सॉफ्ट पावर (Soft Power) के रूप में भारतीय डायस्पोरा की भूमिका का मूल्यांकन करें।

 Q. सॉफ्ट पावर (Soft Power) के रूप में भारतीय डायस्पोरा की भूमिका का मूल्यांकन करें।

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प्रख्यात राजनीतिक वैज्ञानिक जोसेफ नाई (Joseph Nye) के अनुसार, सॉफ्ट पावर किसी राष्ट्र की वह क्षमता है जो बल प्रयोग या आर्थिक दंड के बजाय आकर्षण और persuasion के माध्यम से दूसरों के सांस्कृतिक, राजनीतिक और वैचारिक मूल्यों को प्रभावित करती है। 3.2 करोड़ से अधिक की वैश्विक आबादी के साथ भारतीय डायस्पोरा (प्रवासी भारतीय) आज दुनिया के सबसे बड़े, प्रभावशाली और आर्थिक रूप से सशक्त प्रवासियों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन डेटा के अनुसार, भारत प्रवासियों के प्रेषण (Remittances) प्राप्त करने में वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर है, जो न केवल आर्थिक संबल प्रदान करता है, बल्कि वैश्विक मंचों पर भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और सॉफ्ट पावर का सबसे मजबूत स्तंभ भी है।

वैश्विक पटल पर भारतीय डायस्पोरा की भूमिका

भारतीय प्रवासियों ने अपनी बुद्धिमत्ता, कार्यकुशलता और सांस्कृतिक बहुलता के बल पर विभिन्न देशों में भारत की सॉफ्ट पावर को निम्नलिखित आयामों के माध्यम से विस्तारित किया है:

1. राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव (Political & Diplomatic Influence)

  • सत्ता के शीर्ष पदों पर भागीदारी: अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, पुर्तगाल, आयरलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIOs) ने राष्ट्र प्रमुखों, मंत्रिमंडलों और संसदों में उच्च पदों को सुशोभित किया है। कमला हैरिस, ऋषि सुनक और लियो वराडकर जैसे वैश्विक नेता वैश्विक नीति-निर्माण में भारत के रणनीतिक हितों के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार करने में अप्रत्यक्ष रूप से सहायक रहे हैं।

  • लॉबीइंग और कूटनीतिक सेतु: अमेरिका-भारत सिविल परमाणु समझौते (2008) और विभिन्न रक्षा समझौतों को पारित कराने में अमेरिकी संसद में 'इंडियन-अमेरिकन लॉबी' ने एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाई।

2. आर्थिक और तकनीकी प्रभुत्व (Economic & Technological Prowess)

  • 'ब्रेन गेन' (Brain Gain) और सिलिकॉन वैली: सुंदर पिचाई, सत्य नडेला और शांतनु नारायण जैसे तकनीकी दिग्गजों ने वैश्विक तकनीकी दिग्गजों का नेतृत्व करते हुए यह सिद्ध किया है कि भारतीय प्रतिभा वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

  • आर्थिक संबल और निवेश: भारत में प्रतिवर्ष आने वाले 100 अरब डॉलर से अधिक के प्रेषण (Remittances) न केवल ग्रामीण और अर्ध-शहरी परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ाते हैं, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

3. सांस्कृतिक कूटनीति और जीवनशैली (Cultural Diplomacy)

  • योग और आयुर्वेद का प्रसार: संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की घोषणा में भारतीय डायस्पोरा ने अग्रदूत की भूमिका निभाई। आज योग, आध्यात्मिकता, आयुर्वेद और भारतीय खान-पान (जैसे मिलेट्स/श्री अन्न) ने वैश्विक स्वास्थ्य और कल्याण (Wellness) की संस्कृति को आकार दिया है।

  • त्योहारों और सिनेमा का वैश्विकरण: दिवाली, होली और गणेश चतुर्थी जैसे त्योहार अब व्हाइट हाउस, डाउनिंग स्ट्रीट और टाइम्स स्क्वायर जैसे वैश्विक प्रतीकों पर भव्यता से मनाए जाते हैं, जिससे भारत की 'सॉफ्ट पावर' का सांस्कृतिक प्रकटीकरण होता है।

4. मानवीय मूल्य और परोपकारिता (Philanthropy & Social Integration)

  • 'वसुधैव कुटुंबकम' का साक्षात रूप: कोविड-19 महामारी के दौरान और प्राकृतिक आपदाओं के समय विदेशी भारतीयों ने जिस प्रकार स्थानीय स्वास्थ्य प्रणालियों और भारत के राहत अभियानों में सहयोग किया, उसने भारत की छवि एक परोपकारी और 'विश्व मित्र' राष्ट्र के रूप में स्थापित की है।

भारतीय डायस्पोरा के समक्ष विद्यमान चुनौतियाँ

चुनौती का क्षेत्रमुख्य विवरण
भू-राजनीतिक ध्रुवीकरणखाड़ी देशों और पश्चिमी देशों में भू-राजनीतिक तनावों के कारण प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और उनके रोजगार पर अनिश्चितता के बादल।
दोहरी नागरिकता का अभावभारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 के तहत दोहरी नागरिकता की अनुमति न होने के कारण कई प्रवासी दीर्घकालिक प्रशासनिक और संपत्ति संबंधी जटिलताओं का सामना करते हैं।
बौद्धिक संपदा और निष्कर्षणउच्च कुशल पेशेवरों के देश से बाहर जाने (Brain Drain) के कारण देश के घरेलू अनुसंधान और विकास (R&D) क्षेत्र को होने वाली क्षति।

आगे की राह (Way Forward)

सॉफ्ट पावर का प्रभावी उपयोग राष्ट्र की 'हार्ड पावर' (सैन्य और आर्थिक क्षमता) के साथ मिलकर ही पूर्ण होता है। भारत सरकार द्वारा शुरू की गई 'प्रवासी कौशल विकास योजना', 'ग्लोबल इंडियन डेटाबेस' और 'कुंभ मेले' जैसी सांस्कृतिक पहलों ने डायस्पोरा के साथ जुड़ाव को और गहरा किया है।

संस्थागत स्तर पर, विदेश मंत्रालय के अंतर्गत 'प्रवासी भारतीय मामलों के प्रभाग' को और अधिक स्वायत्तता और वित्तीय संसाधन दिए जाने चाहिए, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों (जैसे पश्चिम या मध्य एशिया के संकट) में डायस्पोरा की सुरक्षा तत्परता से सुनिश्चित की जा सके। भारतीय डायस्पोरा केवल भारत का इतिहास नहीं, बल्कि उसके उज्ज्वल भविष्य का सह-सृजक है। इस वैश्विक समुदाय को भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाकर, राष्ट्र 'विकसित भारत 2047' के विजन को प्राप्त कर सकता है। प्रवासियों की ऊर्जा और निष्ठा 'वसुधैव कुटुंबकम' के प्राचीन भारतीय दर्शन को वैश्विक शांति, बंधुत्व और सह-अस्तित्व के आधुनिक वैश्विक मानदंड के रूप में स्थापित करती है।

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