नीति आयोग की संरचना और कार्यों का वर्णन करें। यह योजना आयोग से किस प्रकार बेहतर है?
Q. नीति आयोग की संरचना और कार्यों का वर्णन करें। यह योजना आयोग से किस प्रकार बेहतर है?
Ans -
भूमिका
बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और भारत की विविधतापूर्ण विकासात्मक आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए, 1 जनवरी 2015 को 'राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान' (NITI Aayog) की स्थापना की गई। इसने 65 वर्ष पुरानी, सोवियत संघ से प्रेरित 'योजना आयोग' (Planning Commission) का स्थान लिया।
योजना आयोग का 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' (One-size-fits-all) दृष्टिकोण 21वीं सदी की जटिलताओं के लिए अपर्याप्त सिद्ध हो रहा था। इस शून्यता को भरने हेतु नीति आयोग का गठन एक प्रमुख नीतिगत 'थिंक टैंक' (Think Tank) के रूप में किया गया, जिसका मूल दर्शन 'सहकारी संघवाद' (Cooperative Federalism) और राज्यों की सक्रिय भागीदारी पर आधारित है।
नीति आयोग की संरचना (Structure of NITI Aayog)
नीति आयोग का ढांचा अत्यंत लचीला, समावेशी और विशेषज्ञता-आधारित है। इसे निम्नलिखित स्वरूप में विन्यस्त किया गया है:
अध्यक्ष (Chairperson): भारत के प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं।
शासी परिषद (Governing Council): इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री (बिहार सहित) और केंद्र-शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं। यह संस्थागत नीति-निर्माण का सर्वोच्च मंच है।
क्षेत्रीय परिषदें (Regional Councils): एक से अधिक राज्यों को प्रभावित करने वाले विशिष्ट क्षेत्रीय मुद्दों के समाधान हेतु इनका गठन प्रधानमंत्री के निर्देश पर किया जाता है।
विशेष आमंत्रित सदस्य (Special Invitees): प्रधानमंत्री द्वारा नामित, विभिन्न डोमेन के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ और शिक्षाविद।
पूर्णकालिक संगठनात्मक ढांचा (Full-time Organizational Framework):
उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson): प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त (वर्तमान में कैबिनेट मंत्री के समकक्ष)।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO): भारत सरकार के सचिव स्तर का अधिकारी, जो प्रशासन और क्रियान्वयन देखता है।
सदस्य: पूर्णकालिक और अंशकालिक (अग्रणी विश्वविद्यालयों/शोध संस्थानों से) सदस्य।
नीति आयोग के प्रमुख कार्य (Functions of NITI Aayog)
नीति आयोग एक वित्तीय आवंटन संस्था न होकर एक विशुद्ध ज्ञान और नवाचार केंद्र है। इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
रणनीतिक एवं दीर्घकालिक नीति निर्माण: यह 5-वर्षीय योजनाओं के स्थान पर 15-वर्षीय विजन (Vision), 7-वर्षीय रणनीति (Strategy) और 3-वर्षीय एक्शन एजेंडा (Action Agenda) तैयार करता है।
सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद (Cooperative & Competitive Federalism): राज्यों के मध्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न सूचकांक जारी करना (जैसे- स्वास्थ्य सूचकांक, SDG इंडिया इंडेक्स, जल प्रबंधन सूचकांक)।
निगरानी एवं मूल्यांकन (Monitoring & Evaluation): सरकारी कार्यक्रमों की वास्तविक समय पर (Real-time) निगरानी करना और डेटा आधारित सुशासन को बढ़ावा देना।
नवाचार एवं उद्यमिता का विकास: अटल इनोवेशन मिशन (AIM) और अटल टिंकरिंग लैब्स के माध्यम से देश में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करना।
योजना आयोग से नीति आयोग की श्रेष्ठता (Superiority over Planning Commission)
नीति आयोग वैचारिक और ढांचागत, दोनों स्तरों पर योजना आयोग से अधिक उन्नत और लोकतांत्रिक है। इसका विश्लेषण निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर किया जा सकता है:
1. दृष्टिकोण में बदलाव (Bottom-up vs Top-down Approach)
योजना आयोग: इसका दृष्टिकोण केंद्रीकृत था, जहां योजनाएं दिल्ली में बनती थीं और राज्यों पर थोप दी जाती थीं (Top-down)।
नीति आयोग: यह 'नीचे से ऊपर' (Bottom-up) के दृष्टिकोण पर कार्य करता है। यह स्वीकार करता है कि सुदृढ़ राज्य ही सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण करते हैं, अतः ग्राम स्तर पर योजनाएं बनाकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत किया जाता है।
2. वित्तीय शक्तियों का पृथक्करण
योजना आयोग: यह मंत्रालयों और राज्यों को धन आवंटित करता था, जो वित्त आयोग (Article 280) के संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण माना जाता था।
नीति आयोग: यह एक विशुद्ध परामर्शदात्री संस्था है। वित्तीय आवंटन का अधिकार अब पूर्णतः वित्त मंत्रालय को सौंप दिया गया है।
3. राज्यों की भूमिका एवं प्रतिनिधित्व
योजना आयोग: राज्यों की भूमिका केवल 'राष्ट्रीय विकास परिषद' (NDC) की वार्षिक बैठकों में दर्शक मात्र की होती थी।
नीति आयोग: शासी परिषद (Governing Council) में मुख्यमंत्री समान भागीदार (Equal Partners) होते हैं, जिससे नीति निर्माण में राज्यों की प्रत्यक्ष आवाज़ सुनी जाती है।
4. विशेषज्ञता एवं लचीलापन
योजना आयोग: यह एक कठोर और नौकरशाही प्रधान संरचना थी, जो पंचवर्षीय योजनाओं के लक्ष्य पूरे न होने पर भी बीच में बदलाव नहीं कर सकती थी।
नीति आयोग: इसमें वैश्विक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और निजी क्षेत्र के पेशेवरों का समावेश है। यह आर्थिक झटकों के प्रति लचीलापन (Agility) रखता है।
बिहार के संदर्भ में नीति आयोग का प्रभाव एवं प्रासंगिकता
नीति आयोग ने विकासात्मक योजनाओं को केवल कुछ चुनिंदा औद्योगिक केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय विकेंद्रीकृत विकास का मॉडल प्रस्तुत किया है।
आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme - ADP): इस कार्यक्रम के तहत नीति आयोग ने स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्तीय समावेशन के आधार पर पिछड़े जिलों की पहचान की है। बिहार के संदर्भ में, यह दृष्टिकोण केवल राज्य की राजधानी तक सीमित न रहकर, पटना और सभी बिहार के जिलों के समेकित और संतुलित विकास पर बल देता है।
डेटा-आधारित नीति निर्माण: नीति आयोग के 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (National MPI) और 'निर्यात तैयारी सूचकांक' (EPI) ने बिहार सरकार को अपनी प्रशासनिक प्राथमिकताओं (जैसे- सात निश्चय योजना-2) को पुनर्गठित करने हेतु वस्तुनिष्ठ डेटा (Objective Data) प्रदान किया है।
आगे की राह (Way Forward)
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में नीति आयोग ने नीति-निर्माण को 'कमांड एंड कंट्रोल' के युग से निकालकर 'सहयोग और समन्वय' के युग में प्रवेश कराया है।
प्रशासनिक सुदृढीकरण के लिए यह आवश्यक है कि नीति आयोग की तर्ज पर राज्यों में भी 'स्टेट इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन' (SIT) को सशक्त किया जाए। इसके साथ ही, नीति आयोग को अपनी संस्तुतियों (Recommendations) को लागू करवाने हेतु कुछ हद तक विधिक या कार्यकारी समर्थन प्रदान किया जाना चाहिए, ताकि यह केवल एक 'सलाहकार समिति' बनकर न रह जाए। यदि सहकारी संघवाद का यह ढांचा अपने पूर्ण सामर्थ्य के साथ कार्य करेगा, तो यह वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र (Developed India) बनाने के लक्ष्य की आधारशिला सिद्ध होगा।