शॉर्ट नोट्सः जलवायु स्मार्ट कृषि (Climate Smart Agriculture)।

 Q. शॉर्ट नोट्सः जलवायु स्मार्ट कृषि (Climate Smart Agriculture)।

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खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, जलवायु स्मार्ट कृषि (Climate Smart Agriculture - CSA) एक ऐसा समेकित और बहुआयामी दृष्टिकोण है, जो कृषि प्रणालियों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल बनाने तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में असिंचित क्षेत्रों में कृषि आय में 20-25% तक की गिरावट आ सकती है, जो इस अवधारणा को समकालीन कृषि नीति का अनिवार्य अंग बनाता है।

जलवायु स्मार्ट कृषि के तीन मुख्य स्तंभ (Pillars)

  • उत्पादकता (Productivity): कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में सतत और न्यायसंगत वृद्धि करना।

  • अनुकूलन (Adaptation): चरम मौसमी घटनाओं (सूखा, बाढ़, हीटवेव) के प्रति फसलों और किसानों की सहनशीलता (Resilience) बढ़ाना।

  • शमन (Mitigation): कृषि क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैसों (GHGs), विशेषकर मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करना।

क्रियान्वयन की रणनीतियाँ (How it works)

  • सहिष्णु बीजों का उपयोग (Resilient Varieties): सूखा, जलजमाव और लवणता रोधी बीजों का प्रयोग। (उदाहरण: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए 'स्वर्ण सब-1' धान की किस्म)।

  • संरक्षण कृषि (Conservation Agriculture): जीरो टिलेज (Zero Tillage), फसल चक्र (Crop Rotation), फसल विविधीकरण (Crop Diversification) और मल्चिंग के माध्यम से मृदा के जैविक कार्बन को सुरक्षित रखना।

  • सटीक कृषि (Precision Farming): 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (Per Drop More Crop) की तर्ज पर सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) का उपयोग और सेंसर-आधारित पोषक तत्व प्रबंधन (मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुरूप)।

  • समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System): कृषि के साथ-साथ पशुपालन, मछली पालन और वानिकी को अपनाना, ताकि जलवायु जोखिमों का विविधीकरण (Risk Diversification) किया जा सके।

बिहार के परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिकता और पहल

बिहार की भू-आकृतिक संरचना इसे उत्तर में विनाशकारी बाढ़ और दक्षिण में गंभीर सूखे की दोहरी मार के प्रति अत्यंत संवेदनशील बनाती है। राज्य की लगभग 76% आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है, इसलिए यहाँ CSA केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आर्थिक उत्तरजीविता की अनिवार्यता है।

  • चौथा कृषि रोडमैप (2023-28): राज्य सरकार ने अपने नवीनतम कृषि रोडमैप में जलवायु अनुकूल कृषि (Climate Resilient Agriculture - CRA) कार्यक्रम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, जिसके लिए विशेष बजट आवंटित किया गया है।

  • जल-जीवन-हरियाली अभियान: यह जल संरक्षण, वनीकरण और पारंपरिक जल स्रोतों (आहर-पाइन प्रणाली) के जीर्णोद्धार की दिशा में एक राष्ट्रीय स्तर पर सराही गई पहल है।

  • व्यापक विस्तार की आवश्यकता: जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए यह नितांत आवश्यक है कि मौसम पूर्वानुमान की पूर्व चेतावनी प्रणालियों (Early Warning Systems), कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs) और सौर-ऊर्जा चालित सिंचाई अवसंरचना का विस्तार पटना और सभी बिहार के जिलों में संस्थागत और समान रूप से किया जाए, ताकि हर क्षेत्र का किसान जलवायु परिवर्तन के झटकों का सामना कर सके।

मार्ग की प्रमुख चुनौतियाँ

  • संस्थागत ऋण और पूंजी का अभाव: छोटे और सीमांत किसानों (Marginal Farmers) के पास नई तकनीकों को अपनाने के लिए आवश्यक प्रारंभिक पूंजी की कमी होती है।

  • तकनीकी जागरूकता: ग्रामीण स्तर पर आधुनिक डिजिटल कृषि उपकरणों और एग्रो-मेट एडवाइजरी (कृषि-मौसम सलाह) की पहुंच और समझ का अभाव।

आगे की राह

जलवायु स्मार्ट कृषि भारत और विशेषकर बिहार में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे वैज्ञानिक मार्ग है। इसे सफल बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) और त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के माध्यम से क्षमता निर्माण (Capacity Building) पर जोर देना होगा। साथ ही, कृषि अनुसंधान में निवेश (R&D) बढ़ाकर और 'राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन' (NMSA) के साथ राज्य की नीतियों का तालमेल बिठाकर सतत विकास लक्ष्यों (SDG-2: शून्य भुखमरी और SDG-13: जलवायु कार्रवाई) को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।

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