शॉर्ट नोट्स: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)।

 Q. शॉर्ट नोट्स: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)।

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डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): भारत का तकनीकी परिदृश्य और सुशासन

भूमिका

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) उन मूलभूत डिजिटल प्रणालियों और नेटवर्कों का समूह है, जो समाज में सुरक्षित, पारदर्शी और कुशल सार्वजनिक तथा निजी सेवाओं के वितरण को सक्षम बनाता है। भारत ने 'इंडिया स्टैक' (India Stack) के माध्यम से वैश्विक पटल पर DPI का एक अत्यंत सफल और अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है। हाल ही में, भारत की G-20 अध्यक्षता के दौरान अपनाए गए 'नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन' में भी DPI को 'ग्लोबल साउथ' (Global South) के देशों में वित्तीय समावेशन, सतत विकास और सेवा वितरण के एक प्रमुख साधन के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रदान की गई है।

DPI के प्रमुख स्तंभ एवं कार्यप्रणाली

भारत का DPI मुख्य रूप से तीन मूलभूत स्तंभों पर आधारित है, जो एक-दूसरे के पूरक के रूप में कार्य करते हैं:

  • डिजिटल पहचान (Digital Identity): आधार (Aadhaar) प्रणाली के माध्यम से 1.3 बिलियन से अधिक नागरिकों को एक विशिष्ट और सत्यापन योग्य डिजिटल पहचान प्रदान की गई है, जो सभी नागरिक सेवाओं का प्रवेश द्वार है।

  • डिजिटल भुगतान प्रणाली (Digital Payments): यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने भारत को रियल-टाइम डिजिटल भुगतान में विश्व का अग्रणी राष्ट्र बना दिया है। यह प्रणाली अंतर-संचालनीयता (Interoperability) सुनिश्चित कर सुरक्षित और त्वरित वित्तीय लेन-देन को सक्षम बनाती है।

  • डेटा साझाकरण तंत्र (Data Exchange): डिजिलॉकर (DigiLocker) और 'अकाउंट एग्रीगेटर' (Account Aggregator) फ्रेमवर्क नागरिकों को अपने व्यक्तिगत डेटा पर नियंत्रण रखने और सहमति-आधारित सुरक्षित साझाकरण (Consent-based sharing) की वैधानिक सुविधा प्रदान करते हैं।

शासन और अर्थव्यवस्था पर DPI का प्रभाव

  • पारदर्शिता एवं भ्रष्टाचार में कमी: जन-धन, आधार और मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) ने बिचौलियों को समाप्त कर दिया है। इससे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में होने वाले लीकेज (Leakage) पर प्रभावी अंकुश लगा है।

  • वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion): बिना बैंकिंग सुविधा वाले दूरदराज के क्षेत्रों को भी मुख्यधारा की औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया है, जिससे सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSMEs) के लिए ऋण तक पहुंच आसान हुई है।

  • सार्वजनिक सेवाओं में नवाचार: ओपन API (Application Programming Interface) ने स्वास्थ्य क्षेत्र में को-विन (CoWIN)आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और शिक्षा क्षेत्र में दीक्षा (DIKSHA) जैसे प्लेटफार्मों के त्वरित विकास को गति दी है।

बिहार के परिप्रेक्ष्य में DPI की भूमिका

बिहार जैसे राज्य में, जहाँ अंतिम छोर (Last-mile) तक कुशल सेवा वितरण सतत विकास की पूर्वशर्त है, DPI ने प्रशासनिक तंत्र में आमूलचूल परिवर्तन किए हैं। पटना और बिहार के सभी जिलों में लोक सेवाओं के अधिकार (RTPS) पोर्टल, मेधासॉफ्ट (Medhasoft) और ई-कल्याण योजनाओं का निर्बाध एवं पारदर्शी संचालन DPI की इसी मजबूत अवसंरचना के कारण संभव हो पाया है। इसके माध्यम से कृषि इनपुट सब्सिडी, बाढ़ राहत अनुदान और छात्रवृत्ति की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में त्वरित रूप से पहुँच रही है, जिससे शासन में जवाबदेही और जन-विश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

विद्यमान चुनौतियाँ

  • डिजिटल डिवाइड (Digital Divide): ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, स्मार्टफोन की उपलब्धता और डिजिटल साक्षरता में भारी अंतराल (Gap) आज भी विद्यमान है।

  • साइबर सुरक्षा और डेटा निजता: डिजिटल लेन-देन के विस्तार के साथ-साथ साइबर हमलों, वित्तीय धोखाधड़ी और व्यक्तिगत डेटा की चोरी (Data Breach) का जोखिम एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती बन गया है।

आगे की राह (Way Forward)

  1. डिजिटल साक्षरता का विकेंद्रीकरण: पंचायती राज संस्थाओं के सहयोग से लक्षित और जमीनी स्तर पर स्थानीय भाषाओं में डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को वृहद् रूप से संचालित किया जाना चाहिए।

  2. कानूनी एवं संस्थागत सुदृढ़ीकरण: डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, 2023 का सख्त और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर एक सुरक्षित डेटा इकोसिस्टम का निर्माण किया जाना आवश्यक है।

अंतिम विचार

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) केवल एक तकनीकी अवसंरचना मात्र नहीं है, बल्कि 21वीं सदी के भारत में यह सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र और सुशासन का एक सशक्त साधन है। यदि साइबर सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता से जुड़ी ढांचागत बाधाओं को रणनीतिक रूप से दूर कर लिया जाए, तो भारत का यह मॉडल न केवल देश को एक विकसित ज्ञान-अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करेगा, बल्कि वैश्विक पटल पर भारत की 'तकनीकी कूटनीति' (Tech Diplomacy) को भी अजेय बना देगा।

क्या आप मानते हैं कि DPI के वर्तमान ढांचे में क्षेत्रीय भाषाओं (Local Languages) के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वॉयस-इंटरफेस (Voice-based interfaces) का एकीकरण करने से ग्रामीण डिजिटल साक्षरता की समस्या का एक त्वरित और स्थायी समाधान निकल सकता है?

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