प्रवासी भारतीयों (Indian Diaspora) के आर्थिक और कूटनीतिक महत्व पर प्रकाश डालें।
Q. प्रवासी भारतीयों (Indian Diaspora) के आर्थिक और कूटनीतिक महत्व पर प्रकाश डालें।
Ans -
प्रवासी भारतीय (Indian Diaspora): वैश्विक पटल पर भारत के आर्थिक और कूटनीतिक ध्वजवाहक
संयुक्त राष्ट्र प्रवासन रिपोर्ट (UN Migration Report) के अनुसार, भारत का प्रवासी समुदाय विश्व में सर्वाधिक विशाल है, जिसकी संख्या लगभग 3.2 करोड़ है। ऐतिहासिक रूप से, भारतीय प्रवासन को 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) के संकीर्ण दृष्टिकोण से देखा जाता था, परंतु समकालीन भू-राजनीतिक परिदृश्य में यह दृष्टिकोण 'ब्रेन गेन' (प्रतिभा लाभ) और 'जीवंत सेतु' (Living Bridge) की संकल्पना में परिवर्तित हो चुका है। वर्तमान विदेश नीति में प्रवासी भारतीय मात्र राष्ट्र के नागरिक नहीं हैं, बल्कि वे भारत की विकास यात्रा और रणनीतिक स्वायत्तता के प्रमुख हितधारक बन गए हैं।
प्रवासी भारतीयों का आर्थिक महत्व
प्रवासी भारतीय भारतीय अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में कार्य करते हैं, जिसका प्रभाव बहुआयामी है:
प्रेषण (Remittances) और वृहद-आर्थिक स्थिरता: विश्व बैंक की 'माइग्रेशन एंड डेवलपमेंट ब्रीफ' 2023 के अनुसार, भारत 125 बिलियन डॉलर से अधिक के प्रेषण के साथ विश्व का शीर्ष प्राप्तकर्ता देश है। यह प्रेषण विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को स्थिर रखने और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit - CAD) को प्रबंधित करने में एक अमोघ अस्त्र की भूमिका निभाता है।
ज्ञान अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: सिलिकॉन वैली (अमेरिका) से लेकर यूरोप के शोध संस्थानों तक भारतीय मूल के पेशेवरों का वर्चस्व है। यह तकनीकी कौशल भारत में 'स्टार्टअप इंडिया' और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को गति प्रदान कर रहा है। 'रिवर्स माइग्रेशन' के माध्यम से ये पेशेवर पूंजी और तकनीकी विशेषज्ञता दोनों भारत ला रहे हैं।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और उद्यमशीलता: अनिवासी भारतीय (NRI) जमा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) और उद्यम पूंजी (Venture Capital) के माध्यम से भारत की ढांचागत परियोजनाओं में महत्वपूर्ण निवेश आ रहा है।
भारतीय उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार का सृजन: प्रवासी समुदाय खादी, आयुर्वेद, हस्तशिल्प और भारतीय कृषि उत्पादों के लिए एक 'तैयार बाजार' (Ready Market) उपलब्ध कराता है, जिससे भारत का निर्यात-आधारित विकास (Export-led growth) सुनिश्चित होता है।
प्रवासी भारतीयों का कूटनीतिक और रणनीतिक महत्व
वैश्विक राजनीति में प्रवासी समुदाय भारत के 'सॉफ्ट पावर' (Soft Power) का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरा है:
रणनीतिक लॉबिंग और नीतिगत प्रभाव: अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में भारतीय मूल के नागरिकों का नीति-निर्माण में सीधा हस्तक्षेप है। भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता (2008) को अमेरिकी संसद से पारित कराने में 'इंडिया कॉकस' और भारतीय प्रवासियों की लॉबिंग की भूमिका इसका ऐतिहासिक प्रमाण है।
सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति: प्रवासी भारतीय भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के अनौपचारिक राजदूत हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को मिली वैश्विक स्वीकृति और भारतीय सिनेमा व व्यंजन की लोकप्रियता भारत के सांस्कृतिक विस्तार को दर्शाती है, जो कूटनीतिक वार्ताओं में भारत के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण करती है।
भू-राजनीतिक विमर्श का निर्धारण: कश्मीर (अनुच्छेद 370 को निरस्त करना) या नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) जैसे आंतरिक मुद्दों पर विदेशी धरती पर उत्पन्न होने वाले भारत-विरोधी विमर्श (Anti-India Narrative) का खंडन करने में प्रवासी समुदाय ढाल का कार्य करता है।
उच्च राजनीतिक प्रतिनिधित्व: वैश्विक मंचों पर राष्ट्राध्यक्षों या उच्च पदों पर PIO (भारतीय मूल के व्यक्ति) की उपस्थिति (यथा- अमेरिका, ब्रिटेन, मॉरीशस, सिंगापुर आदि में) द्विपक्षीय संबंधों में एक स्वाभाविक आत्मीयता और रणनीतिक विश्वास उत्पन्न करती है।
विद्यमान चुनौतियां और भारत सरकार की प्रतिक्रिया
प्रवासी भारतीयों की पूर्ण क्षमता का दोहन करने में कुछ भू-आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियां विद्यमान हैं:
| प्रमुख चुनौतियाँ (Challenges) | रणनीतिक समाधान एवं सरकारी पहलें (Solutions/Initiatives) |
| खाड़ी देशों में श्रम शोषण (कफाला प्रणाली) | e-Migrate पोर्टल और 'मदद' (MADAD) पोर्टल के माध्यम से श्रमिकों की वास्तविक समय (Real-time) ट्रैकिंग और शिकायत निवारण। |
| युद्ध और संघर्ष क्षेत्रों में प्रवासियों की सुरक्षा | संकटकालीन निकासी कूटनीति: ऑपरेशन गंगा (यूक्रेन), ऑपरेशन कावेरी (सूडान), और ऑपरेशन अजय (इज़राइल)। |
| पश्चिम में संरक्षणवाद (Protectionism) | अमेरिका (H1-B वीज़ा मुद्दे) और यूरोप के साथ गतिशीलता और प्रवासन साझेदारी समझौतों (MMPA) पर रणनीतिक वार्ता। |
| अकादमिक और शोध क्षमता का एकीकरण | VAIBHAV (वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक) सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक भारतीय शोधकर्ताओं को भारतीय संस्थानों के साथ जोड़ना। |
आगे की राह
प्रवासी भारतीयों के साथ भारत का जुड़ाव अब एकतरफा या केवल संकट-आधारित (Crisis-driven) नहीं रह गया है; यह एक सतत और संस्थागत साझेदारी में परिवर्तित हो चुका है। सतत विकास लक्ष्यों (विशेषकर SDG 8 और 10) की प्राप्ति और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत के एकीकरण हेतु इस जनसांख्यिकीय लाभांश का इष्टतम उपयोग अपरिहार्य है।
'वसुधैव कुटुंबकम्' (One Earth, One Family, One Future) के शाश्वत दर्शन को केंद्र में रखते हुए, भारत को अपनी प्रवासी नीति को और अधिक समावेशी बनाना होगा। प्रवासी भारतीय दिवस और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड जैसे संस्थागत तंत्रों को अधिक उदार और उत्तरदायी बनाकर ही भारत 'अमृत काल' में 'नव भारत 2047' के एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के संकल्प को यथार्थ में परिणत कर सकता है।