शॉर्ट नोट्सः वासेनार अरेंजमेंट और भारत।
Q. शॉर्ट नोट्सः वासेनार अरेंजमेंट और भारत।
Ans -
शॉर्ट नोट्स: वासेनार अरेंजमेंट और भारत
भूमिका
वासेनार अरेंजमेंट (Wassenaar Arrangement - WA) पारंपरिक हथियारों और 'दोहरे उपयोग' वाली वस्तुओं एवं प्रौद्योगिकियों (Dual-use goods and technologies) के निर्यात नियंत्रण के लिए स्थापित एक प्रमुख बहुपक्षीय व्यवस्था है। वर्ष 1996 में नीदरलैंड के वासेनार में स्थापित इस समूह का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता को बढ़ावा देना है, ताकि इन संवेदनशील प्रौद्योगिकियों का संचय और प्रसार आतंकवादियों या अस्थिर राष्ट्रों तक न हो सके। वर्ष 2017 में 42वें सदस्य के रूप में इस व्यवस्था में शामिल होना भारत की कूटनीतिक विजय थी। 1 जनवरी 2023 को भारत द्वारा एक वर्ष के लिए इसकी पूर्ण अध्यक्षता (Plenary Chairmanship) ग्रहण करना वैश्विक अप्रसार (Non-proliferation) परिदृश्य में भारत की बढ़ती रणनीतिक प्रासंगिकता का परिचायक है।
वासेनार अरेंजमेंट में भारत की सदस्यता का कूटनीतिक एवं रणनीतिक महत्त्व
संवेदनशील प्रौद्योगिकियों तक निर्बाध पहुंच: इस समूह की सदस्यता से भारत को उन उन्नत तकनीकों (जैसे- एयरोस्पेस, उच्च-क्षमता वाले कंप्यूटर, और उन्नत नेविगेशन सिस्टम) तक पहुंच प्राप्त हुई है, जिनका उपयोग नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों (Dual-use) के लिए किया जा सकता है। इससे इसरो (ISRO) और डीआरडीओ (DRDO) के रणनीतिक कार्यक्रमों को गति मिली है।
'मेक इन इंडिया' और रक्षा निर्यात को प्रोत्साहन: घरेलू रक्षा विनिर्माण को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के साथ एकीकृत करने में यह सदस्यता सहायक है। भारत अब वासेनार दिशानिर्देशों के अनुरूप अपने रक्षा उपकरणों का निर्यात कर सकता है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत रक्षा निर्यात को बढ़ाने के लक्ष्य को प्रत्यक्ष समर्थन प्रदान करता है।
परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) की दावेदारी का सुदृढ़ीकरण: भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसके बावजूद, मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR), ऑस्ट्रेलिया समूह (Australia Group) और वासेनार अरेंजमेंट में भारत का प्रवेश एक 'उत्तरदायी परमाणु शक्ति' के रूप में उसकी छवि को पुष्ट करता है। यह NSG की सदस्यता हेतु भारत के कूटनीतिक दावे को एक मजबूत विधिक और नैतिक आधार प्रदान करता है।
अंतर्राष्ट्रीय नियम-निर्माण में भागीदारी: अध्यक्षता के दौरान, भारत ने उभरती प्रौद्योगिकियों (Emerging Technologies) और आतंकवादियों द्वारा उनके संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए वैश्विक मानक तय करने में एक सक्रिय 'नियम-निर्माता' (Rule-maker) की भूमिका निभाई है।
बिहार के संदर्भ में प्रशासनिक एवं आर्थिक निहितार्थ
यद्यपि वासेनार अरेंजमेंट का प्राथमिक प्रभाव वृहद् राष्ट्रीय सुरक्षा पर होता है, तथापि इसके अप्रत्यक्ष संस्थागत लाभ राज्य स्तर पर भी परिलक्षित होते हैं:
तकनीकी अवसंरचना और MSME विकास: भारत द्वारा दोहरे उपयोग वाली उच्च-स्तरीय तकनीकों (High-tech) और मशीनरी के आयात सुगम होने से पटना और बिहार के सभी जिलों में स्थापित हो रहे नए आईटी पार्कों, स्टार्टअप्स तथा एमएसएमई (MSME) इकाइयों के लिए उन्नत उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
आंतरिक सुरक्षा और पुलिस आधुनिकीकरण: वासेनार समझौते के तहत प्राप्त नवीनतम सर्विलांस (Surveillance), साइबर सुरक्षा ग्रिड और संचार उपकरणों का उपयोग राज्य प्रशासन द्वारा वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस बल के आधुनिकीकरण और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने में किया जा सकता है।
आगे की राह (Way Forward)
SCOMET सूची का निरंतर अद्यतनीकरण: भारत को अपनी 'स्कोमेट' (SCOMET - विशेष रसायन, जीव, सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकी) निर्यात नियंत्रण सूची को वासेनार समूह के अद्यतन दिशा-निर्देशों के साथ निरंतर संरेखित करते रहना चाहिए ताकि अनुपालन में कोई विधिक बाधा न आए।
घरेलू अनुसंधान एवं विकास (R&D) में वृद्धि: प्रौद्योगिकियों के आयातक से एक प्रमुख नवोन्मेषक बनने के लिए, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सहयोग (PPP मॉडल) के माध्यम से उन्नत दोहरे उपयोग वाली तकनीकों के स्वदेशी विकास पर निवेश बढ़ाया जाना आवश्यक है।
निष्कर्ष
वासेनार अरेंजमेंट में भारत का प्रवेश और इसका सफल नेतृत्व स्वतंत्र भारत की विदेश नीति की एक युगांतरकारी उपलब्धि है। यह सिद्ध करता है कि भारत अब वैश्विक तकनीकी हस्तांतरण और निर्यात नियंत्रण व्यवस्था की परिधि पर नहीं, बल्कि उसके केंद्र में स्थित है। यह कूटनीतिक सफलता भारत की रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने के साथ-साथ एक सुरक्षित और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में उसके अपरिहार्य योगदान को भी प्रमाणित करती है।
क्या आप मानते हैं कि वासेनार अरेंजमेंट और MTCR जैसे बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण समूहों में भारत की सदस्यता ने NPT पर हस्ताक्षर किए बिना भी वैश्विक कूटनीति में भारत की स्थिति को पूरी तरह से वैध और सशक्त बना दिया है?