भारत-बांग्लादेश संबंधों में तीस्ता नदी जल विवाद और सीमा प्रबंधन की चुनौतियों का विश्लेषण करें।

 Q. भारत-बांग्लादेश संबंधों में तीस्ता नदी जल विवाद और सीमा प्रबंधन की चुनौतियों का विश्लेषण करें।

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भारत-बांग्लादेश संबंध: तीस्ता विवाद और सीमा प्रबंधन का विश्लेषणात्मक अध्ययन

भारत और बांग्लादेश के मध्य ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक संबंधों की गहरी नींव है। भारत की 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) और 'एक्ट ईस्ट' (Act East) नीतियों के केंद्र में बांग्लादेश एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। दोनों देश 4096.7 किलोमीटर लंबी भूमि सीमा और 54 सीमा-पार नदियों को साझा करते हैं। वर्तमान में यह द्विपक्षीय संबंध अपने 'स्वर्णिम अध्याय' (Sonali Adhyay) में है, किंतु तीस्ता नदी जल विवाद और जटिल सीमा प्रबंधन इस रणनीतिक साझेदारी के समक्ष दो प्रमुख संरचनात्मक चुनौतियां बनी हुई हैं।

तीस्ता नदी जल विवाद: बहुआयामी विश्लेषण

तीस्ता नदी, जो सिक्किम से निकलकर पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है, दोनों देशों के लाखों किसानों की जीवनरेखा है। इस विवाद के विभिन्न आयाम (PESTLE दृष्टिकोण) निम्नलिखित हैं:

  • राजनीतिक और संवैधानिक गतिरोध (Political & Legal):

    • वर्ष 2011 में दोनों देशों के मध्य तीस्ता जल बंटवारे (42.5% भारत और 37.5% बांग्लादेश) पर एक मसौदा तैयार हुआ था।

    • भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची (राज्य सूची की प्रविष्टि 17) के तहत 'जल' एक राज्य का विषय है। पश्चिम बंगाल सरकार के विरोध के कारण, केंद्र सरकार अनुच्छेद 253 (अंतर्राष्ट्रीय संधियों को लागू करने की शक्ति) के बावजूद सहकारी संघवाद का सम्मान करते हुए इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर सकी है।

  • आर्थिक और कृषि प्रभाव (Economic & Social):

    • शुष्क मौसम का संकट: दिसंबर से मार्च के बीच तीस्ता के प्रवाह में भारी कमी आती है। पश्चिम बंगाल का उत्तरी भाग और बांग्लादेश का रंगपुर संभाग दोनों ही इस जल पर शीतकालीन कृषि (बोरो चावल) के लिए अत्यधिक निर्भर हैं।

    • जल के अभाव में दोनों ओर के कृषक समुदायों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा (सतत विकास लक्ष्य-2) प्रभावित हो रही है।

  • भू-रणनीतिक निहितार्थ (Geopolitical):

    • समझौते में देरी के कारण बांग्लादेश में चीन का प्रभाव बढ़ रहा है। चीन ने 1 बिलियन डॉलर के 'तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना' का प्रस्ताव रखा है।

    • यह परियोजना भारत के अत्यंत संवेदनशील 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' (Chicken's Neck) के निकट है, जो भारत के लिए गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएं उत्पन्न करता है।

सीमा प्रबंधन की प्रमुख चुनौतियाँ

भारत-बांग्लादेश सीमा विश्व की पांचवीं सबसे लंबी और अत्यंत जटिल (नदी, जंगल, पहाड़) सीमा है। इसकी पारगम्यता (Porous nature) के कारण उत्पन्न चुनौतियाँ इस प्रकार हैं:

  • अवैध प्रवासन और जनसांख्यिकीय परिवर्तन (Social & Demographic):

    • सीमा पार से होने वाले निरंतर अवैध प्रवासन ने भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों, विशेषकर असम और त्रिपुरा में जनसांख्यिकीय असंतुलन और संसाधन-संघर्ष को जन्म दिया है, जो आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है।

  • संगठित अपराध और तस्करी (Economic & Legal):

    • मवेशियों की तस्करी, जाली भारतीय मुद्रा (FICN), मानव तस्करी और मादक पदार्थों (जैसे 'याबा' टैबलेट) का अवैध व्यापार सीमावर्ती अर्थव्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को खोखला कर रहा है।

  • सीमावर्ती हत्याएं और मानवाधिकार चिंताएं (Diplomatic):

    • तस्करों और घुसपैठियों के खिलाफ सीमा सुरक्षा बल (BSF) की सख्त कार्रवाई के दौरान होने वाली मौतें बांग्लादेश में एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन जाती हैं, जो अक्सर भारत-विरोधी भावनाओं को भड़काती हैं।

  • भौगोलिक और ढांचागत सीमाएं (Technological & Environmental):

    • नदी तटीय क्षेत्रों (Riverine borders) और बाढ़-प्रवण इलाकों में स्थायी बाड़ लगाना (Fencing) अत्यंत दुष्कर है। नदियों के मार्ग बदलने से भी सीमांकन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है।

समाधान और संस्थागत तंत्र

भारत ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए हैं:

  • स्मार्ट सीमा प्रबंधन: भौतिक बाड़ की सीमाओं को दूर करने के लिए व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS) के तहत 'स्मार्ट फेंसिंग' (लेजर, रडार, और थर्मल सेंसर) का उपयोग किया जा रहा है (जैसे असम के धुबरी में BOLD-QIT परियोजना)।

  • समन्वित सीमा प्रबंधन योजना (CBMP): BSF और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के मध्य सूचना साझाकरण और संयुक्त गश्त के माध्यम से अपराधों पर 'शून्य-सहिष्णुता' (Zero-tolerance) की नीति अपनाई जा रही है।

  • जल कूटनीति (Hydro-Diplomacy): हाल ही में कुशियारा नदी जल समझौते (2022) ने यह सिद्ध किया है कि आपसी विश्वास के आधार पर जल विवाद सुलझाए जा सकते हैं।

आगे की राह (Way Forward)

भारत और बांग्लादेश के मध्य एक सुदृढ़ संबंध दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक स्थिरता की धुरी है। तीस्ता विवाद के स्थायी समाधान के लिए भारत सरकार को पश्चिम बंगाल सरकार के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर 'सहकारी संघवाद' का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि जल बंटवारे के साथ-साथ राज्य के किसानों के हितों की रक्षा के लिए वैकल्पिक जल संचयन और सूक्ष्म-सिंचाई अवसंरचना विकसित की जा सके।

सीमा प्रबंधन को अधिक मानवीय और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की आवश्यकता है। 'न्यू इंडिया 2047' का विजन एक सुरक्षित और अभेद्य सीमा की मांग करता है, वहीं 'वसुधैव कुटुंबकम' का दर्शन पड़ोसी देशों के साथ साझी समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। भारत को BBIN (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल) मोटर वाहन समझौते और सागर (SAGAR) विजन के तहत उप-क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि सीमाएं विवाद का नहीं, बल्कि विकास और व्यापार का सेतु बन सकें।

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