भारत का अमृत काल: 2047 तक विकसित राष्ट्र का स्वप्न। (वर्तमान मुद्दा)
Q. भारत का अमृत काल: 2047 तक विकसित राष्ट्र का स्वप्न। (वर्तमान मुद्दा)
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भारत का अमृत काल: 2047 तक विकसित राष्ट्र का स्वप्न
भूमिका
स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ से लेकर 100वीं वर्षगांठ (2047) तक की 25 वर्षों की अवधि को भारत सरकार द्वारा 'अमृत काल' के रूप में परिभाषित किया गया है। यह कालखंड केवल एक कालक्रम नहीं है, बल्कि यह 'विकसित भारत @2047' के महत्वाकांक्षी संकल्प की आधारशिला है। इसका मुख्य उद्देश्य एक औपनिवेशिक अतीत (गुलामी की मानसिकता) से मुक्त होकर भारत को एक ऐसी उच्च आय वाली वैश्विक महाशक्ति (लगभग $30-40 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था) में बदलना है, जो सामाजिक रूप से समावेशी, तकनीकी रूप से उन्नत और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ हो।
विकसित भारत @2047 के प्रमुख स्तंभ (GYAN)
भारत को विकासशील से विकसित राष्ट्र बनाने की रणनीति मुख्य रूप से चार प्रमुख जनसांख्यिकीय स्तंभों—GYAN (Garib, Yuva, Annadata, Mahila) के इर्द-गिर्द बुनी गई है:
गरीब कल्याण (Garib): समावेशी विकास को सुनिश्चित करते हुए अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का उत्थान। वित्तीय समावेशन, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) जैसी पहलों के माध्यम से गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वालों को मुख्यधारा में लाना।
युवा शक्ति (Yuva): भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का उपयोग करने हेतु राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और 'स्किल इंडिया' के माध्यम से वैश्विक स्तर का कौशल विकास। हाल ही में नीति आयोग द्वारा जारी 'रीइमेजिनिंग स्किलिंग फॉर विकसित भारत@2047' रिपोर्ट युवाओं को भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं (जैसे- AI, क्वांटम कंप्यूटिंग) के लिए तैयार करने पर ज़ोर देती है।
अन्नदाता (Annadata): खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और कृषि आय को बढ़ाने के लिए तकनीकी एकीकरण (Precision Farming), जलवायु अनुकूल कृषि और बाज़ार सुधारों को लागू करना।
महिला सशक्तिकरण (Mahilayen): कार्यबल (Workforce) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना। नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संवैधानिक संशोधन) और महिला उद्यमिता (मुद्रा योजना) इसका वैधानिक और आर्थिक आधार हैं।
आर्थिक एवं ढांचागत परिवर्तन के उत्प्रेरक
विनिर्माण और आत्मनिर्भरता: अर्थव्यवस्था में विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 25% तक करना।
उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं और MSME सेक्टर का सुदृढ़ीकरण इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विश्वस्तरीय अवसंरचना: PM गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम हो और वैश्विक प्रतिस्पर्धा (Global Competitiveness) में सुधार हो।
हरित विकास (Green Growth): वर्ष 2070 तक 'नेट ज़ीरो' (Net Zero) उत्सर्जन का लक्ष्य।
इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा (अक्षय ऊर्जा), हरित हाइड्रोजन मिशन और चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) पर ज़ोर दिया जा रहा है।
विकसित भारत के संकल्प में बिहार की भूमिका
भारत का कोई भी विकास स्वप्न बिहार की प्रगति के बिना पूर्ण नहीं हो सकता। राष्ट्र के इस महायज्ञ में बिहार का संदर्भ अत्यंत महत्वपूर्ण है:
जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग: बिहार में युवाओं की एक विशाल आबादी है। यदि पटना और बिहार के सभी ज़िलों में कौशल विकास केंद्रों तथा तकनीकी संस्थानों को सुदृढ़ किया जाए, तो राज्य भारत की आर्थिक वृद्धि का मुख्य इंजन बन सकता है।
कृषि आधुनिकीकरण: 'अन्नदाता' स्तंभ को मज़बूत करने के लिए बिहार के चौथे कृषि रोडमैप में जलवायु अनुकूल कृषि (Climate Resilient Agriculture) को प्राथमिकता दी गई है, जो राज्य के किसानों की आय दोगुनी करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
महिला स्वावलंबन का संस्थागत मॉडल: बिहार का 'जीविका' (JEEViKA) कार्यक्रम ग्रामीण महिला सशक्तिकरण का एक ऐसा सफल मॉडल है, जिसने लाखों महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र किया है। इस मॉडल का विस्तार विकसित भारत के सामाजिक समावेशन लक्ष्य के पूर्णतः अनुरूप है।
अवसंरचनात्मक विस्तार: अंतर्देशीय जलमार्ग (National Waterway-1) का विकास और नए एक्सप्रेसवे राज्य के लॉजिस्टिक पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत कर रहे हैं, जिससे निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
प्रमुख चुनौतियाँ
मध्यम आय जाल (Middle Income Trap): ब्राज़ील या दक्षिण अफ्रीका जैसे कई विकासशील देश एक स्तर पर पहुँचकर ठहर जाते हैं।
इससे बचने के लिए अनुसंधान और नवाचार (R&D) में निवेश बढ़ाना होगा, जिसके लिए अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की स्थापना एक सकारात्मक कदम है। कौशल और रोज़गार के बीच की खाई: उच्च आर्थिक वृद्धि दर को रोज़गार-विहीन विकास (Jobless Growth) बनने से रोकना एक बड़ी चुनौती है। श्रम बाज़ार का आधुनिकीकरण अत्यंत आवश्यक है।
जलवायु परिवर्तन का दबाव: औद्योगिक विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन साधना। नीति आयोग द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे सीमेंट, एल्युमीनियम और MSME) के लिए जारी डिकार्बोनाइजेशन रोडमैप का कड़ाई से पालन करना होगा।
आगे की राह एवं समग्र मूल्यांकन
अमृत काल की यह यात्रा केवल सरकार की योजनाओं का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों का सामूहिक संकल्प है। संविधान के अनुच्छेद 38 (लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना) और प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए 'पंच प्रण' (Panch Pran) विकसित भारत के वैचारिक और संवैधानिक मार्गदर्शक हैं।
भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मंत्र को सुशासन, नागरिक कर्तव्यों और तकनीकी नवाचार के साथ एकीकृत करना होगा। पारदर्शी प्रशासन और विकेंद्रीकृत विकास—जिसमें बिहार जैसे राज्यों की शत-प्रतिशत भागीदारी हो—के माध्यम से ही भारत विश्व पटल पर एक सशक्त, समृद्ध और समावेशी राष्ट्र के रूप में अपनी ऐतिहासिक गरिमा को पुनः स्थापित कर सकेगा।