'ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' (Green Hydrogen) भारत के कार्बन न्यूट्रैलिटी (नेट जीरो 2070) लक्ष्य को हासिल करने में कैसे मदद करेगा?
Q. 'ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' (Green Hydrogen) भारत के कार्बन न्यूट्रैलिटी (नेट जीरो 2070) लक्ष्य को हासिल करने में कैसे मदद करेगा?
Ans -
हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) के वर्तमान युग में एक स्वच्छ और धारणीय ऊर्जा स्रोत है, जिसका उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे- सौर या पवन) का उपयोग करके जल के विद्युत-अपघटन (Electrolysis) द्वारा किया जाता है। इस प्रक्रिया में उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प उत्सर्जित होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है। COP-26 (ग्लासगो सम्मेलन) में भारत द्वारा प्रस्तुत 'पंचामृत' (Panchamrit) रणनीति के तहत वर्ष 2070 तक 'नेट-जीरो' (Net-Zero) का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी दिशा में भारत सरकार द्वारा लगभग 19,744 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन' (NGHM) की शुरुआत की गई है, जो भारत को ऊर्जा स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
कार्बन न्यूट्रैलिटी (नेट-जीरो 2070) लक्ष्य प्राप्ति में मिशन की भूमिका
नीति आयोग की रिपोर्ट 'हार्नेसिंग ग्रीन हाइड्रोजन' के अनुसार, यह मिशन बहुआयामी दृष्टिकोण से कार्बन तटस्थता में योगदान देगा:
1. पर्यावरणीय और पारिस्थितिक प्रभाव (Environmental Impact & SDG 13)
'हार्ड-टू-अबेट' (Hard-to-Abate) क्षेत्रों का डीकार्बोनाइजेशन: इस्पात (Steel), सीमेंट, उर्वरक और पेट्रोकेमिकल जैसे भारी उद्योगों में विद्युतीकरण संभव नहीं है। ग्रीन हाइड्रोजन इन उद्योगों में कोयले (कोकिंग कोल) और प्राकृतिक गैस को प्रतिस्थापित कर कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती करेगा।
उत्सर्जन में कमी: मिशन के तहत वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष लगभग 50 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन को कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
2. आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा (Economic & Energy Security)
आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution): भारत अपनी कच्चे तेल की 85% आवश्यकता आयात करता है। ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग से वर्ष 2030 तक जीवाश्म ईंधन के आयात में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी, जो भारत के चालू खाता घाटे (CAD) को कम करेगा।
हरित अर्थव्यवस्था का निर्माण: यह मिशन हरित अमोनिया (Green Ammonia) और हरित मेथनॉल के उत्पादन को बढ़ावा देकर भारत को उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भर (आत्मनिर्भर भारत) बनाएगा।
3. तकनीकी और ढांचागत एकीकरण (Technological Integration)
परिवहन क्षेत्र की क्रांति: भारी वाणिज्यिक वाहनों, शिपिंग और विमानन क्षेत्र में फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (FCEVs) के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। लिथियम-आयन बैटरी की तुलना में हाइड्रोजन फ्यूल सेल लंबी दूरी की यात्रा और भारी भार वहन के लिए अधिक अनुकूल हैं।
सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD): प्राकृतिक गैस ग्रिड में ग्रीन हाइड्रोजन का सम्मिश्रण (Blending) घरेलू और औद्योगिक ताप ऊर्जा के कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगा।
4. भू-राजनीतिक एवं रणनीतिक लाभ (Political & Strategic)
वैश्विक निर्यात हब: भारत का लक्ष्य 2030 तक प्रतिवर्ष कम से कम 5 MMT ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना है। इससे भारत ऊर्जा आयातक से एक प्रमुख वैश्विक निर्यातक के रूप में स्थापित होगा।
कार्यान्वयन में प्रमुख चुनौतियाँ
उच्च उत्पादन लागत: वर्तमान में ग्रीन हाइड्रोजन की उत्पादन लागत $3-$4 प्रति किलोग्राम है। व्यावसायिक व्यवहार्यता के लिए इसे $1/kg से नीचे लाना एक बड़ी चुनौती है।
इलेक्ट्रोलाइज़र (Electrolyzer) की कमी: भारत इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण और दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (Rare Earth Minerals) के लिए चीन और अन्य देशों पर अत्यधिक निर्भर है।
भंडारण और रसद (Logistics): हाइड्रोजन एक अत्यधिक ज्वलनशील गैस है। इसके भंडारण और परिवहन के लिए क्रायोजेनिक तापमान (-253°C) या अत्यधिक उच्च दबाव वाले सिलेंडरों की आवश्यकता होती है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर लागत को बढ़ाते हैं।
जल की उच्च खपत: एक किलोग्राम हाइड्रोजन उत्पादन के लिए लगभग 9 लीटर शुद्ध (Demineralized) जल की आवश्यकता होती है, जो जल-संकट वाले क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय है।
आगे की राह (Way Forward)
हरित हाइड्रोजन मिशन की सफलता के लिए SIGHT (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition) कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है, ताकि स्वदेशी इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण को गति (PLI Scheme के माध्यम से) मिल सके। अनुसंधान और विकास (R&D) में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, जल संकट के समाधान हेतु तटीय क्षेत्रों में विलवणीकरण (Desalination) संयंत्रों को नवीकरणीय ऊर्जा से जोड़ना एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
भारत का यह कदम न केवल SDG 7 (सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा) को प्राप्त करने में सहायक है, बल्कि 'नव भारत 2047' (New India 2047) के 'ऊर्जा स्वतंत्र' विजन को भी साकार करेगा। वैश्विक जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध यह पहल 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (विश्व एक परिवार है) के भारतीय दर्शन को चरितार्थ करती है, जहाँ भारत अपने आर्थिक विकास के साथ-साथ संपूर्ण मानवता के पारिस्थितिक कल्याण के लिए नेतृत्व प्रदान कर रहा है।