चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के पद के सृजन से भारत के रक्षा बलों के एकीकरण (Theaterisation) में कैसे मदद मिली है?
Q. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के पद के सृजन से भारत के रक्षा बलों के एकीकरण (Theaterisation) में कैसे मदद मिली है?
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के पद का सृजन स्वतंत्र भारत के सैन्य सुधारों के इतिहास में सबसे युगांतरकारी और संरचनात्मक कदमों में से एक है। कारगिल समीक्षा समिति (1999) और शेखतकर समिति (2016) की सुविचारित सिफारिशों के आधार पर स्थापित यह पद, रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार (Principal Military Adviser) के रूप में कार्य करता है। नव-सृजित सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs - DMA) के प्रमुख के तौर पर CDS का प्राथमिक जनादेश भारतीय सशस्त्र बलों के बीच 'संयुक्तता' (Jointness) स्थापित करना और थिएटराइजेशन (Theaterisation) की जटिल प्रक्रिया का नेतृत्व करना है।
वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य और आधुनिक युद्ध (Multi-domain Warfare) की प्रकृति को देखते हुए, तीनों सेनाओं का एकीकरण अब एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुका है।
रक्षा बलों के एकीकरण (Theaterisation) में CDS की सुधारात्मक भूमिका
CDS संस्था ने एकीकरण की दिशा में एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य किया है, जिसे निम्नलिखित बहुआयामी दृष्टिकोण से समझा जा सकता है:
1. संस्थागत और परिचालन समन्वय (Operational Synergy)
त्रि-सेवा कमान संरचना: CDS भौगोलिक और रणनीतिक खतरों के आधार पर एकीकृत थिएटर कमांड (जैसे- मैरीटाइम थिएटर कमांड, एयर डिफेंस कमांड) की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। इससे युद्ध की स्थिति में तीनों सेनाओं की प्रतिक्रिया का समय (Response time) न्यूनतम होगा।
एकाकी कार्यप्रणाली (Silo Mentality) का अंत: ऐतिहासिक रूप से थल, जल और वायु सेनाएं अपने स्वतंत्र सिद्धांतों पर कार्य करती थीं। CDS ने अंतर-संचालनीयता (Inter-operability) और संयुक्त सैन्य सिद्धांतों के निर्माण को संस्थागत रूप दिया है।
2. वित्तीय और रसद अनुकूलन (Resource Optimization)
पूंजीगत खरीद का प्राथमिकीकरण (Prioritisation of Procurement): रक्षा बजट के इष्टतम उपयोग के लिए, CDS रक्षा खरीद परिषद (DAC) के सदस्य के रूप में तीनों सेनाओं की आवश्यकताओं को एकीकृत करते हैं। इससे अनावश्यक और दोहरी खरीद (Duplication) पर रोक लगी है।
संयुक्त रसद नोड्स (Joint Logistics Nodes): आपूर्ति श्रृंखलाओं, मरम्मत और रखरखाव सेवाओं का एकीकरण किया जा रहा है, जिससे न केवल आर्थिक बचत हो रही है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आपूर्ति की गति भी बढ़ी है।
3. रक्षा स्वदेशीकरण और तकनीकी एकीकरण (Technological Integration)
आत्मनिर्भर भारत को गति: CDS ने सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List) को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देती है।
भविष्य के युद्धों की तैयारी: साइबर, अंतरिक्ष और विशेष अभियानों के लिए त्रि-सेवा एजेंसियों (जैसे- Defence Cyber Agency, Defence Space Agency) का संचालन CDS की देखरेख में हो रहा है, जो 5th Generation Warfare के लिए आवश्यक है।
थिएटराइजेशन के मार्ग में विद्यमान चुनौतियाँ
यद्यपि एकीकरण की दिशा में प्रगति हुई है, किंतु इसके समक्ष कई संस्थागत और रणनीतिक बाधाएं मौजूद हैं:
संसाधनों की विषमता (Resource Constraints): भारतीय वायु सेना (IAF) के पास फाइटर स्क्वाड्रन की सीमित संख्या (स्वीकृत 42 के मुकाबले लगभग 31) है। संपत्तियों को विभिन्न थिएटर्स में बांटने से परिचालन लचीलापन (Operational flexibility) कम होने की आशंका है।
सेवा-विशिष्ट संस्कृति (Service-Specific Culture): तीनों सेनाओं की पदानुक्रमित संरचना, पदोन्नति के अवसर और युद्ध सिद्धांतों में बुनियादी भिन्नताएं हैं। कमान और नियंत्रण (Command and Control) को लेकर सहमति बनाना एक जटिल कार्य है।
थिएटर कमांडर की जवाबदेही: नए मॉडल के तहत थिएटर कमांडर किसे रिपोर्ट करेगा (CDS या सीधे रक्षा मंत्री को), इसकी स्पष्ट पदानुक्रमित संरचना को लेकर वैचारिक मतभेद रहे हैं।
वित्तीय और बुनियादी ढांचे का बोझ: नए कमांड मुख्यालयों की स्थापना, संचार प्रणालियों के एकीकरण और संयुक्त प्रशिक्षण के लिए भारी पूंजीगत परिव्यय की आवश्यकता है।
आगे की राह (Way Forward)
चरणबद्ध और क्रमिक दृष्टिकोण (Gradual Approach): अमेरिका या चीन (जिन्होंने थिएटराइजेशन लागू किया है) की तर्ज़ पर त्वरित बदलाव के बजाय, भारत को अपनी विशिष्ट सुरक्षा गतिशीलता के अनुसार 'बॉटम-अप' (Bottom-up) दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। अंडमान और निकोबार कमान (ANC) जैसी मौजूदा संयुक्त कमानों की क्षमता वृद्धि से शुरुआत की जा सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (National Security Strategy - NSS) का निर्माण: एक प्रलेखित NSS थिएटराइजेशन के लिए स्पष्ट राजनीतिक दिशा और व्यापक रणनीतिक लक्ष्य प्रदान करेगी।
सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) और प्रशासनिक सामंजस्य: कार्मिक नीतियों, वेतन विसंगतियों और संयुक्त प्रशिक्षण मॉड्यूल्स (National Defence Academy के स्तर से ही) को मानकीकृत करने की आवश्यकता है।
आधुनिक युद्ध केवल सैन्य शक्ति का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति के सभी उपकरणों (Diplomatic, Information, Military, Economic - DIME) के निर्बाध एकीकरण का परीक्षण है। CDS के नेतृत्व में रक्षा बलों का थिएटराइजेशन भारत की रणनीतिक निवारक क्षमता (Strategic Deterrence) को सुदृढ़ करेगा। यह सुधार एक सुरक्षित, उत्तरदायी और तकनीकी रूप से उन्नत सैन्य तंत्र का निर्माण करेगा, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' की भारत की भूमिका को पुष्ट करते हुए 'विकसित भारत @ 2047' और 'वसुधैव कुटुंबकम' के व्यापक राष्ट्रीय और वैश्विक दृष्टिकोण को साकार करने में आधारशिला सिद्ध होगा।