भारत और मालदीव के हालिया कूटनीतिक तनावों का विश्लेषण करें और 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति की चुनौतियां बताएं।

 Q. भारत और मालदीव के हालिया कूटनीतिक तनावों का विश्लेषण करें और 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति की चुनौतियां बताएं।

Ans -

भूमिका

हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region - IOR) में स्थित मालदीव, भारत के लिए रणनीतिक, आर्थिक और समुद्री सुरक्षा की दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ोसी है। भारत की विदेश नीति में मालदीव को 'नेबरहुड फर्स्ट' (Neighbourhood First) नीति और 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) विज़न के अंतर्गत केंद्रीय स्थान प्राप्त है। हालाँकि, मालदीव में सत्ता परिवर्तन और वर्ष 2023-24 के दौरान हुए घटनाक्रमों ने दोनों देशों के ऐतिहासिक व बहुआयामी संबंधों में अभूतपूर्व तनाव उत्पन्न कर दिया था। यह स्थिति केवल द्विपक्षीय संबंधों का परीक्षण नहीं थी, बल्कि यह भारत की व्यापक 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के समक्ष उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियों का भी स्पष्ट प्रकटीकरण थी।

1. भारत-मालदीव के हालिया कूटनीतिक तनाव: कारण और प्रभाव

हालिया तनावों की पृष्ठभूमि में मालदीव की घरेलू राजनीति, भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा और वैचारिक ध्रुवीकरण का मिश्रण रहा है:

क. 'इंडिया आउट' (India Out) अभियान और सत्ता परिवर्तन

  • वर्ष 2023 के चुनावों में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 'इंडिया आउट' के नैरेटिव को अपने राजनीतिक अभियान का मुख्य आधार बनाया।

  • सत्ता में आते ही मालदीव सरकार ने दशकों पुरानी 'इंडिया फर्स्ट' नीति को त्यागते हुए चीन के साथ स्वतंत्र व्यापार समझौते (FTA) और रक्षा सहयोग की ओर झुकाव प्रदर्शित किया।

ख. भारतीय सैन्य कर्मियों की वापसी का मुद्दा

  • मुइज्जू सरकार ने मालदीव में मानवीय और चिकित्सा निकासी (Medical Evacuation) कार्यों में तैनात भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस बुलाने की मांग की। यद्यपि भारत ने कूटनीतिक परिपक्वता दिखाते हुए सैन्य कर्मियों को असैन्य तकनीकी विशेषज्ञों (Civilian Technical Experts) से प्रतिस्थापित कर विवाद को सुलझा लिया।

ग. लक्षद्वीप विवाद और पर्यटन पर आघात

  • मालदीव के कुछ उप-मंत्रियों द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री की लक्षद्वीप यात्रा पर की गई विवादास्पद टिप्पणियों ने दोनों देशों के मध्य गंभीर कूटनीतिक विवाद (Diplomatic Row) को जन्म दिया।

  • इसके परिणामस्वरूप भारतीय पर्यटकों द्वारा बड़े पैमाने पर मालदीव का बहिष्कार किया गया, जिससे मालदीव की पर्यटन-आधारित अर्थव्यवस्था पर तीव्र नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

घ. कूटनीतिक पुनर्संतुलन (Pragmatic Reset)

  • तनाव के बावजूद, भारत ने एक 'प्रथम अनुक्रियाकर्ता' (First Responder) का दायित्व निभाते हुए मालदीव को आर्थिक संकट से उबारने हेतु 400 मिलियन डॉलर का मुद्रा स्वैप समझौता (Currency Swap Agreement) और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की। इसके फलस्वरूप 2024 के अंत तक संबंधों में पुनः एक यथार्थवादी सुधार (Strategic Thaw) देखा गया।

2. 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति की प्रमुख चुनौतियां

मालदीव का घटनाक्रम इस बात का द्योतक है कि भारत के पड़ोस में कूटनीति अत्यंत जटिल होती जा रही है:

  • चीन का बढ़ता अनुचित प्रभाव: चीन अपनी 'चेकबुक कूटनीति' (Checkbook Diplomacy) और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत भारी ऋण देकर (जैसे- मालदीव का सिनामाले ब्रिज, श्रीलंका का हंबनटोटा) दक्षिण एशिया में भारत के रणनीतिक प्रभाव को क्षीण करने का प्रयास कर रहा है।

  • घरेलू राजनीति का विदेश नीति पर प्रभाव: नेपाल, श्रीलंका और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों में सरकार बदलते ही विदेश नीति में तीव्र वैचारिक परिवर्तन (Ideological Shifts) आ जाते हैं। घरेलू लोकलुभावनवाद (Populism) के लिए अक्सर भारत-विरोध (Anti-India sentiment) का साधन के रूप में उपयोग किया जाता है।

  • सुरक्षा एवं गैर-पारंपरिक खतरे: आईओआर (IOR) में समुद्री डकैती, अवैध और अविनियमित मछली पकड़ने (IUU Fishing) के साथ-साथ पड़ोसी देशों में बढ़ता धार्मिक कट्टरपंथ (Radicalisation) भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सीधा खतरा है।

  • लघु राज्यों की संतुलन रणनीति (Balancing Act): छोटे पड़ोसी देश भारत और चीन के मध्य रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा का लाभ उठाकर अधिकतम आर्थिक लाभ प्राप्त करने के लिए 'बार्गेनिंग' (Bargaining) की नीति अपना रहे हैं।

3. बिहार के विशेष संदर्भ में प्रासंगिकता और सीख

यद्यपि बिहार एक भू-आबद्ध (Landlocked) राज्य है, परंतु मालदीव विवाद और पड़ोस की भू-राजनीति का राज्य पर अप्रत्यक्ष लेकिन महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है:

  • पर्यटन ब्रांडिंग और आर्थिक विविधीकरण: मालदीव विवाद ने घरेलू पर्यटन (जैसे लक्षद्वीप) के महत्व को रेखांकित किया। बिहार के लिए यह एक अवसर है कि वह अपने 'बुद्ध सर्किट' (बोधगया, राजगीर, नालंदा) और इको-टूरिज्म (वाल्मीकि नगर टाइगर रिज़र्व) को वैश्विक स्तर पर आक्रामक रूप से ब्रांड करे। विदेशी पर्यटन पर अत्यधिक निर्भरता के बजाय घरेलू पर्यटकों को आकर्षित कर राज्य एक लचीली सेवा अर्थव्यवस्था विकसित कर सकता है।

  • कृषि निर्यात और समुद्री सुरक्षा: बिहार के कृषि उत्पादों (मखाना, जर्दालू आम, शाही लीची) को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों, विशेषकर मध्य-पूर्व और यूरोप तक पहुँचाने के लिए हिंद महासागर के समुद्री मार्गों (SLOCs) का सुरक्षित होना अनिवार्य है। मालदीव की स्थिरता अप्रत्यक्ष रूप से बिहार की निर्यात आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

निष्कर्ष एवं आगे की राह

मालदीव के साथ हालिया तनावों का समाधान इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि भारत अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति में अब आवेगात्मक प्रतिक्रियाओं के बजाय 'रणनीतिक धैर्य' (Strategic Patience) का पालन कर रहा है।

आगे की राह (Way Forward):

  1. संस्थागत एकीकरण: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे UPI और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार (Local Currency Trade) के माध्यम से पड़ोसी देशों के साथ गहरे संरचनात्मक और आर्थिक संबंध स्थापित किए जाने चाहिए।

  2. सॉफ्ट पावर का संवर्द्धन: कूटनीति के साथ-साथ 'ट्रैक-2 कूटनीति' (Track-II Diplomacy), क्षमता निर्माण, और छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रमों पर जोर दिया जाना चाहिए।

  3. क्षेत्रीय मंचों का सशक्तिकरण: कोलंबो सुरक्षा कॉन्क्लेव (Colombo Security Conclave) जैसे क्षेत्रीय सुरक्षा वास्तुकला को सुदृढ़ किया जाना चाहिए ताकि हिंद महासागर में गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों का सामूहिक रूप से सामना किया जा सके।

अंततः, भारत को एक 'आधिपत्यवादी शक्ति' (Hegemonic Power) के बजाय एक 'विश्वसनीय विकास भागीदार' (Trusted Development Partner) के रूप में अपनी छवि को सुदृढ़ करना होगा, जो पड़ोसी देशों की संप्रभुता का पूर्ण सम्मान करते हुए संपूर्ण क्षेत्र के सर्वोत्कृष्ट कल्याण को सुनिश्चित करे।

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