G-20 शिखर सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता के प्रमुख परिणामों और विश्व मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका की चर्चा करें।
Q. G-20 शिखर सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता के प्रमुख परिणामों और विश्व मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका की चर्चा करें।
Ans -
भूमिका
वर्ष 2023 में भारत द्वारा आयोजित 18वां G-20 शिखर सम्मेलन देश के कूटनीतिक इतिहास में एक युगांतरकारी घटना सिद्ध हुआ। 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य) के ध्येय वाक्य के साथ भारत ने अपनी अध्यक्षता को जन-केंद्रित (People's G20) और समावेशी बनाया। भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण (विशेषकर रूस-यूक्रेन संघर्ष) और वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में, भारत ने सर्वसम्मति से 'नई दिल्ली लीडर्स घोषणापत्र' (New Delhi Leaders' Declaration) पारित करवाकर बहुपक्षीय कूटनीति में अपनी अद्वितीय क्षमता का परिचय दिया। इसने भारत को केवल एक विकासशील शक्ति के रूप में ही नहीं, बल्कि 'विश्व मित्र' और 'ग्लोबल साउथ की मुखर आवाज' के रूप में स्थापित किया।
1. G-20 की भारतीय अध्यक्षता के प्रमुख परिणाम (Key Outcomes)
भारत की अध्यक्षता केवल औपचारिक सम्मेलनों तक सीमित न रहकर ठोस, नीतिगत और दूरगामी परिणामों पर केंद्रित रही:
क. अफ्रीकी संघ (African Union) का स्थायी समावेश
भारत की पहल पर 55 देशों के संघ 'अफ्रीकी संघ' (AU) को G-20 का 21वां स्थायी सदस्य बनाया गया।
यह कदम वैश्विक शासन संरचना में ऐतिहासिक सुधार और विकासशील देशों को वास्तविक प्रतिनिधित्व प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ।
ख. नई दिल्ली घोषणापत्र पर 100% सर्वसम्मति
भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, भारत ने 83 पैराग्राफ वाले साझा घोषणापत्र पर पूर्ण सहमति प्राप्त की।
इसमें बिना किसी 'चेयर समरी' (Chair Summary) या फुटनोट के जटिल भू-राजनीतिक मुद्दों और विकासात्मक प्राथमिकताओं पर आम सहमति बनी।
ग. भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC)
शिखर सम्मेलन के इतर India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) की ऐतिहासिक घोषणा की गई।
यह गलियारा बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क को बढ़ावा देने के साथ-साथ 'चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI)' का एक पारदर्शी और संधारणीय विकल्प प्रस्तुत करता है।
घ. वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (Global Biofuels Alliance - GBA)
भारत, अमेरिका और ब्राजील के नेतृत्व में GBA की स्थापना हुई।
इसका उद्देश्य जैव ईंधन के वैश्विक व्यापार को सुगम बनाना, सतत जैव ऊर्जा को बढ़ावा देना और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना है।
ङ. डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure - DPI)
भारत के 'इंडिया स्टैक' (Aadhaar, UPI, DigiLocker) को वित्तीय समावेशन और शासन सुधार के वैश्विक मानक मॉडल के रूप में मान्यता मिली।
G-20 ने विकासशील देशों के लिए डिजिटल डिवाइड पाटने हेतु DPI फ्रेमवर्क को सर्वसम्मति से स्वीकार किया।
च. बहुपक्षीय विकास बैंकों (MDBs) में सुधार
एन. के. सिंह समिति (G20 Independent Expert Group on Strengthening MDBs) की सिफारिशों के आधार पर विश्व बैंक और IMF जैसे संस्थानों को 21वीं सदी की जलवायु और विकासात्मक चुनौतियों के अनुकूल बनाने पर सहमति बनी।
छ. ग्रीन डेवलपमेंट पैक्ट और LiFE मिशन
प्रधानमंत्री के 'Mission LiFE' (Lifestyle for Environment) को वैश्विक सतत विकास नीतियों का केंद्र बनाया गया।
वर्ष 2030 तक वैश्विक स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने का संकल्प लिया गया।
2. विश्व मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका का विश्लेषण
G-20 की सफल अध्यक्षता ने वैश्विक व्यवस्था में भारत की रणनीतिक स्थिति को नए आयाम दिए हैं:
ग्लोबल साउथ के स्वाभाविक नेता के रूप में: भारत ने विकासशील और अल्पविकसित देशों के ऋण संकट, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी हस्तांतरण के मुद्दों को पश्चिमी शक्तियों के समक्ष प्रमुखता से उठाया।
भू-राजनीतिक मध्यस्थ और संतुलनकर्ता (Strategic Bridge-Builder): पश्चिमी देशों और 'रूस-चीन धुरी' के बीच गहरे अविश्वास के बावजूद भारत ने तटस्थ और नियम-आधारित व्यवस्था की वकालत करते हुए वार्ता का मंच प्रदान किया।
नियम-निर्माता (Rule-Maker) की भूमिका: भारत पारंपरिक 'नियम-अनुयायी' (Rule-Taker) की स्थिति से निकलकर जलवायु (ISA, CDRI, GBA) और डिजिटल गवर्नेंस में वैश्विक नियम-निर्माता की भूमिका में आ चुका है।
लोकतांत्रिक व समावेशी कूटनीति: G-20 की 200 से अधिक बैठकों को देश के लगभग 60 शहरों में आयोजित कर भारत ने कूटनीति का विकेंद्रीकरण किया और अपनी संघीय ताकत का प्रदर्शन किया।
3. बिहार के संदर्भ में प्रासंगिकता एवं लाभ
G-20 का प्रभाव राष्ट्रीय सीमाओं के साथ-साथ राज्यों के स्तर पर भी स्पष्ट रूप से देखा गया:
श्रम 20 (L20) शिखर बैठक का आयोजन: जून 2023 में पटना में G-20 के अंतर्गत Labour 20 (L20) शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन हुआ। इसमें वैश्विक श्रम बाजार, सामाजिक सुरक्षा और विशेष रूप से 'गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्कर्स' (Gig Economy) के अधिकारों पर मंथन हुआ, जो बिहार जैसे श्रम-बहुल राज्य के लिए नीतिगत दृष्टि से अत्यंत प्रासंगिक है।
विरासत और पर्यटन को वैश्विक मंच: विदेशी प्रतिनिधियों के समक्ष नालंदा महाविहार (प्राचीन ज्ञान केंद्र), बोधगया, तथा बिहार की समृद्ध लोक कलाओं—मधुबनी पेंटिंग, मंजूषा कला और सिक्की शिल्प का प्रदर्शन किया गया, जिससे राज्य के पर्यटन और स्थानीय हथकरघा उद्योग को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली।
निवेश और विकास की संभावनाएं: राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल साक्षरता और एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chains) से जोड़ने के नए अवसर सृजित हुए।
निष्कर्ष एवं आगे की राह
G-20 की अध्यक्षता ने यह सिद्ध कर दिया है कि 21वीं सदी की बहुध्रुवीय व्यवस्था में भारत को दरकिनार कर किसी भी वैश्विक समस्या का समाधान संभव नहीं है। भारत ने "समस्या के हिस्से" के बजाय "समाधान के स्रोत" के रूप में अपनी छवि गढ़ी है।
आगे की राह:
घोषणाओं का क्रियान्वयन: IMEC, GBA और MDBs सुधारों की प्रतिबद्धताओं को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारना।
संस्थागत सुधारों पर निरंतर दबाव: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता और वैश्विक वित्तीय संस्थानों के लोकतांत्रिकरण की मांग को सशक्त बनाए रखना।
स्थानीयकरण (Localization): G-20 से प्राप्त कूटनीतिक लाभों को बिहार जैसे राज्यों के औद्योगिक, कृषि और मानव संसाधन विकास से सीधे जोड़ना।
अंततः, भारत की G-20 अध्यक्षता केवल एक कूटनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि 'अमृत काल' में भारत के विश्वगुरु और एक उत्तरदायी वैश्विक महाशक्ति बनने की दिशा में एक निर्णायक प्रस्थान बिंदु रही है।
