भारत में नैनोटेक्नोलॉजी के संभावित अनुप्रयोगों (स्वास्थ्य और पर्यावरण) की विवेचना करें।

 Q.  भारत में नैनोटेक्नोलॉजी के संभावित अनुप्रयोगों (स्वास्थ्य और पर्यावरण) की विवेचना करें। 

Ans - 

नैनोटेक्नोलॉजी (Nanotechnology) पदार्थ के परमाण्विक, आणविक और सुपरमॉलिक्यूलर पैमाने (1 से 100 नैनोमीटर) पर हेरफेर और नियंत्रण का विज्ञान है। चौथी औद्योगिक क्रांति (4IR) के दौर में इसे एक 'सामान्य प्रयोजन प्रौद्योगिकी' (General Purpose Technology) माना जाता है। भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा वर्ष 2007 में शुरू किए गए नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी मिशन (NSTM) ने इस क्षेत्र में अनुसंधान को संस्थागत रूप प्रदान किया है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जहाँ सघन आबादी और सीमित संसाधन हैं, नैनोटेक्नोलॉजी स्वास्थ्य और पर्यावरण की जटिल चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती है।

नैनोटेक्नोलॉजी के संभावित अनुप्रयोग

स्वास्थ्य क्षेत्र में (SDG 3: उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली)

  • लक्षित औषधि वितरण (Targeted Drug Delivery): कैंसर जैसी बीमारियों में कीमोथेरेपी के कारण स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचता है। नैनो-कणों (जैसे- लाइपोसॉम्स) का उपयोग कर दवा को सीधे कैंसरग्रस्त ट्यूमर तक पहुंचाया जा सकता है, जिससे साइड-इफेक्ट्स न्यूनतम हो जाते हैं।

  • सटीक निदान और इमेजिंग (Diagnostics & Imaging): नैनो-सेंसर और 'क्वांटम डॉट्स' (Quantum Dots) का उपयोग कर शरीर में बीमारियों (जैसे- अल्जाइमर, ट्यूमर) की प्रारंभिक चरण में ही अत्यंत सटीक पहचान की जा सकती है। यह एमआरआई (MRI) स्कैन की स्पष्टता को कई गुना बढ़ा देता है।

  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance - AMR) से निपटना: सुपरबग्स के बढ़ते खतरे के बीच, सिल्वर नैनोपार्टिकल्स (AgNPs) में प्राकृतिक जीवाणुरोधी गुण होते हैं, जिनका उपयोग सर्जिकल उपकरणों और घाव की पट्टियों (Bandages) में संक्रमण रोकने के लिए किया जा रहा है।

  • नैनोबोट्स (Nanobots) और ऊतक इंजीनियरिंग: सूक्ष्म रोबोट्स भविष्य में धमनियों के ब्लॉकेज (प्लाक) को हटाने या सेलुलर स्तर पर शल्य चिकित्सा (Surgery) करने में सक्षम होंगे। इसके अतिरिक्त, नैनो-फाइबर्स का उपयोग कृत्रिम अंगों के विकास और क्षतिग्रस्त ऊतकों (Tissue regeneration) के पुनर्निर्माण में किया जा रहा है।

पर्यावरण क्षेत्र में (SDG 6: स्वच्छ जल और SDG 13: जलवायु कार्रवाई)

  • जल शोधन (Water Purification): गंगा के मैदानी इलाकों (विशेषकर बिहार और पश्चिम बंगाल) में भूजल में आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रदूषण एक गंभीर संकट है। कार्बन नैनोट्यूब (Carbon Nanotubes - CNTs) और ग्राफीन आधारित नैनो-फिल्टर भारी धातुओं और सूक्ष्म प्रदूषकों को पानी से अलग करने में अत्यधिक प्रभावी हैं।

  • वायु प्रदूषण नियंत्रण: उद्योगों की चिमनियों और वाहनों के निकास तंत्र में नैनो-उत्प्रेरकों (Nano-catalysts) का उपयोग कर कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों को हानिरहित गैसों में बदला जा सकता है। यह PM 2.5 कणों को फिल्टर करने में भी सक्षम है।

  • स्वच्छ ऊर्जा और भंडारण: नैनोटेक्नोलॉजी पेरोव्स्काइट सोलर सेल (Perovskite Solar Cells) की दक्षता को बढ़ा रही है। साथ ही, नैनो-मटेरियल आधारित लिथियम-आयन बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता को बढ़ाकर ई-मोबिलिटी (EVs) को अधिक व्यावहारिक बना रही है।

  • सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट: नैनो-कणों की उच्च प्रतिक्रियाशीलता (High Surface Area to Volume Ratio) का उपयोग प्लास्टिक कचरे और माइक्रोप्लास्टिक के त्वरित रासायनिक क्षरण (Degradation) के लिए किया जा सकता है।

संभावित चुनौतियाँ और नैनो-टॉक्सिसिटी

  • स्वास्थ्य जोखिम: नैनो-कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि वे 'रक्त-मस्तिष्क अवरोध' (Blood-Brain Barrier) को पार कर सकते हैं। इसके अनपेक्षित विषैले प्रभावों (Nano-toxicity) का अध्ययन अभी प्रारंभिक अवस्था में है।

  • नियामक शून्यता: भारत में वर्तमान में नैनो-उत्पादों के लिए कोई विशिष्ट और समर्पित कानूनी ढांचा नहीं है।

  • लागत और बौद्धिक संपदा: उच्च अनुसंधान लागत और पेटेंट की जटिलताएं इसे आम नागरिक की पहुंच से दूर कर सकती हैं।

आगे की राह (Way Forward)

नैनोटेक्नोलॉजी की पूर्ण क्षमता का दोहन करने और इसके जोखिमों को कम करने के लिए, नीति आयोग के विजन के अनुरूप एक चुस्त नियामक ढांचा (Agile Regulation) विकसित करने की आवश्यकता है। 'राष्ट्रीय नैनोटेक्नोलॉजी नियामक प्राधिकरण' की स्थापना की जानी चाहिए, जो उत्पादों की सुरक्षा, मानकीकरण और जीवन-चक्र मूल्यांकन (Life Cycle Assessment) सुनिश्चित करे।

नैनो विज्ञान में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देकर, भारत न केवल अपनी घरेलू स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान कर सकता है, बल्कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना के साथ वैश्विक कल्याण में भी अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

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