भारत की नई संसद भवन का निर्माणः लोकतांत्रिक प्रतीकों और सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के महत्व पर चर्चा करें।

 Q. भारत की नई संसद भवन का निर्माणः लोकतांत्रिक प्रतीकों और सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के महत्व पर चर्चा करें।

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भारत के नए संसद भवन का निर्माण: लोकतांत्रिक प्रतीक और सेंट्रल विस्टा परियोजना का महत्त्व

भूमिका

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में नए संसद भवन का निर्माण और 'सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना' मात्र एक ढांचागत अद्यतनीकरण नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की एक युगांतरकारी घटना है। लुटियंस और बेकर द्वारा डिजाइन किया गया पुराना भवन औपनिवेशिक अतीत का प्रतिनिधित्व करता था, जबकि नया भवन 'आज़ादी के अमृत महोत्सव' के अवसर पर भारत की संप्रभुता, 'आत्मनिर्भर भारत' की आकांक्षाओं और स्वदेशी वास्तुकला का जीवंत प्रमाण है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी राजीव सूरी बनाम भारत संघ (2021) वाद में इस परियोजना की वैधानिकता और आवश्यकता को स्वीकार करते हुए इसे नीतिगत रूप से वैध ठहराया था।

सेंट्रल विस्टा परियोजना का प्रशासनिक एवं रणनीतिक महत्त्व

  • प्रशासनिक दक्षता और समन्वय: वर्तमान में भारत सरकार के मंत्रालय विभिन्न भवनों में बिखरे हुए हैं। नए 'केंद्रीय सचिवालय' (Central Secretariat) के निर्माण से सभी 51 मंत्रालय एक ही स्थान पर आ जाएंगे, जिससे अंतर-विभागीय समन्वय बढ़ेगा और प्रशासनिक निर्णयों में तेजी आएगी।

  • भविष्योन्मुखी और तकनीकी उन्नयन: पुराना भवन भूकंपीय क्षेत्र-II के मानकों पर बना था, जबकि नई संरचना भूकंपीय क्षेत्र-IV (Seismic Zone IV) के अनुरूप सुरक्षित है। यह आधुनिक डिजिटल सुविधाओं (Paperless administration) और उन्नत साइबर सुरक्षा ग्रिड से सुसज्जित है।

  • पर्यावरणीय संवहनीयता: यह परियोजना पूर्णतः 'ग्रीन बिल्डिंग' (हरित भवन) मानकों पर आधारित है। इसमें ऊर्जा दक्षता, वर्षा जल संचयन और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है।

  • भविष्य के परिसीमन की तैयारी: अनुच्छेद 82 के तहत 2026 के बाद होने वाले संभावित परिसीमन (Delimitation) के कारण सांसदों की संख्या में वृद्धि निश्चित है। नई लोकसभा में 888 और राज्यसभा में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था इस जनसांख्यिकीय और प्रतिनिधित्व की मांग को पूरा करती है।

नए संसद भवन में निहित लोकतांत्रिक एवं सांस्कृतिक प्रतीक

यह भवन भारत की सांस्कृतिक विविधता और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के दर्शन का मूर्तरूप है:

  • राष्ट्रीय प्रतीकों का वास्तुशिल्पीय समावेश: लोकसभा का आंतरिक भाग राष्ट्रीय पक्षी 'मोर' (Peacock Theme) और राज्यसभा का भाग राष्ट्रीय पुष्प 'कमल' (Lotus Theme) की थीम पर आधारित है। भवन के प्रांगण में राष्ट्रीय वृक्ष 'बरगद' को स्थापित किया गया है।

  • सेंगोल (Sengol) की ऐतिहासिक स्थापना: लोकसभा अध्यक्ष के आसन के समीप स्थापित 'सेंगोल' (राजदंड) केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि चोल साम्राज्य की परंपरा से प्रेरित 'धर्म, न्याय और निष्पक्ष शासन' का प्रतीक है। यह 1947 में सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण का ऐतिहासिक गवाह भी है।

  • संविधान कक्ष (Constitution Hall): भवन के केंद्र में स्थित यह कक्ष भारतीय लोकतंत्र की विकास यात्रा, संविधान निर्माताओं के विजन और भारत की लोकतांत्रिक विरासत को आम जनता के समक्ष प्रदर्शित करता है।

  • सांस्कृतिक एकीकरण: भवन निर्माण में प्रयुक्त सामग्री देश के कोने-कोने से जुटाई गई है—जैसे राजस्थान से बलुआ पत्थर, उत्तर प्रदेश से कालीन, और महाराष्ट्र से लकड़ी—जो भारत के संघीय ढांचे की मजबूती को दर्शाती है।

बिहार के संदर्भ में प्रासंगिकता एवं जुड़ाव

  • वैशाली के प्राचीन लोकतांत्रिक आदर्श: नया संसद भवन जिस लोकतांत्रिक भावना (Power to the People) का आधुनिक प्रतीक है, उसकी ऐतिहासिक जड़ें बिहार के लिच्छवी गणराज्य (वैशाली) में विद्यमान हैं, जिसे विश्व का प्रथम लोकतंत्र माना जाता है।

  • नालंदा और चाणक्य का चित्रण: नए संसद भवन की कलाकृतियों और भित्तिचित्रों (Murals) में बिहार के गौरवशाली इतिहास को प्रमुखता दी गई है। इसमें नालंदा महाविहार के चित्र और कौटिल्य (चाणक्य) के सुशासन एवं अर्थशास्त्र के सिद्धांतों को दर्शाया गया है।

  • श्रमजीवियों का अमूल्य योगदान: इस विशाल संरचना के निर्माण में बिहार के कुशल और अकुशल कामगारों की महती भूमिका रही है। उनके इस पसीने और परिश्रम को सम्मान देने हेतु भवन में एक विशेष 'श्रमजीवी दीर्घा' का निर्माण किया गया है।

चुनौतियां एवं आलोचनात्मक मूल्यांकन

  • संसाधनों का आवंटन: कोविड-19 महामारी के बाद की आर्थिक रिकवरी के दौरान परियोजना की उच्च लागत को लेकर चिंताएं व्यक्त की गईं। यद्यपि, सरकार का तर्क है कि किराए के भवनों से मुक्ति और कार्यकुशलता में वृद्धि से दीर्घकाल में भारी राजस्व की बचत होगी।

  • विरासत संरक्षण: पुराने भवनों के ऐतिहासिक महत्त्व को लेकर आपत्तियां थीं। इसका समाधान यह सुनिश्चित करके किया गया है कि पुराने संसद भवन को 'लोकतंत्र के संग्रहालय' (Museum of Democracy) के रूप में संरक्षित रखा जाएगा।

आगे की राह (Way Forward)

  1. संसदीय विमर्श की गुणवत्ता में सुधार: भौतिक अवसंरचना के उन्नयन के साथ-साथ अनुच्छेद 105 के तहत प्राप्त संसदीय विशेषाधिकारों का उपयोग सार्थक और रचनात्मक बहस के लिए किया जाना चाहिए।

  2. संस्थागत जवाबदेही: नई तकनीकी सुविधाओं का लाभ उठाते हुए विधायी कार्यों में जन-भागीदारी (Public Consultation) और पारदर्शिता को अधिक सुदृढ़ किया जाना चाहिए।

  3. 'विकास' और 'विरासत' का संतुलन: सेंट्रल विस्टा के आगामी चरणों में पर्यावरण संरक्षण, दिल्ली के हरित आवरण और हेरिटेज संरक्षण के बीच एक सटीक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

निष्कर्ष

भारत का नया संसद भवन मात्र ईंट और पत्थर की कोई निर्जीव इमारत नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों की संप्रभुता का मंदिर है। यह भवन जहाँ एक ओर हमारी प्राचीन गणतांत्रिक जड़ों (वैशाली मॉडल) को नमन करता है, वहीं दूसरी ओर 2047 तक एक 'विकसित भारत' के निर्माण की दिशा में देश की तकनीकी और रणनीतिक क्षमता का उद्घोष करता है।

क्या आपको लगता है कि नए संसद भवन के अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और डिजिटल सुविधाओं के फलस्वरूप हमारी संसदीय कार्यप्रणाली और विधायी बहस की गुणवत्ता में भी यथार्थ रूप से कोई गुणात्मक सुधार आएगा?

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