आर्द्रभूमि (Wetlands) के संरक्षण के लिए रामसर कन्वेंशन के महत्व की चर्चा करें।

 Q. आर्द्रभूमि (Wetlands) के संरक्षण के लिए रामसर कन्वेंशन के महत्व की चर्चा करें।

Ans - 

आर्द्रभूमियां (Wetlands) पृथ्वी के सबसे उत्पादक पारिस्थितिक तंत्रों में से हैं, जिन्हें उनके जल शोधन, भूजल पुनर्भरण और बाढ़ नियंत्रण गुणों के कारण 'भू-दृश्य के गुर्दे' (Kidneys of the landscape) कहा जाता है। रामसर कन्वेंशन (1971) एक अंतर-सरकारी पर्यावरणीय संधि है जो आर्द्रभूमियों और उनके संसाधनों के संरक्षण और 'बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग' (Wise Use) के लिए वैश्विक रूपरेखा प्रदान करती है। वर्तमान में भारत में 85 रामसर स्थल हैं, जो दक्षिण एशियाई क्षेत्र में सर्वाधिक हैं।

आर्द्रभूमि संरक्षण में रामसर कन्वेंशन का महत्व

रामसर कन्वेंशन केवल स्थलों की एक सूची नहीं है, बल्कि यह सदस्य देशों को सक्रिय संरक्षण के लिए कानूनी, तकनीकी और संस्थागत ढांचा प्रदान करता है:

1. वैचारिक और नीतिगत आधार (Policy & Conceptual Framework)

  • बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग का सिद्धांत: यह कन्वेंशन मानव विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करता है। यह सिखाता है कि संरक्षण का अर्थ पूर्ण प्रतिबंध नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए सतत उपयोग है।

  • राष्ट्रीय नीतियों का उत्प्रेरक: रामसर प्रतिबद्धताओं के ही परिणामस्वरूप भारत ने आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 और राष्ट्रीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण योजना (NPCA) जैसी महत्वपूर्ण नीतियां लागू कीं।

2. संकटग्रस्त पारिस्थितिकी की निगरानी (Montreux Record)

  • कन्वेंशन के तहत मोंट्रेक्स रिकॉर्ड उन आर्द्रभूमियों का रजिस्टर है जहाँ तकनीकी विकास, प्रदूषण या मानवीय हस्तक्षेप के कारण पारिस्थितिक तंत्र में गंभीर बदलाव आ रहे हैं।

  • भारत की लोकटक झील (मणिपुर) और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) इसके तहत सूचीबद्ध हैं, जिससे इन क्षेत्रों पर सरकारों का विशेष नीतिगत और वित्तीय ध्यान केंद्रित हुआ है।

3. जलवायु परिवर्तन शमन (Climate Resilience)

  • नीला कार्बन (Blue Carbon) सिंक: रामसर साइट्स (विशेषकर मैंग्रोव, समुद्री घास और पीटलैंड) स्थलीय वनों की तुलना में कार्बन को कई गुना अधिक प्रभावी ढंग से सोखती हैं, जो सतत विकास लक्ष्य (SDG) 13 (जलवायु कार्रवाई) की प्राप्ति में सीधे तौर पर सहायक है।

  • तटीय और आपदा सुरक्षा: भितरकनिका और सुंदरबन जैसी रामसर आर्द्रभूमियां समुद्री तूफानों और चक्रवातों के खिलाफ प्रथम प्राकृतिक रक्षा पंक्ति (First line of defense) का कार्य करती हैं।

4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (Global Cooperation)

  • यह कन्वेंशन ट्रांस-बाउंड्री आर्द्रभूमियों और सेंट्रल एशियन फ्लाईवे (Central Asian Flyway) जैसे प्रवासी पक्षियों के मार्गों के प्रबंधन के लिए सदस्य देशों के बीच डेटा साझाकरण और तकनीकी विशेषज्ञता को बढ़ावा देता है।

संरक्षण की दिशा में वर्तमान चुनौतियाँ

चुनौती का क्षेत्रविवरण
भूमि उपयोग में परिवर्तनअनियोजित शहरीकरण के कारण झीलों और दलदली भूमियों को रियल एस्टेट में बदला जा रहा है (जैसे चेन्नई और बेंगलुरु की झीलों का अतिक्रमण)।
प्रदूषण और गादऔद्योगिक अपशिष्ट और कृषि अपवाह के कारण जल निकायों में यूट्रोफिकेशन (Eutrophication) और ऑक्सीजन की कमी की गंभीर समस्या।
संस्थागत सीमाएंकई राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों (State Wetland Authorities) के पास नियम लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय और दंडात्मक शक्तियों का अभाव है।

भारत सरकार की हालिया 'अमृत धरोहर योजना' रामसर स्थलों के संरक्षण को जन-भागीदारी, ईको-टूरिज्म और स्थानीय आजीविका से जोड़कर एक अनुकरणीय वैश्विक मॉडल प्रस्तुत करती है। आर्द्रभूमियों को मात्र बंजर भूमि (Wastelands) समझने की औपनिवेशिक मानसिकता को पूर्णतः त्यागकर, इन्हें भारत की राष्ट्रीय पारिस्थितिक सुरक्षा ग्रिड के अभिन्न अंग के रूप में प्राथमिकता देना आवश्यक है। यह दृष्टिकोण न केवल भारत के 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE) के अनुरूप है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए सतत विकास के व्यापक लक्ष्य को भी चरितार्थ करता है।

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