनका अभाव है:
सर्वाधिक वनावरण वाले जिले (क्षेत्रफल): कैमूर (1,051.56 वर्ग किमी), पश्चिम चंपारण (903.34 वर्ग किमी), और रोहतास (669.91 वर्ग किमी)।
सर्वाधिक वनावरण वाले जिले (प्रतिशत में): कैमूर (31.56%), जमुई (21.34%), और नवादा (20.72%)।
न्यूनतम वनावरण वाले जिले: शेखपुरा में क्षेत्रफल (मात्र 1.19 वर्ग किमी) और प्रतिशत (0.17%) दोनों दृष्टियों से राज्य में सबसे कम वन हैं।
इसके बाद बक्सर और सीवान का स्थान है (दोनों 0.35%)।
वन सघनता का वर्गीकरण (Classification of Canopy Density)
अति सघन वन (VDF): मात्र 333.42 वर्ग किमी (पश्चिम चंपारण में सर्वाधिक)।
मध्यम सघन वन (MDF): 3,285.83 वर्ग किमी।
खुले वन (Open Forest): 3,761.54 वर्ग किमी (कैमूर में सर्वाधिक)।
रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि बिहार के कुल वनावरण में आधे से अधिक हिस्सा 'खुले वनों' का है।
पारिस्थितिक चुनौतियाँ
राष्ट्रीय लक्ष्य से दूरी: राष्ट्रीय वन नीति, 1988 के अनुसार पारिस्थितिक संतुलन के लिए 33% भूभाग पर वनावरण होना चाहिए, जबकि बिहार अभी 10.3% (वन+वृक्ष) पर है, जो एक गंभीर ढांचागत चुनौती है।
वानिकी के समक्ष जोखिम: वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व (VTR) जैसे सघन वन क्षेत्रों में वनाग्नि (Forest Fires) की घटनाएं और अनियंत्रित चराई राज्य की जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रही हैं।
आगे की राह
ISFR 2021 के आंकड़े यह सिद्ध करते हैं कि बिहार में वनों के संरक्षण की दिशा में किए गए संस्थागत प्रयास धरातल पर सफल हो रहे हैं। यद्यपि 33% के राष्ट्रीय लक्ष्य तक पहुंचना एक भू-आबद्ध और कृषि-सघन राज्य के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण है।
इस पारिस्थितिक असंतुलन को पाटने के लिए कृषि-वानिकी (Agro-forestry) और 'कार्बन सिंक' के निर्माण को आर्थिक प्रोत्साहन से जोड़ना होगा। वन संसाधनों और वृक्षारोपण अभियानों को केवल पारंपरिक वन-बहुल क्षेत्रों (जैसे कैमूर की पहाड़ियों या पश्चिम चंपारण के तराई क्षेत्र) तक सीमित रखने के बजाय, यह अत्यंत आवश्यक है कि सामाजिक वानिकी और हरित आवरण का सघन विस्तार पटना और सभी बिहार के जिलों में समान एवं विकेंद्रीकृत रूप से किया जाए। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर जलवायु लचीलापन (Climate Resilience) बढ़ेगा, बल्कि 'हरित बिहार, समृद्ध बिहार' का संकल्प भी साकार होगा।