'स्मार्ट सिटी मिशन' के उद्देश्यों की चर्चा करें। क्या यह भारत की शहरी समस्याओं का स्थायी समाधान है?
Q. 'स्मार्ट सिटी मिशन' के उद्देश्यों की चर्चा करें। क्या यह भारत की शहरी समस्याओं का स्थायी समाधान है?
Ans -
'स्मार्ट सिटी मिशन': उद्देश्य, उपलब्धियाँ और शहरी चुनौतियों का विश्लेषणात्मक मूल्यांकन
भारत में शहरीकरण की तीव्र गति ने एक ओर जहाँ आर्थिक विकास के नए द्वार खोले हैं, वहीं दूसरी ओर आधारभूत संरचना और संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाला है। इसी परिप्रेक्ष्य में, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा वर्ष 2015 में 'स्मार्ट सिटी मिशन' (Smart City Mission - SCM) का शुभारंभ किया गया। इसका मूल लक्ष्य देश के 100 चुनिंदा शहरों को 'स्मार्ट समाधानों' (Smart Solutions) के माध्यम से आर्थिक विकास के इंजन में बदलना और नागरिकों को गरिमापूर्ण जीवन (संविधान का अनुच्छेद 21) प्रदान करना है। यह मिशन प्रत्यक्ष रूप से सतत विकास लक्ष्य-11 (SDG 11: Sustainable Cities and Communities) की प्राप्ति से जुड़ा है।
1. 'स्मार्ट सिटी मिशन' के प्रमुख उद्देश्य
इस मिशन की परिकल्पना में बुनियादी ढाँचे के विकास के साथ-साथ तकनीकी नवाचार को प्राथमिकता दी गई है। इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
मूलभूत आधारभूत संरचना का सुदृढ़ीकरण: चौबीसों घंटे (24x7) स्वच्छ जल की आपूर्ति, सुनिश्चित विद्युत उपलब्धता, और वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) सुनिश्चित करना।
कुशल शहरी गतिशीलता (Urban Mobility): सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, गैर-मोटर चालित परिवहन (Non-motorized transport) के लिए नेटवर्क तैयार करना और 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) को अपनाना।
ई-गवर्नेंस और नागरिक भागीदारी: सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का उपयोग करके सरकारी सेवाओं को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना। 'स्मार्ट सिटी पोर्टल' के माध्यम से नीति-निर्माण में जन-भागीदारी सुनिश्चित करना।
सतत पर्यावरण का निर्माण: खुले स्थानों (Parks, Playgrounds) का विकास, वायु गुणवत्ता की निगरानी और ऊर्जा कुशल (Energy Efficient) हरित भवनों के निर्माण को प्रोत्साहन।
सुरक्षा और स्वास्थ्य: शहर के हर कोने में CCTV सर्विलांस और एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (ICCC) के माध्यम से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का डिजिटलीकरण।
2. विश्लेषण: क्या यह शहरी समस्याओं का स्थायी समाधान है?
स्मार्ट सिटी मिशन ने 'अर्बन गवर्नेंस' में तकनीकी समावेशन का एक नया प्रतिमान गढ़ा है, विशेषकर कोविड-19 महामारी के दौरान ICCC के 'वॉर रूम' के रूप में उपयोग ने इसकी प्रासंगिकता सिद्ध की है। परंतु, इसे भारत की जटिल शहरी समस्याओं का "पूर्ण और स्थायी समाधान" नहीं माना जा सकता। इसके समक्ष कई गंभीर ढांचागत और नीतिगत सीमाएँ हैं:
क. असमान विकास और 'क्षेत्र-आधारित विकास' (ABD) की विसंगति
SCM के तहत अधिकांश बजट का आवंटन 'एरिया बेस्ड डेवलपमेंट' (ABD) पर किया गया है, जो शहर के मात्र 5-10% भौगोलिक क्षेत्र को कवर करता है (रेट्रोफिटिंग या रीडेवलपमेंट)।
इससे शहर के भीतर ही एक "अभिजात्य वर्ग का द्वीप" (Islands of Excellence) बन जाता है, जबकि शेष शहर (विशेषकर मलिन बस्तियाँ) बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह जाता है। यह शहरी असमानता (Urban Divide) को गहरा करता है।
ख. वित्तीय स्वायत्तता और ULBs की दुर्बलता
मिशन मुख्य रूप से केंद्र और राज्य के अनुदान (SPV - Special Purpose Vehicle) पर निर्भर है।
74वें संविधान संशोधन के दशकों बाद भी, अधिकांश शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies) संपत्ति कर वसूली और म्युनिसिपल बांड जारी करने में अक्षम हैं। बिना वित्तीय आत्मनिर्भरता के स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का रख-रखाव (O&M) भविष्य में एक बड़ा संकट बन जाएगा।
ग. बेतरतीब परिधीय विस्तार (Peri-Urban Sprawl) की अनदेखी
मिशन शहर की वर्तमान सीमाओं के भीतर केंद्रित है, लेकिन शहरों के बाहर तेजी से पनप रही अनियोजित कॉलोनियों और ग्रामीण-शहरी सीमांत (Rural-urban fringe) के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।
घ. बिहार के संदर्भ में विकेंद्रीकृत नियोजन की आवश्यकता
बिहार से इस मिशन के तहत पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और बिहारशरीफ को चुना गया है। हालाँकि, इन परियोजनाओं ने इन शहरों के विशिष्ट क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाया है, लेकिन राज्य में अनियोजित शहरीकरण की गति को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है।
ग्रामीण क्षेत्रों से हो रहे बड़े पैमाने के पलायन को रोकने और संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करने के लिए, शहरी नियोजन के इस 'स्मार्ट मॉडल' को केवल कुछ चुनिंदा महानगरों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। वास्तविक स्थायी समाधान तभी संभव है जब आधारभूत संरचना, ई-गवर्नेंस और निवेश का यह ढांचा पटना और सभी बिहार के जिलों में समान रूप से लागू किया जाए।
आगे की राह (Way Forward)
भारत की शहरी समस्याओं का स्थायी समाधान केवल तकनीकी उपकरणों की स्थापना में नहीं, बल्कि समावेशी और धारणीय शहरी शासन (Urban Governance) में निहित है:
मिशनों का अभिसरण (Convergence): स्मार्ट सिटी मिशन को अमृत 2.0 (AMRUT), स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन (RURBAN) के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए, ताकि 'स्मार्ट सिटी' की अवधारणा का विस्तार 'स्मार्ट रीजन' (Smart Region) में हो सके।
क्षमता निर्माण (Capacity Building): शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को सशक्त बनाने के लिए मेयर-इन-काउंसिल प्रणाली (Mayor-in-Council) और मजबूत राजस्व संग्रहण तंत्र विकसित करना होगा।
'पैन-सिटी' (Pan-City) पहल को प्राथमिकता: नागरिक सुविधाओं, जल निकासी और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी परियोजनाओं को ABD (Area Based Development) से निकालकर पूरे शहर (Slums सहित) के लिए अनिवार्य बनाया जाए।
प्रौद्योगिकी शहरी विकास का एक 'साधन' (Tool) हो सकती है, 'साध्य' (End) नहीं। जब तक शहरी नियोजन के केंद्र में हाशिए पर खड़े अंतिम व्यक्ति (अंत्योदय) का कल्याण और पर्यावरण संरक्षण नहीं होगा, तब तक कोई भी मिशन भारतीय शहरों को वास्तविक अर्थों में जीवंत और रहने योग्य (Livable) नहीं बना सकता।