ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज के रूप में भारत के उभरने और G20 शिखर सम्मेलन में इसकी सफलताओं पर टिप्पणी करें।

 Q.  ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज के रूप में भारत के उभरने और G20 शिखर सम्मेलन में इसकी सफलताओं पर टिप्पणी करें।

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'ग्लोबल साउथ' (Global South) एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के उन विकासशील और अल्पविकसित देशों को संदर्भित करता है जो ऐतिहासिक रूप से वैश्विक शासन (Global Governance) और नीति-निर्माण के हाशिए पर रहे हैं। 21वीं सदी की बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में, भारत स्वयं को केवल एक पर्यवेक्षक के रूप में नहीं, बल्कि इस हाशिए पर पड़े वर्ग की सशक्त 'आवाज' (Voice) के रूप में स्थापित कर चुका है। अपनी G20 अध्यक्षता (2023) के दौरान, भारत ने 'वसुधैव कुटुंबकम' (एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य) के दर्शन के माध्यम से ग्लोबल साउथ की चिंताओं को वैश्विक विमर्श के केंद्र में लाकर अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की।

भारत 'ग्लोबल साउथ' की आवाज के रूप में क्यों और कैसे उभरा?

भारत का उदय रातों-रात नहीं हुआ है, बल्कि यह एक सुविचारित कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति का परिणाम है:

  • संस्थागत नेतृत्व का निर्माण: G20 शिखर सम्मेलन से पूर्व, भारत ने 'वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट' का आयोजन किया जिसमें 125 देशों ने भाग लिया। इस पहल ने सुनिश्चित किया कि विकासशील देशों के 'माइक्रो-लेवल' मुद्दे (जैसे ऋण संकट, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा) G20 के मुख्य एजेंडे का हिस्सा बनें।

  • संकटमोचक की भूमिका (Crisis Responder): कोविड-19 महामारी के दौरान 'वैक्सीन मैत्री' के तहत 100 से अधिक देशों (मुख्यतः ग्लोबल साउथ) को 300 मिलियन से अधिक टीके उपलब्ध कराना। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक आपदाओं (जैसे तुर्किये भूकंप) और आर्थिक संकटों (श्रीलंका) में 'प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता' (First Responder) बनना भारत की साख को सुदृढ़ करता है।

  • 'सिस्टम-टेकर' से 'सिस्टम-शेपर' का सफर: भारत की विदेश नीति पारंपरिक 'गुटनिरपेक्षता' से आगे बढ़कर 'सामरिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) पर आधारित है। भारत का लोकतांत्रिक मॉडल और डिजिटल अर्थव्यवस्था ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक अनुकरणीय और व्यवहार्य विकल्प (Achievable Model) प्रस्तुत करती है।

G20 शिखर सम्मेलन में भारत की बहुआयामी सफलताएं (PESTLE विश्लेषण)

भारत की G20 अध्यक्षता को अब तक की सबसे समावेशी और परिणाम-उन्मुख (Outcome-oriented) अध्यक्षता माना गया है। इसकी सफलताओं को निम्नलिखित आयामों में विश्लेषित किया जा सकता है:

PESTLE आयामभारत की प्रमुख पहल/सफलताग्लोबल साउथ के लिए प्रभाव और महत्व
राजनीतिक एवं कूटनीतिक (Political)अफ्रीकी संघ (African Union) का G20 में समावेश और नई दिल्ली घोषणापत्रअफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाना वैश्विक शासन के लोकतंत्रीकरण का ऐतिहासिक कदम है। इसके अतिरिक्त, रूस-यूक्रेन ध्रुवीकरण के बावजूद घोषणापत्र पर 100% सर्वसम्मति (Consensus) बनाना भारत की कूटनीतिक विजय है।
आर्थिक एवं वित्तीय (Economic)MDBs में सुधार और IMEC का प्रस्तावएन.के. सिंह-लॉरेंस समर्स विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर बहुपक्षीय विकास बैंकों (World Bank/IMF) में ढांचागत सुधारों पर सहमति बनी। साथ ही, IMEC (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा) चीन की अपारदर्शी 'ऋण-जाल' (Debt Trap) कूटनीति का एक व्यवहार्य विकल्प है।
तकनीकी (Technological)डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की वैश्विक स्वीकृतिभारत के DPI मॉडल (जैसे UPI, CoWIN, आधार) को विकासशील देशों में तीव्र वित्तीय समावेशन और सुशासन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मानक के रूप में मान्यता मिली।
पर्यावरणीय (Environmental)ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस (GBA) और LiFEGBA का गठन स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति देगा। LiFE (पर्यावरण के लिए जीवन शैली) ने जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए विकसित देशों के 'यूज एंड थ्रो' मॉडल के स्थान पर मानव-केंद्रित सतत जीवन शैली का प्रस्ताव रखा।

विद्यमान चुनौतियाँ (Critical Analysis)

यद्यपि G20 में भारत की सफलताएं ऐतिहासिक हैं, तथापि 'ग्लोबल साउथ' के नेतृत्व में कई ढांचागत और कूटनीतिक बाधाएं विद्यमान हैं:

  • चीन का आर्थिक और कूटनीतिक प्रभुत्व: ब्रिक्स (BRICS) और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के माध्यम से ग्लोबल साउथ (विशेषकर अफ्रीका और लैटिन अमेरिका) में चीन की गहरी आर्थिक पैठ भारत के नेतृत्व को कड़ी चुनौती देती है।

  • जलवायु वित्तपोषण की विफलता: विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों को प्रति वर्ष 100 बिलियन डॉलर के जलवायु वित्त (Climate Finance) और तकनीक हस्तांतरण के वादों का अब तक धरातल पर न उतर पाना एक बड़ा अवरोध है।

  • ऋण का दुष्चक्र (Debt Burden): जाम्बिया और श्रीलंका जैसे ग्लोबल साउथ के देशों के लिए ऋण पुनर्गठन (Debt Restructuring) तंत्र अभी भी धीमा और अपर्याप्त है।

आगे की राह (Way Forward)

भारत ने अपनी G20 अध्यक्षता से यह सिद्ध कर दिया है कि ग्लोबल साउथ अब वैश्विक राजनीति की परिधि (Periphery) पर नहीं, बल्कि निर्णायक केंद्र में है।

इस गति को बनाए रखने के लिए, भारत को सतत विकास लक्ष्य-17 (SDG 17: लक्ष्यों के लिए साझेदारी) के तहत ग्लोबल साउथ के देशों में संस्थागत क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य अवसंरचना और शिक्षा पर निवेश बढ़ाना चाहिए। पश्चिम के साथ रणनीतिक साझेदारी और ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा के बीच यह कूटनीतिक संतुलन ही भारत को एक 'विश्वमित्र' (Global Friend) के रूप में स्थापित करेगा। यही समावेशी दृष्टिकोण 'विकसित भारत @ 2047' के रणनीतिक उत्कर्ष और 'वसुधैव कुटुंबकम' के अंतिम ध्येय को यथार्थ के धरातल पर सिद्ध करने का सर्वोत्तम मार्ग है।

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