शॉर्ट नोट्सः ड्रोन तकनीक और इसके विविध उपयोग।
Q. शॉर्ट नोट्सः ड्रोन तकनीक और इसके विविध उपयोग।
Ans -
भूमिका
मानव रहित हवाई वाहन (Unmanned Aerial Vehicles - UAVs) अथवा ड्रोन एक ऐसी उन्नत विमानन तकनीक है, जिसे रिमोट कंट्रोल या स्वायत्त सॉफ्टवेयर (Autonomous Software) के माध्यम से बिना मानव पायलट के संचालित किया जाता है। आरंभ में रक्षा और सैन्य क्षेत्रों तक सीमित यह तकनीक आज कृषि, स्वास्थ्य, अवसंरचना विकास, और आपदा प्रबंधन जैसे नागरिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में एक परिवर्तनकारी (Game-changer) साधन बनकर उभरी है।
भारत सरकार ने 'ड्रोन नियम, 2021' को उदार बनाकर और 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) योजना के माध्यम से वर्ष 2030 तक भारत को 'वैश्विक ड्रोन हब' (Global Drone Hub) बनाने का रणनीतिक लक्ष्य रखा है। शासन-प्रशासन में इसके उपयोग से सुशासन (Good Governance), पारदर्शिता और त्वरित सेवा वितरण को बल मिल रहा है।
ड्रोन तकनीक के विविध उपयोग
ड्रोन तकनीक का बहुआयामी उपयोग भारतीय अर्थव्यवस्था और प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसे निम्नलिखित उप-शीर्षकों के अंतर्गत समझा जा सकता है:
1. कृषि क्षेत्र (Agriculture) एवं 'किसान ड्रोन'
सटीक कृषि (Precision Farming): खेतों में कीटनाशकों और तरल उर्वरकों (जैसे- नैनो यूरिया) का समान और सुरक्षित छिड़काव, जिससे इनपुट लागत में कमी आती है तथा किसानों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
फसल और मृदा निगरानी: इन्फ्रारेड सेंसर और कैमरों की मदद से मृदा के स्वास्थ्य, सिंचाई की आवश्यकता और फसल की उपज का वास्तविक समय (Real-time) विश्लेषण।
बिहार के संदर्भ में: राज्य के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) द्वारा किसानों को ड्रोन तकनीक के उपयोग हेतु प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि उत्तर बिहार और मगध क्षेत्र में कृषि उत्पादकता को बढ़ाया जा सके।
2. प्रशासन, कानून-व्यवस्था और ई-गवर्नेंस (Governance & Law and Order)
अपराध नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन: पुलिस द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना और यातायात का सुचारू प्रबंधन।
बिहार के संदर्भ में: बिहार पुलिस द्वारा आधुनिकीकरण योजना के तहत लगभग 24.50 करोड़ रुपये की लागत से 50 अत्याधुनिक ड्रोन खरीदे जा रहे हैं।
इनका उपयोग विशेषकर मद्य निषेध (Prohibition) कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए नदी क्षेत्रों (दियारा इलाकों) में अवैध शराब निर्माण की निगरानी और संगठित अपराधों को रोकने हेतु किया जा रहा है।
3. भू-स्थानिक मैपिंग और आधारभूत संरचना (Geospatial Mapping & Infrastructure)
स्वामित्व (SVAMITVA) योजना: पंचायती राज मंत्रालय की इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय भूमि का ड्रोन द्वारा सटीक सर्वेक्षण कर 'प्रॉपर्टी कार्ड' तैयार किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण भूमि विवादों में भारी कमी आ रही है।
बिहार में भी इस योजना के तहत डिजिटल भूमि सर्वेक्षण का कार्य प्रगति पर है। परियोजना निगरानी: एनएचएआई (NHAI) और रेलवे द्वारा पुलों, राजमार्गों, पावर ट्रांसमिशन लाइनों और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के निर्माण में गुणवत्ता की निगरानी करना।
4. आपदा प्रबंधन और त्वरित प्रतिक्रिया (Disaster Management)
राहत एवं बचाव कार्य: बाढ़, भूकंप या भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान दुर्गम क्षेत्रों में राहत सामग्री (भोजन, दवा) पहुँचाना और फँसे हुए लोगों की त्वरित पहचान करना।
बिहार के संदर्भ में: कोसी, गंडक और बागमती नदी बेसिन में बाढ़ के दौरान NDRF और SDRF द्वारा ड्रोन का उपयोग कर प्रभावित क्षेत्रों की सटीक मैपिंग (Flood mapping) और राहत अभियानों का सफल व सुरक्षित संचालन किया जा रहा है।
5. स्वास्थ्य सेवा और लॉजिस्टिक्स (Healthcare and Logistics)
'मेडिसिन फ्रॉम द स्काई' (Medicine from the Sky): तेलंगाना और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों की तर्ज पर सुदूर और पहाड़ी क्षेत्रों में टीकों (Vaccines), जीवन रक्षक दवाओं और रक्त के नमूनों की त्वरित डिलीवरी।
ई-कॉमर्स और आपूर्ति श्रृंखला: दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में लास्ट-माइल डिलीवरी (Last-mile delivery) में रसद लागत (Logistics cost) और समय को कम करने हेतु रसद कंपनियों द्वारा इसका उपयोग किया जा रहा है।
6. रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा (Defense and Internal Security)
सीमा निगरानी: नियंत्रण रेखा (LoC) और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर घुसपैठ की निगरानी, एंटी-टेरर ऑपरेशन और सैन्य खुफिया जानकारी जुटाना।
स्वार्म ड्रोन्स (Swarm Drones): एक साथ कई ड्रोन्स के फ्लीट (Fleet) का उपयोग कर दुश्मन के रडार को चकमा देना और 'कामिकाजे' (Kamikaze) ड्रोन्स के माध्यम से सटीक सैन्य हमले करना।
ड्रोन तकनीक के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
सुरक्षा संबंधी खतरे: सीमा पार से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए राज्य-विरोधी तत्वों द्वारा 'दुष्ट ड्रोन' (Rogue Drones) का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती है।
निजता का उल्लंघन (Privacy Concerns): हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरों के अनियंत्रित उपयोग से आम नागरिकों के 'निजता के अधिकार' (संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार) का हनन हो सकता है।
तकनीकी और आर्थिक बाधाएँ: भारत में बैटरी निर्माण, उन्नत सेंसर्स और पेलोड क्षमता की तकनीकी सीमाएँ; साथ ही, प्रशिक्षित और प्रमाणित ड्रोन पायलटों की भारी कमी।
वायु यातायात प्रबंधन: नागरिक हवाई क्षेत्र में ड्रोन्स की बढ़ती संख्या से विमानों के साथ टकराव का जोखिम, जिसके लिए एक मजबूत एयर ट्रैफिक कंट्रोल मैकेनिज्म की आवश्यकता है।
आगे की राह (Way Forward)
एंटी-ड्रोन तकनीक का विकास: 'सॉफ्ट किल' (रेडियो/GPS जैमिंग) और 'हार्ड किल' (लेज़र या मिसाइल) जैसी मल्टी-लेयर्ड काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के स्वदेशी विकास (जैसे- DRDO द्वारा) में तेजी लाई जानी चाहिए।
कौशल विकास: आईटीआई (ITIs) और शैक्षणिक संस्थानों में 'ड्रोन पायलट प्रशिक्षण' को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए, जो युवाओं के लिए 'ड्रोन-ऐज़-ए-सर्विस' (Drone as a Service - DaaS) के तहत रोजगार के अपार अवसर सृजित करेगा।
सशक्त विधिक और विनियामक ढांचा: डीजीसीए (DGCA) के 'डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म' (Digital Sky Platform) के "नो परमिशन, नो टेकऑफ़" (NPNT) प्रोटोकॉल को और अधिक प्रभावी व पारदर्शी बनाया जाना आवश्यक है।
निष्कर्ष
ड्रोन तकनीक 21वीं सदी की चौथी औद्योगिक क्रांति (4th Industrial Revolution) का एक महत्वपूर्ण और अपरिहार्य स्तंभ है। यह केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं है, बल्कि 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' (Minimum Government, Maximum Governance) के लक्ष्य को यथार्थ में बदलने का एक सशक्त माध्यम है। यदि राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक निजता से जुड़ी चिंताओं को एक सुदृढ़ एंटी-ड्रोन ग्रिड और कड़े विधिक ढांचे के माध्यम से संतुलित कर लिया जाए, तो ड्रोन तकनीक 'आत्मनिर्भर भारत' और 'डिजिटल इंडिया' के दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने तथा बिहार जैसे विकासशील राज्यों में सामाजिक-आर्थिक और प्रशासनिक उन्नयन लाने में मील का पत्थर साबित होगी।