लोक निधि के उपयोग (Utilization of Public Funds) में दक्षता और ईमानदारी कैसे सुनिश्चित की जा सकती है?

 Q. लोक निधि के उपयोग (Utilization of Public Funds) में दक्षता और ईमानदारी कैसे सुनिश्चित की जा सकती है?

Ans - 

लोक निधि (Public Fund) करदाताओं का वह धन है जिसे राज्य द्वारा 'सार्वजनिक न्यास' (Public Trust) के सिद्धांत के तहत धारित किया जाता है। कौटिल्य ने 'अर्थशास्त्र' में सुदृढ़ और पारदर्शी राजकोष को राज्य की शक्ति और स्थिरता का आधार माना है। वर्तमान कल्याणकारी और लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोक निधि का उपयोग केवल विधिक और प्रक्रियात्मक रूप से सही नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें दक्षता (Efficiency - न्यूनतम लागत पर अधिकतम और त्वरित परिणाम) तथा ईमानदारी (Integrity - भ्रष्टाचार और रिसाव की पूर्ण अनुपस्थिति) का होना सुशासन की अनिवार्य शर्त है।

लोक निधि के उपयोग में दक्षता और ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए एक बहुआयामी (PESTLE) दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें संस्थागत, तकनीकी, विधिक और नैतिक हस्तक्षेप शामिल हों।

दक्षता (Efficiency) सुनिश्चित करने के रणनीतिक उपाय

दक्षता का अर्थ है 'निधियों की सार्थकता' (Value for Money) प्राप्त करना, जहाँ संसाधनों का इष्टतम आवंटन हो और कोई राजकोषीय अपव्यय न हो।

1. आर्थिक एवं प्रक्रियात्मक तंत्र (Economic & Procedural)

  • परिणाम-उन्मुख बजट (Outcome Budgeting): नीति आयोग की संस्तुतियों के अनुरूप, निधियों का आवंटन केवल व्यय के आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे मापने योग्य परिणामों (Measurable Outcomes) से जोड़ा जाना चाहिए।

  • सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS): सरकारी निधियों की 'रियल-टाइम ट्रैकिंग' के माध्यम से धन के 'फ्लोट' (अस्थायी रूप से फंसा हुआ धन) को कम करना तथा परियोजनाओं की लागत-अधिव्यय (Cost Overrun) को रोकना।

  • शून्य-आधारित बजट (Zero-based Budgeting): पारंपरिक इंक्रीमेंटल बजटिंग के बजाय, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में सभी योजनाओं की प्रासंगिकता का पुनर्मूल्यांकन करना, ताकि अप्रचलित योजनाओं पर होने वाले अपव्यय को रोका जा सके।

2. तकनीकी हस्तक्षेप (Technological)

  • ई-प्रोक्योरमेंट और GeM पोर्टल: गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) का उपयोग करके सार्वजनिक खरीद (Public Procurement) में एकाधिकार को तोड़ना और प्रतिस्पर्धा बढ़ाकर मूल्य दक्षता सुनिश्चित करना।

  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और JAM ट्रिनिटी: कल्याणकारी योजनाओं में मध्यस्थों (Middlemen) को समाप्त कर JAM (जन-धन, प्रमाणीकरण, मोबाइल) ट्रिनिटी के माध्यम से लक्षित लाभार्थियों तक सीधे निधि पहुँचाना, जिससे 'घोस्ट बेनिफिशियरीज' (Ghost Beneficiaries) की समस्या समाप्त हुई है।

ईमानदारी और सत्यनिष्ठा (Integrity) सुनिश्चित करने के उपाय

ईमानदारी का तात्पर्य यह सुनिश्चित करना है कि निधियों का उपयोग उसी उद्देश्य के लिए हो जिसके लिए उन्हें स्वीकृत किया गया है, और इसमें किसी प्रकार का निजी स्वार्थ या भाई-तीजावाद (Nepotism) शामिल न हो।

1. विधिक एवं संस्थागत तंत्र (Legal & Institutional)

  • सशक्त लेखापरीक्षा (Auditing): संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की भूमिका को केवल 'अनुपालन ऑडिट' (Compliance Audit) से बढ़ाकर 'परफॉरमेंस और प्रोप्रायटी ऑडिट' (Performance and Propriety Audit) तक विस्तृत करना।

  • विवेकाधिकार (Discretion) का न्यूनीकरण: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के सख्त कार्यान्वयन के साथ-साथ ई-गवर्नेंस के माध्यम से प्रशासकों के मानवाधीन विवेकाधिकार को कम करना, जो भ्रष्टाचार का मूल कारण है।

  • स्वतंत्र निगरानी संस्थाएं: CVC (केंद्रीय सतर्कता आयोग) और लोकपाल जैसी संस्थाओं को अधिक स्वायत्तता और जांच शक्तियां प्रदान करना।

2. सामाजिक एवं भागीदारी दृष्टिकोण (Social & Participatory)

  • सामाजिक लेखापरीक्षा (Social Audit): मनरेगा (MGNREGA) की तर्ज पर सभी पंचायती राज और कल्याणकारी योजनाओं का सामाजिक ऑडिट अनिवार्य करना। मेघालय का 'सामाजिक लेखापरीक्षा कानून' इस दिशा में एक उत्कृष्ट 'बेस्ट प्रैक्टिस' (Best Practice) है।

  • पारदर्शिता उपकरण: शासन में सूचना की विषमता (Information Asymmetry) को समाप्त करने के लिए सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम और नागरिक चार्टर (Citizens' Charter) का प्रभावी क्रियान्वयन।

3. नैतिक एवं मूल्य-आधारित उपाय (Ethical)

  • आचार संहिता और हितों का टकराव (Conflict of Interest): द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) की 'शासन में नैतिकता' रिपोर्ट के अनुसार, लोक सेवकों के लिए एक वैधानिक 'कोड ऑफ एथिक्स' (Code of Ethics) लागू किया जाना चाहिए।

  • नोलन समिति (Nolan Committee) के सिद्धांत: निधियों के प्रबंधन में सत्यनिष्ठा, वस्तुनिष्ठता, खुलापन और जवाबदेही (Accountability) जैसे मूलभूत सार्वजनिक जीवन के मूल्यों को संस्थागत रूप देना।

आगे की राह

लोक निधि का पारदर्शी और अधिकतम जन-कल्याणकारी उपयोग राज्य और नागरिकों के बीच मौजूद 'सामाजिक समझौते' (Social Contract) को सुदृढ़ करता है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए, जहाँ सामाजिक-आर्थिक विषमताएं विद्यमान हैं, राजकोषीय रिसाव (Fiscal Leakage) केवल एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि विकास के विरुद्ध एक नैतिक अपराध है।

हमें एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण करना होगा जहाँ प्रौद्योगिकी, पारदर्शिता और सार्वजनिक नैतिकता का अभिसरण (Convergence) हो। यह सतत विकास लक्ष्य-16 (SDG 16: शांति, न्याय और सशक्त संस्थाएं) की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा। इसी ठोस राजकोषीय और नैतिक आधार पर भारत 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के मंत्र को चरितार्थ करते हुए, एक न्यायपूर्ण, आत्मनिर्भर और पारदर्शी 'नव भारत 2047' (New India 2047) के निर्माण का अपना संकल्प सफलतापूर्वक पूरा कर सकता है।

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