शॉर्ट नोट्सः नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की भूमिका।

 Q. शॉर्ट नोट्सः नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की भूमिका।

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भारतीय संविधान के भाग V के अनुच्छेद 148 से 151 तक भारत के 'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' (Comptroller and Auditor General - CAG) के स्वतंत्र पद का प्रावधान किया गया है। संविधान सभा में डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने सीएजी को "संविधान के अधीन सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी" (Most important officer under the Constitution) की संज्ञा दी थी। सीएजी राष्ट्रीय वित्त का संरक्षक (Guardian of the public purse) है और इसका प्राथमिक कार्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्यपालिका (Executive), विधायिका (Legislature) की स्पष्ट अनुमति के बिना सार्वजनिक धन का न तो संग्रह करे और न ही व्यय करे।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की बहुआयामी भूमिका

वित्तीय और प्रशासनिक जवाबदेही

  • संचित निधि और आकस्मिकता निधि का ऑडिट: सीएजी भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India), प्रत्येक राज्य की संचित निधि, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी आकस्मिकता निधियों (Contingency Funds) से होने वाले व्यय की लेखापरीक्षा करता है।

  • अनुपालन और औचित्य लेखापरीक्षा (Compliance and Propriety Audit): सीएजी केवल इस बात की जांच नहीं करता कि व्यय वैधानिक रूप से अधिकृत है या नहीं (Compliance), बल्कि वह व्यय की बुद्धिमत्ता (Wisdom), निष्ठा (Faithfulness) और मितव्ययिता (Economy) का भी गहन मूल्यांकन करता है (Propriety)।

  • सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) का मूल्यांकन: केंद्र और राज्य सरकारों के स्वामित्व वाली कंपनियों, निगमों और सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाले स्वायत्त निकायों के खातों का भी सीएजी द्वारा ऑडिट किया जाता है।

  • मार्गदर्शक की भूमिका: सीएजी संसद और राज्य विधानमंडलों की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee - PAC) के 'मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक' (Friend, Philosopher, and Guide) के रूप में कार्य करता है और समिति को तकनीकी सहायता प्रदान करता है।

बिहार के विशेष संदर्भ में भूमिका (Role in the Context of Bihar)

राज्य स्तर पर वित्तीय सुचिता (Financial Probity) और पारदर्शिता स्थापित करने में सीएजी की रिपोर्ट अत्यंत निर्णायक होती है।

  • योजनागत व्यय का ऑडिट: बिहार सरकार द्वारा चलाई जा रही महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं और ढांचागत परियोजनाओं का ऑडिट सीएजी द्वारा ही किया जाता है।

  • विकेंद्रीकृत शासन का मूल्यांकन: सीएजी पटना और बिहार के सभी जिलों में लागू की जा रही योजनाओं—जैसे ग्रामीण पेयजल परियोजनाएं, 'सात निश्चय योजना' और पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) तथा नगर निकायों को प्राप्त होने वाले वित्तीय अनुदानों—का ऑडिट करता है।

  • यह सुनिश्चित करता है कि राज्य के शहरी केंद्रों से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक वित्तीय संसाधनों का रिसाव (Leakage) न हो और लक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। सीएजी की रिपोर्ट बिहार विधानमंडल पटल पर प्रस्तुत की जाती है, जिससे स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही तय होती है।

सीएजी की प्रभावशीलता में निहित चुनौतियाँ

  • शव-परीक्षण प्रकृति (Post-Mortem Nature): सीएजी का ऑडिट व्यय हो जाने के पश्चात (Ex-post facto) होता है। यह वित्तीय अनियमितताओं को पूर्व में रोकने (Preventive) के बजाय केवल उनका बाद में उद्घाटन करता है।

  • गुप्त सेवा व्यय (Secret Service Expenditure): राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गुप्त व्यय के मामले में सीएजी की ऑडिट शक्तियाँ अत्यंत सीमित हैं। वह व्यय के विवरण की मांग नहीं कर सकता और उसे केवल सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी के प्रमाण पत्र पर निर्भर रहना पड़ता है।

  • निजी-सार्वजनिक भागीदारी (PPP) मॉडल: वर्तमान उदारीकृत अर्थव्यवस्था में अवसंरचना विकास पीपीपी मॉडल पर हो रहा है, जहाँ निजी ठेकेदारों और निकायों के पूर्ण वित्तीय खातों तक सीएजी की पहुंच एक विधिक चुनौती बनी हुई है।

आगे की राह (Way Forward)

बदलती आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था में सीएजी की भूमिका केवल पारंपरिक 'बही-खातों की जांच' तक सीमित नहीं रह गई है। आधुनिक समय की आवश्यकताओं को देखते हुए सीएजी ने परफॉर्मेन्स ऑडिट (Performance Audit) और पर्यावरणीय ऑडिट (Environmental Audit) जैसे नए प्रतिमान अपनाए हैं।

'सुशासन' (Good Governance) और 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सीएजी के तंत्र को ई-ऑडिटिंग (e-Auditing), बिग डेटा एनालिटिक्स (Big Data Analytics) और ब्लॉकचेन तकनीक से सुसज्जित किया जाना चाहिए। इससे व्यय की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी और भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में वित्तीय पारदर्शिता अपने उच्चतम स्तर को प्राप्त कर सकेगी।

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