रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष के बीच भारत की विदेश नीति की 'सामरिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) का विश्लेषण करें।
Q. रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष के बीच भारत की विदेश नीति की 'सामरिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) का विश्लेषण करें।
Ans -
समकालीन बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में, भारत की विदेश नीति पारंपरिक 'गुटनिरपेक्षता' (Non-alignment) के ऐतिहासिक आवरण से बाहर निकलकर 'सामरिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) और 'बहु-गठबंधन' (Multi-alignment) के एक परिपक्व चरण में प्रवेश कर चुकी है। सामरिक स्वायत्तता का तात्पर्य बिना किसी महाशक्ति के दबाव या गुटबंदी (Camp Politics) के, विशुद्ध रूप से राष्ट्रीय हितों और वैश्विक शांति के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता से है। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में, जहाँ रूस-यूक्रेन युद्ध और इजरायल-हमास संघर्ष ने वैश्विक पटल पर गहरे वैचारिक और रणनीतिक विभाजन पैदा किए हैं, भारत का दृष्टिकोण 'तटस्थता' (Fence-sitting) का नहीं, बल्कि एक 'सक्रिय और स्वतंत्र' (Active and Independent) कूटनीति का रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में सामरिक स्वायत्तता का प्रकटीकरण
इस संघर्ष में भारत ने पश्चिमी देशों के भारी दबाव के बावजूद एक अत्यंत संतुलित और यथार्थवादी (Realist) विदेश नीति का प्रदर्शन किया है, जिसे निम्नलिखित आयामों में विश्लेषित किया जा सकता है:
1. कूटनीतिक और राजनीतिक संतुलन (Diplomatic Balancing)
संयुक्त राष्ट्र (UN) में मतदान: भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद में रूस की निंदा करने वाले प्रस्तावों से परहेज (Abstain) किया, परंतु साथ ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर (अनुच्छेद 2), अंतर्राष्ट्रीय कानून और देशों की क्षेत्रीय अखंडता (Territorial Integrity) का पुरजोर समर्थन किया।
शांति का आह्वान: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के समरकंद शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री का वक्तव्य, "यह युद्ध का युग नहीं है" (This is not an era of war), भारत की शांति-समर्थक नीति का स्पष्ट उद्घोष था, जिसे G20 नई दिल्ली घोषणापत्र में भी स्थान मिला।
2. आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा (Economic & Energy Security)
रियायती ऊर्जा की खरीद: पश्चिमी प्रतिबंधों (Sanctions) और 'प्राइस कैप' (Price Cap) के बावजूद, भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखी। यह 1.4 बिलियन की आबादी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और घरेलू मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया एक संप्रभु आर्थिक निर्णय था।
भुगतान तंत्र: 'रुपया-रूबल' व्यापार तंत्र को बढ़ावा देकर भारत ने 'डी-डॉलराइजेशन' (De-dollarization) की दिशा में कदम बढ़ाया, जो वित्तीय स्वायत्तता को दर्शाता है।
3. रक्षा एवं भू-सामरिक हित (Defense & Strategic Interests)
भारतीय सशस्त्र बलों के लगभग 60% सैन्य उपकरण रूसी मूल के हैं। S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की आपूर्ति सुनिश्चित करना और रूस को पूर्णतः चीन के रणनीतिक प्रभाव (Russia-China Axis) में जाने से रोकना भारत की महाद्वीपीय सुरक्षा (Continental Security) के लिए अनिवार्य है।
इजरायल-हमास संघर्ष में भारत का यथार्थवादी दृष्टिकोण
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) भारत की ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासियों के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। इस संघर्ष में भारत की सामरिक स्वायत्तता 'मुद्दा-आधारित' (Issue-based) कूटनीति को दर्शाती है:
1. आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance on Terrorism)
7 अक्टूबर 2023 के हमलों के तुरंत बाद, भारत ने इसे स्पष्ट रूप से 'आतंकवादी कृत्य' करार दिया। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के अनुरूप है, जो आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा करती है, चाहे वह कहीं भी हो।
2. द्वि-राज्य समाधान और मानवीय सहायता (Two-State Solution)
इजरायल के साथ रणनीतिक साझेदारी (कृषि, जल, रक्षा) के बावजूद, भारत ने फिलिस्तीन के लिए अपने ऐतिहासिक समर्थन को नहीं छोड़ा है। भारत ने सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर एक स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र के निर्माण (Two-State Solution) का समर्थन दोहराया है और गाजा को मानवीय सहायता (दवाएं और आपदा राहत सामग्री) भी भेजी है।
3. भू-आर्थिक और प्रवासी सुरक्षा (Geo-economic & Social)
मध्य पूर्व में लगभग 90 लाख भारतीय नागरिक कार्यरत हैं और यह क्षेत्र भारत के रेमिटेंस (Remittance) का एक बड़ा स्रोत है।
ऑपरेशन अजय (Operation Ajay): संघर्ष क्षेत्र से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालना भारत की सामाजिक जिम्मेदारी और कूटनीतिक पहुंच का प्रमाण है।
साथ ही, भारत IMEC (भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा) और I2U2 (भारत, इजरायल, यूएई, यूएसए) जैसी रणनीतिक पहलों को सुरक्षित रखने के लिए अरब देशों और इजरायल दोनों के साथ संतुलन साध रहा है।
सामरिक स्वायत्तता के समक्ष विद्यमान चुनौतियाँ
यद्यपि भारत की कूटनीति सफल रही है, फिर भी इन संघर्षों ने कई जटिल चुनौतियाँ प्रस्तुत की हैं:
| क्षेत्र | प्रमुख चुनौतियाँ (Challenges) | संभावित प्रभाव (Impacts) |
| भू-राजनीतिक | पश्चिमी देशों (QUAD सहयोगियों) में विश्वास की कमी उत्पन्न होने का जोखिम। | उन्नत प्रौद्योगिकी (सेमीकंडक्टर, AI) और रक्षा सहयोग में संभावित बाधाएं। |
| आर्थिक व्यापार | लाल सागर (Red Sea) संकट और हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान। | रसद लागत (Logistics Cost) में वृद्धि और वैश्विक व्यापार में मंदी। |
| सामरिक | रूस पर चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण यूरेशियन क्षेत्र में भारत की स्थिति का कमजोर होना। | हिमालयी सीमाओं पर चीन के दुस्साहस को अप्रत्यक्ष बल मिलना। |
आगे की राह (Way Forward)
भारत की सामरिक स्वायत्तता को भविष्य के झटकों (Future Shocks) से बचाने के लिए निम्नलिखित बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है:
रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता': विदेशी हथियारों (विशेषकर रूस और पश्चिमी देशों) पर निर्भरता कम करने के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू रक्षा विनिर्माण (Defence Indigenization) को तीव्र करना होगा।
आर्थिक विविधीकरण (Economic Diversification): ऊर्जा आपूर्ति के लिए केवल रूस या मध्य पूर्व पर निर्भर रहने के बजाय, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के साथ ऊर्जा कूटनीति का विस्तार किया जाना चाहिए तथा 'हरित ऊर्जा संक्रमण' (Green Energy Transition) पर निवेश बढ़ाना चाहिए।
ग्लोबल साउथ का नेतृत्व (Leadership of Global South): SDG 16 (शांति, न्याय और सशक्त संस्थाएं) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत को 'वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ' के रूप में विकासशील देशों के हितों को G20, BRICS और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग के साथ मजबूती से उठाना चाहिए।
भारत का वर्तमान कूटनीतिक रुख 'अलगाववाद' (Isolationism) नहीं, बल्कि वैश्विक भलाई के लिए एक 'जिम्मेदार शक्ति' का व्यवहार है। एक ओर इंडो-पैसिफिक में नियम-आधारित व्यवस्था (Rule-based order) का समर्थन और दूसरी ओर यूरेशिया व मध्य पूर्व में शांतिपूर्ण संवाद का आग्रह, भारत को एक 'विश्वमित्र' (Global Friend) के रूप में स्थापित करता है। संघर्षों के इस दौर में अपनी सामरिक स्वायत्तता को अक्षुण्ण रखकर ही भारत एक सुरक्षित वैश्विक वातावरण का निर्माण कर सकता है, जो अंततः 'विकसित भारत @ 2047' के आर्थिक व रणनीतिक लक्ष्यों की प्राप्ति तथा 'वसुधैव कुटुंबकम' के शाश्वत दर्शन को फलीभूत करने का मुख्य मार्ग है।