'वृद्ध होती जनसंख्या' (Ageing Population) भारत के लिए भविष्य की एक बड़ी चुनौती है। विवेचना करें।
Q. 'वृद्ध होती जनसंख्या' (Ageing Population) भारत के लिए भविष्य की एक बड़ी चुनौती है। विवेचना करें।
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संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की 'इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023' के अनुसार, भारत वर्तमान में एक तीव्र जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) से गुजर रहा है। वर्ष 2050 तक भारत में 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के बुजुर्गों की आबादी कुल जनसंख्या का 20.8% (लगभग 34.7 करोड़) होने का अनुमान है। यद्यपि वर्तमान में भारत अपने 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) का लाभ उठा रहा है, किंतु जीवन प्रत्याशा में वृद्धि और प्रजनन दर (TFR) में गिरावट के कारण भविष्य में 'वृद्ध होती जनसंख्या' (Ageing Population) एक जटिल सामाजिक-आर्थिक और प्रशासनिक चुनौती प्रस्तुत करेगी।
वृद्ध होती जनसंख्या के बहुआयामी प्रभाव एवं चुनौतियाँ
इस उभरती हुई चुनौती का सूक्ष्म-विश्लेषण PESTLE (राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, कानूनी और पर्यावरणीय) दृष्टिकोण के आधार पर किया जा सकता है:
1. आर्थिक चुनौतियाँ (Economic Impacts)
उच्च आश्रित अनुपात (High Dependency Ratio): कामकाजी उम्र की आबादी के सिकुड़ने से राष्ट्रीय उत्पादकता प्रभावित होगी तथा कार्यशील जनसंख्या पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
राजकोषीय बोझ (Fiscal Burden): स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा (पेंशन योजनाओं) के विस्तार से सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय दबाव उत्पन्न होगा, जो आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 की चेतावनियों के भी अनुरूप है।
2. सामाजिक एवं सांस्कृतिक चुनौतियाँ (Social Dynamics)
पारिवारिक संरचना का विघटन: संयुक्त परिवार प्रणाली के टूटने और एकल परिवारों के उदय से वृद्धों में सामाजिक अलगाव (Social Isolation), अवसाद और असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
वृद्धों का 'स्त्रीकरण' (Feminisation of Ageing): महिलाओं की जीवन प्रत्याशा पुरुषों की तुलना में अधिक होती है। इसके परिणामस्वरूप, वृद्ध विधवाओं की संख्या बढ़ रही है, जो अक्सर आर्थिक रूप से असुरक्षित और संपत्ति के अधिकारों से वंचित होती हैं।
3. स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी चिंताएँ (Healthcare Deficit)
जेरियाट्रिक देखभाल (Geriatric Care) का अभाव: भारत के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs/CHCs) में वृद्धों के लिए विशेष जेरियाट्रिक (Geriatric) वार्डों और प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की भारी कमी है।
गैर-संचारी रोग (NCDs): अल्जाइमर, डिमेंशिया, मधुमेह और हृदय रोगों जैसी गैर-संचारी बीमारियों का बढ़ता बोझ स्वास्थ्य ढांचे को चरमरा सकता है।
4. तकनीकी और अवसंरचनात्मक सीमाएँ (Technological & Infrastructural)
डिजिटल डिवाइड: ई-गवर्नेंस सेवाओं और डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के बीच, डिजिटल साक्षरता के अभाव में बुजुर्गों का वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने का जोखिम बढ़ गया है।
शहरी अवसंरचना: भारत का अधिकांश सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (परिवहन, भवन) सुगम्य भारत अभियान के बावजूद अभी भी वृद्ध-अनुकूल (Elderly-friendly) नहीं है।
विद्यमान नीतिगत पहल और संस्थागत ढांचा
| नीति/योजना | मुख्य उद्देश्य |
| माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम, 2007 | बच्चों और उत्तराधिकारियों द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाना। |
| अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY) | बुजुर्गों के लिए आश्रय, भोजन और स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने वाली एक समग्र योजना। |
| SAGE (Seniorcare Ageing Growth Engine) | बुजुर्ग देखभाल के क्षेत्र में नवाचार और स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करना। |
| SACRED पोर्टल | 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को रोजगार के अवसर प्रदान कर उनकी विशेषज्ञता का लाभ उठाना। |
आगे की राह (Way Forward)
इस चुनौती को अवसर में बदलने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है:
'सिल्वर इकॉनमी' (Silver Economy) को प्रोत्साहन: द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) के सुझावों के अनुरूप, सेवानिवृत्त पेशेवरों के ज्ञान और अनुभव (Experiential Dividend) का उपयोग परामर्श, शिक्षण और नीति निर्माण में किया जाना चाहिए।
यूनिवर्सल सोशल सिक्योरिटी: असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए सार्वभौमिक पेंशन कवरेज सुनिश्चित करना, ताकि वृद्धावस्था में आर्थिक स्वतंत्रता बनी रहे।
सामुदायिक आधारित देखभाल मॉडल: जापान के 'कम्युनिटी केयर' मॉडल की तर्ज पर स्थानीय स्वशासन (Panchayats) और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की भागीदारी से 'डे-केयर सेंटर' विकसित किए जाने चाहिए।
स्वास्थ्य ढांचे का उन्नयन: नीति आयोग की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रीय बुजुर्ग स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम (NPHCE) का आक्रामक विस्तार कर प्रत्येक जिला अस्पताल में अनिवार्य जेरियाट्रिक वार्ड स्थापित किए जाने चाहिए।
वृद्ध जनसंख्या केवल राज्य का एक आर्थिक दायित्व नहीं है, बल्कि यह अनुभव, ज्ञान और कौशल का एक समृद्ध भंडार है। सतत विकास लक्ष्यों (विशेषकर SDG 3: उत्तम स्वास्थ्य और SDG 10: असमानता में कमी) की प्राप्ति हेतु यह आवश्यक है कि वृद्धों के प्रति नीतिगत दृष्टिकोण को 'कल्याणकारी' (Welfare) से बदलकर 'सशक्तीकरण' (Empowerment) की ओर मोड़ा जाए। एक समावेशी और वृद्ध-अनुकूल समाज का निर्माण ही 'विकसित भारत 2047' और 'वसुधैव कुटुंबकम' के मूल विजन को वास्तविक अर्थों में चरितार्थ करेगा।