शॉर्ट नोट्सः राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP)।

 Q. शॉर्ट नोट्सः राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP)।

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बुनियादी ढांचे के विकास के लिए नवीन पूंजी जुटाने की दिशा में, भारत सरकार और नीति आयोग द्वारा अगस्त 2021 में 'राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन' (National Monetisation Pipeline - NMP) की शुरुआत की गई। यह 'परिसंपत्ति मुद्रीकरण के माध्यम से परिसंपत्ति निर्माण' (Asset Creation through Monetisation) के विजन पर आधारित एक चार वर्षीय (वित्त वर्ष 2022-2025) योजना है, जिसका लक्ष्य केंद्र सरकार की मौजूदा ब्राउनफील्ड (Brownfield) संपत्तियों के मुद्रीकरण से ₹6.0 लाख करोड़ की राशि जुटाना है।

NMP की कार्यप्रणाली और प्रमुख विशेषताएं

  • स्वामित्व का प्रतिधारण (Retention of Ownership): यह प्रत्यक्ष निजीकरण (Privatization) नहीं है। संपत्तियों का मालिकाना हक सरकार के पास ही रहेगा और निर्धारित अवधि के बाद संपत्ति वापस सरकार को सौंप दी जाएगी।

  • ब्राउनफील्ड संपत्तियों पर फोकस: केवल उन संपत्तियों (जैसे- राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे स्टेशन, पावर ट्रांसमिशन लाइनें, टेलीकॉम टावर) का मुद्रीकरण किया जा रहा है, जो पहले से निर्मित हैं और नियमित राजस्व उत्पन्न कर रही हैं।

  • वित्तीय और संस्थागत उपकरण: इस प्रक्रिया को मुख्य रूप से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।

  • NIP के साथ एकीकरण: NMP के तहत प्राप्त राजस्व का उपयोग राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (National Infrastructure Pipeline - NIP) के तहत नई (Greenfield) परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाएगा।

NMP की आवश्यकता क्यों? (औचित्य)

  • राजकोषीय दबाव को कम करना: कल्याणकारी योजनाओं और कल्याणकारी दायित्वों के कारण राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) पर बढ़ते दबाव के चलते, बुनियादी ढांचे के लिए पारंपरिक बजटीय आवंटन सीमित है।

  • निजी क्षेत्र की दक्षता का लाभ: परिसंपत्तियों के संचालन और रखरखाव (Operation & Maintenance) में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता का लाभ उठाकर उनकी उपयोगिता (Efficiency) को अधिकतम करना।

  • निष्क्रिय संपत्तियों का दोहन: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की कम उपयोग की जाने वाली या निष्क्रिय संपत्तियों से मूल्य सृजन (Value Unlocking) करना।

संभावित चुनौतियाँ और जोखिम

  • एकाधिकार (Monopoly) का खतरा: कुछ बड़े कॉर्पोरेट घरानों द्वारा संपत्तियों के भारी अधिग्रहण से बाजार में एकाधिकार की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे अंतिम उपभोक्ताओं (End Consumers) के लिए सेवाएं महंगी हो सकती हैं।

  • संपत्तियों का सटीक मूल्यांकन: ऐतिहासिक संपत्तियों के उचित बाजार मूल्य और भविष्य के राजस्व का सटीक आकलन करना एक जटिल वित्तीय प्रक्रिया है।

  • नियामक ढांचा और विवाद: मजबूत और स्वतंत्र नियामकों (Independent Regulators) के अभाव में निजी निवेशकों और सरकार के बीच राजस्व साझाकरण को लेकर विवाद (Dispute) उत्पन्न होने की प्रबल संभावना है।

बिहार के संदर्भ में प्रासंगिकता और रणनीतिक एकीकरण

राष्ट्रीय स्तर पर जुटाई गई यह पूंजी बिहार जैसे राज्यों के ढांचागत और औद्योगिक विकास के लिए एक 'गेम चेंजर' सिद्ध हो सकती है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों (NHAI), रेलवे स्टेशनों और ऊर्जा ग्रिड जैसी केंद्रीय संपत्तियों के मुद्रीकरण से प्राप्त राजस्व का उपयोग राज्य के भीतर नई बुनियादी अवसंरचना के निर्माण में किया जाना चाहिए।

यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि NMP के माध्यम से उत्पन्न पूंजी का पुनर्निवेश केवल भारत के कुछ विकसित औद्योगिक गलियारों या महानगरों तक सीमित न रहे। क्षेत्रीय आर्थिक विषमताओं को दूर करने के लिए, इस पूंजी का रणनीतिक उपयोग पटना और सभी बिहार के जिलों में विश्व स्तरीय एक्सप्रेसवे, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और ग्रीनफील्ड औद्योगिक केंद्र विकसित करने में किया जाना चाहिए, ताकि राज्य को राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला (National Supply Chain) से निर्बाध रूप से जोड़ा जा सके।

आगे की राह

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन भारत की अवसंरचनात्मक कमियों (Infrastructure Deficit) को दूर करने के लिए एक साहसिक और अभिनव नीतिगत कदम है। इसकी वास्तविक सफलता के लिए केलकर समिति (Kelkar Committee) की सिफारिशों के अनुरूप PPP अनुबंधों (Contracts) को अधिक लचीला और जोखिम-साझाकरण (Risk-sharing) के प्रति संतुलित बनाना होगा।

इसके अतिरिक्त, एक समर्पित 'राष्ट्रीय अवसंरचना नियामक' की स्थापना की जानी चाहिए जो विवादों का त्वरित निपटारा कर सके। यह भी वैधानिक रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मुद्रीकरण से प्राप्त राजस्व का कड़ाई से केवल पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के लिए उपयोग हो, ताकि यह योजना भारत को $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने में निर्णायक उत्प्रेरक की भूमिका निभा सके।

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