'ई-गवर्नेस' (e-Governance) केवल तकनीक नहीं, बल्कि सुशासन का एक साधन है। स्पष्ट करें।

 Q. 'ई-गवर्नेस' (e-Governance) केवल तकनीक नहीं, बल्कि सुशासन का एक साधन है। स्पष्ट करें।

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ई-गवर्नेंस और सुशासन: तकनीक से परिवर्तन तक एक विश्लेषणात्मक मूल्यांकन

विश्व बैंक (World Bank) के अनुसार, ई-गवर्नेंस का तात्पर्य सरकारी एजेंसियों द्वारा सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के उस उपयोग से है, जो नागरिकों, व्यापारिक संस्थाओं और प्रशासन के बीच संबंधों को रूपांतरित करता है। यह केवल कंप्यूटर, इंटरनेट और सॉफ्टवेयर का भौतिक ढांचा नहीं है, बल्कि द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) की 11वीं रिपोर्ट के विजन के अनुरूप, "स्मार्ट शासन" (SMART - Simple, Moral, Accountable, Responsive, Transparent) की स्थापना का एक वैचारिक और प्रशासनिक साधन है।

'ई-गवर्नेंस' केवल तकनीक कैसे नहीं है? (Beyond Technology)

प्रशासनिक दृष्टिकोण से, यदि दोषपूर्ण, जटिल और लालफीताशाही (Red Tapism) से ग्रस्त प्रक्रियाओं का केवल कम्प्यूटरीकरण कर दिया जाए, तो वह केवल 'ई-प्रशासन' (e-Administration) कहलाएगा। ई-गवर्नेंस का वास्तविक अर्थ 'प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पुनर्रचना' (Business Process Re-engineering) है। तकनीक यहाँ साध्य (End) नहीं, बल्कि शासन को नागरिक-केंद्रित (Citizen-Centric) बनाने का साधन (Enabler) मात्र है।

सुशासन (Good Governance) के साधन के रूप में ई-गवर्नेंस (बहुआयामी विश्लेषण)

ई-गवर्नेंस शासन के विभिन्न आयामों को सुशासन के आदर्शों में परिवर्तित करता है, जिसका PESTLE (राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, विधिक, पर्यावरणीय) परिप्रेक्ष्य निम्नलिखित है:

  • प्रशासनिक एवं राजनीतिक (Administrative & Political):

    • पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर प्रहार: सरकारी निविदाओं में भाई-भतीजावाद को समाप्त करने हेतु GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल एक मील का पत्थर है। JAM त्रिमूर्ति (Jan Dhan, Aadhaar, Mobile) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) ने व्यवस्था से बिचौलियों (Middlemen) को समाप्त कर लीकेज को रोका है।

    • जवाबदेही और प्रतिक्रियाशीलता (Accountability & Responsiveness): CPGRAMS और MyGov जैसे प्लेटफॉर्म नागरिकों को नीति-निर्माण में भागीदार बनाते हैं और नौकरशाही की जवाबदेही तय करते हैं। प्रधानमंत्री द्वारा प्रगति (PRAGATI) मंच के माध्यम से परियोजनाओं की अंतर-विभागीय निगरानी इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।

  • आर्थिक (Economic):

    • व्यवसाय सुगमता (Ease of Doing Business): MCA21, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और GSTN नेटवर्क ने कर अनुपालन और कॉर्पोरेट प्रशासन को सुगम बनाकर विदेशी निवेश और आर्थिक विकास को गति प्रदान की है।

  • सामाजिक (Social):

    • समावेशी विकास (Inclusive Development): उमंग (UMANG) ऐप और ई-संजीवनी (e-Sanjeevani) जैसे प्लेटफॉर्म सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाएं पहुंचा रहे हैं। यह 'डिजिटल अंत्योदय' (Digital Antyodaya) के लक्ष्य को साकार कर रहा है।

  • विधिक एवं पर्यावरणीय (Legal & Environmental):

    • न्यायिक सुगमता: ई-कोर्ट (e-Courts) मिशन मोड प्रोजेक्ट से न्याय तक पहुंच (Access to Justice) सुनिश्चित हुई है और मुकदमों के निस्तारण में गति आई है।

    • कागज रहित प्रशासन: डिजिलॉकर (DigiLocker) और ई-ऑफिस (e-Office) पहल ने कागजी कार्यवाही को कम कर पर्यावरणीय स्थिरता (Sustainable practices) को बढ़ावा दिया है।

सुशासन के स्तंभ और ई-गवर्नेंस का प्रभाव

सुशासन के मापदंड (Pillars of Good Governance)ई-गवर्नेंस की भूमिका (Role of e-Governance)प्रमुख सरकारी पहल (Key Initiatives)
पारदर्शिता (Transparency)सूचनाओं का स्वतः संज्ञान और खुला प्रकटीकरणRTI Online, Open Data Portal
दक्षता (Efficiency)सेवा वितरण में समय और लागत की बचतFASTag, UMANG, e-District
कानून का शासन (Rule of Law)नियम-आधारित और मानवरहित (Faceless) इंटरफेसFaceless Tax Assessment (CBDT)
समानता (Equity)भौगोलिक और सामाजिक बाधाओं का निवारणCommon Service Centres (CSCs)

विद्यमान चुनौतियां और सीमाएं (Challenges)

ई-गवर्नेंस को पूर्ण रूप से सुशासन में परिणत करने के मार्ग में कई संरचनात्मक और व्यावहारिक बाधाएं हैं:

  • डिजिटल डिवाइड (Digital Divide): भारत में व्यापक ग्रामीण-शहरी और लैंगिक तकनीकी असमानता मौजूद है। इंटरनेट की पहुंच और स्मार्टफोन की उपलब्धता अभी भी सर्वव्यापी नहीं है।

  • साइबर सुरक्षा और डेटा निजता (Cyber Security & Data Privacy): रैंसमवेयर हमलों (जैसे- AIIMS सर्वर और कुडनकुलम परमाणु संयंत्र) ने संवेदनशील राष्ट्रीय और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं (जस्टिस बी.एन. श्रीकृष्ण समिति की चिंताएं)।

  • बुनियादी ढांचा (Infrastructural Bottlenecks): भारतनेट (BharatNet) परियोजना के बावजूद 'लास्ट माइल कनेक्टिविटी' (Last Mile Connectivity) और निर्बाध विद्युत आपूर्ति की समस्या बनी हुई है।

  • व्यवहारगत जड़ता (Behavioral Inertia): नौकरशाही में पारंपरिक 'फाइल संस्कृति' से बाहर निकलने की हिचकिचाहट और तकनीकी प्रशिक्षण का अभाव।

आगे की राह (Way Forward)

ई-गवर्नेंस के लाभों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है:

  1. क्षमता निर्माण (Capacity Building): 'मिशन कर्मयोगी' (Mission Karmayogi) के माध्यम से सिविल सेवकों को तकनीकी रूप से दक्ष और नागरिक-संवेदनशील बनाना होगा।

  2. कानूनी ढांचा: डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act) को कठोरता से लागू कर नागरिकों के निजता के अधिकार (अनुच्छेद 21) को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

  3. बुनियादी ढांचे का विस्तार: सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से 5G नेटवर्क और स्थानीय भाषा (Local Languages) में डिजिटल कंटेंट (जैसे- भाषिनी पहल) को बढ़ावा देना आवश्यक है।

ई-गवर्नेंस का अंतिम लक्ष्य मात्र सर्वर और केबल का जाल बिछाना नहीं है, बल्कि एक उत्तरदायी, पारदर्शी और संवेदनशील राज्य की स्थापना करना है। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 16 (SDG 16 - शांति, न्याय और सुदृढ़ संस्थाएं) और 'विकसित भारत 2047' (Viksit Bharat 2047) के विजन को साकार करने के लिए ई-गवर्नेंस को मानवीय करुणा और संस्थागत सत्यनिष्ठा के साथ जोड़ना अनिवार्य है, ताकि तकनीक वास्तव में सुशासन की संवाहक बन सके।

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