रूस-यूक्रेन युद्ध के भारत की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति पर पड़ने वाले प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें।

 Q. रूस-यूक्रेन युद्ध के भारत की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति पर पड़ने वाले प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें।

Ans - 

भूमिका

फरवरी 2022 में प्रारंभ हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात यूरोप में सबसे बड़ा भू-राजनीतिक संकट है। यद्यपि यह भौगोलिक रूप से यूरोप तक सीमित है, किंतु इसके प्रकंपनों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), ऊर्जा बाज़ारों और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति को गहरे स्तर पर बाधित किया है। एक वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था और विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में, भारत भी इन झटकों से अछूता नहीं रहा है। इस युद्ध ने भारत के समक्ष जहाँ एक ओर 'खाद्य, ईंधन और उर्वरक' (Food, Fuel, and Fertilizer - 3Fs) का त्रिकोणीय संकट उत्पन्न किया, वहीं दूसरी ओर भारतीय विदेश नीति को अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) के कड़े परीक्षण से गुजरने के लिए विवश किया।

1. भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: चुनौतियाँ और अनुकूलन

युद्ध के परिणामस्वरूप भारतीय अर्थव्यवस्था को आयातित मुद्रास्फीति और राजकोषीय दबाव का सामना करना पड़ा, यद्यपि भारत ने रणनीतिक क्रय के माध्यम से इसे संतुलित भी किया।

क. आर्थिक चुनौतियाँ एवं नकारात्मक प्रभाव (Causes & Impacts)

  • आयातित मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटा (CAD): भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं का लगभग 85% आयात करता है। युद्ध के कारण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 14 वर्ष के उच्चतम स्तर तक पहुँच गईं, जिससे भारत के आयात बिल में भारी वृद्धि हुई और चालू खाता घाटा (CAD) पर दबाव पड़ा।

  • खाद्य तेल का संकट: भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 70% सूरजमुखी तेल (Sunflower Oil) यूक्रेन से तथा 20% रूस से आयात करता था। आपूर्ति बाधित होने से घरेलू बाज़ार में खाद्य तेल की कीमतों में तीव्र उछाल (Cost-push inflation) देखा गया।

  • उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान: रूस वैश्विक स्तर पर नाइट्रोजन, पोटाश और फॉस्फोरस उर्वरकों का एक प्रमुख निर्यातक है। ब्लैक सी (Black Sea) क्षेत्र में नाकाबंदी के कारण वैश्विक उर्वरक कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई, जिससे भारत का उर्वरक सब्सिडी बिल 2022-23 में बढ़कर 2.56 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया।

  • रक्षा आपूर्ति और SWIFT प्रतिबंध: भारत अपने रक्षा उपकरणों का लगभग 25% रूस से आयात करता है। पश्चिमी देशों द्वारा प्रमुख रूसी बैंकों को SWIFT प्रणाली से बाहर करने के कारण भारत के रक्षा सौदों के भुगतान में तकनीकी और वित्तीय बाधाएं उत्पन्न हुईं।

ख. भारत का रणनीतिक अनुकूलन (Solutions & Opportunities)

  • रियायती रूसी तेल का आयात: भारत ने पश्चिमी प्रतिबंधों (Sanctions) को दरकिनार करते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा और रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल का आयात कई गुना बढ़ा दिया, जिससे घरेलू स्तर पर मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में सहायता मिली।

  • उर्वरक कूटनीति: भारत ने त्वरित कूटनीतिक पहल करते हुए रूस से भारी छूट पर उर्वरकों का आयात सुनिश्चित किया, जिससे रूस भारत के लिए उर्वरकों का शीर्ष आपूर्तिकर्ता बन गया।

  • कृषि निर्यात में उछाल: ब्लैक सी रूट बाधित होने से वैश्विक बाज़ार में गेहूं की कमी हुई। आरंभिक चरण में भारतीय गेहूं निर्यातकों (मुख्यतः राजस्थान, यूपी और गुजरात) को इसका लाभ मिला और कृषि निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई।

2. भारत की विदेश नीति पर प्रभाव: 'रणनीतिक स्वायत्तता' का प्रकटीकरण

इस संघर्ष ने भारत की विदेश नीति को 'गुटनिरपेक्षता' से आगे ले जाकर 'बहु-पक्षीय संलग्नता' (Multi-alignment) के एक परिपक्व चरण में स्थापित कर दिया है।

  • राष्ट्रीय हित बनाम पश्चिमी दबाव: भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में रूस के विरुद्ध लाए गए कई प्रस्तावों से खुद को अलग (Abstain) रखा। यह निर्णय रूस के साथ ऐतिहासिक रक्षा व ऊर्जा संबंधों को बचाने तथा यूरेशियन भू-राजनीति में संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक था।

  • 'ब्रिज-बिल्डर' (Bridge-Builder) की भूमिका: भारत ने क्वाड (Quad) के माध्यम से अमेरिका व पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंध प्रगाढ़ किए, वहीं SCO और ब्रिक्स (BRICS) में रूस के साथ मंच साझा किया।

  • ग्लोबल साउथ की आवाज़: भारत ने G-20 अध्यक्षता के दौरान यह स्पष्ट किया कि विकसित देशों के युद्ध का सर्वाधिक दंश विकासशील देशों (Global South) को 3Fs संकट के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

  • शांति और कूटनीति का संदेश: प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य कि "यह युग युद्ध का नहीं है" (This is not an era of war), भारत की शांति-समर्थक छवि और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

3. बिहार के विशेष संदर्भ में प्रभाव 

एक कृषि-प्रधान और श्रम-बहुल राज्य होने के नाते बिहार पर इस वैश्विक संकट का प्रत्यक्ष व परोक्ष प्रभाव पड़ा:

  • कृषि लागत एवं उर्वरक सुरक्षा: बिहार की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है (मुख्यतः धान और गेहूं)। वैश्विक स्तर पर यूरिया और DAP की कीमतों में उछाल से बिहार के किसानों पर सीधा खतरा था। हालाँकि, केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी का बोझ उठाने और 'एक देश एक उर्वरक' (One Nation One Fertiliser - PMBJP) योजना के तहत 'भारत' ब्रांड से आपूर्ति सुनिश्चित करने के कारण बिहार के किसानों को सीधे मूल्य-वृद्धि के आघात से बचा लिया गया।

  • 'पीली क्रांति' (Yellow Revolution) की संभावना: यूक्रेन से सूरजमुखी तेल के आयात में आई कमी ने घरेलू तिलहन उत्पादन की आवश्यकता को बल दिया। बिहार के कृषि-जलवायु क्षेत्र (विशेषकर तिरहुत और कोसी क्षेत्र) में सरसों (Mustard) की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल परिस्थितियां उत्पन्न हुईं।

  • मुद्रास्फीति और ग्रामीण उपभोग: कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण माल ढुलाई (Freight charges) महंगी हुई, जिससे बिहार में दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ीं। इसका सीधा प्रभाव राज्य के ग्रामीण परिवारों और प्रवासी श्रमिकों से प्राप्त होने वाले प्रेषण (Remittances) की वास्तविक क्रय शक्ति (Real Purchasing Power) पर पड़ा।

निष्कर्ष एवं आगे की राह

रूस-यूक्रेन संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भूमंडलीकृत विश्व में भू-राजनीतिक तनावों के आर्थिक परिणाम सीमाओं तक सीमित नहीं रहते। भारत ने अपनी कूटनीतिक परिपक्वता और आर्थिक सुदृढ़ता का परिचय देते हुए इस संकट को सफलतापूर्वक प्रबंधित किया है।

आगे की राह (Way Forward):

  1. रक्षा स्वदेशीकरण: 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत आयात निर्भरता को कम करते हुए घरेलू रक्षा विनिर्माण (Defence Corridors) को तीव्र गति से बढ़ाना आवश्यक है।

  2. खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता: 'राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- पाम ऑयल' (NMEO-OP) की तर्ज पर बिहार सहित अन्य राज्यों में तिलहन उत्पादन के लिए विशेष पैकेज दिए जाने चाहिए।

  3. वित्तीय विविधीकरण (De-dollarization): रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण और 'रुपया-रूबल' जैसे वैकल्पिक भुगतान तंत्रों को संस्थागत रूप देना होगा ताकि भविष्य के प्रतिबंधों से बचा जा सके।

संक्षेप में, भारत ने इस महासंकट का उपयोग अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' को मजबूत करने और वैश्विक मंच पर एक 'जिम्मेदार वैश्विक शक्ति' (Responsible Global Power) के रूप में स्वयं को स्थापित करने के अवसर के रूप में किया है।

🛍️ ऑनलाइन शॉपिंग करें
Amazon, Flipkart, Myntra और AJIO पर खरीदारी करें
यहाँ से खरीदारी करने पे एक्स्ट्रा डिस्काउंट मिल सकता है।
Next Post Previous Post
हमसे जुड़ें
1