इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 'क्वाड' (QUAD) की भूमिका और चीन के बढ़ते प्रभुत्व को संतुलित करने में इसकी प्रासंगिकता बताएं।

 Q. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 'क्वाड' (QUAD) की भूमिका और चीन के बढ़ते प्रभुत्व को संतुलित करने में इसकी प्रासंगिकता बताएं।

Ans - 

भूमिका

'क्वाड' (Quadrilateral Security Dialogue - QUAD) भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का एक बहुपक्षीय रणनीतिक समूह है। इसकी उत्पत्ति वर्ष 2004 की सुनामी के दौरान एक 'कोर ग्रुप' के रूप में हुई थी, जिसे वर्ष 2007 में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की 'दो समुद्रों का मिलन' (Confluence of the Two Seas) अवधारणा से वैचारिक आधार प्राप्त हुआ। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में क्वाड का मुख्य उद्देश्य इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र को 'स्वतंत्र, खुला, समावेशी और नियम-आधारित' (Free, Open, and Inclusive Indo-Pacific - FOIP) बनाए रखना है। यद्यपि क्वाड स्वयं को एक सैन्य गठबंधन (Asian NATO) नहीं मानता है, तथापि यह क्षेत्रीय भू-रणनीति में चीन के एकतरफा आधिपत्य और आक्रामक विस्तारवाद को प्रतिसंतुलित करने वाला सबसे सशक्त कूटनीतिक तंत्र बनकर उभरा है।

1. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में क्वाड की बहुआयामी भूमिका

क्वाड की भूमिका अब केवल सामरिक संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक कार्य-उन्मुख (Action-oriented) समूह के रूप में विकसित हो चुका है:

क. समुद्री सुरक्षा और डोमेन जागरूकता

  • समुद्री डकैती, 'डार्क शिपिंग' (Dark Shipping) और अवैध, गैर-रिपोर्टेड और अविनियमित (IUU) मछली पकड़ने की गतिविधियों को रोकने के लिए क्वाड ने 'इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस' (IPMDA) पहल की शुरुआत की है।

  • हाल ही में इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोलैबोरेशन (IPMSC) के माध्यम से क्वाड देशों ने वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने (Real-time intelligence sharing) की व्यवस्था को संस्थागत रूप दिया है।

ख. आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन (Supply Chain Resilience)

  • कोविड-19 महामारी और भू-राजनीतिक तनावों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की भेद्यता को उजागर किया। क्वाड देश सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और फार्मास्युटिकल्स के लिए चीन पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने हेतु 'सप्लाई चेन रेजिलिएंस इनिशिएटिव' (SCRI) को बढ़ावा दे रहे हैं।

ग. महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकें (Critical and Emerging Technologies)

  • 5G/6G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग में पारदर्शी मानक स्थापित करने के लिए क्वाड देशों ने कार्यसमूह (Working Groups) का गठन किया है, ताकि सामरिक रूप से संवेदनशील तकनीकों में किसी एक सत्तावादी देश का एकाधिकार न रहे।

घ. मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR)

  • इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को देखते हुए, क्वाड देश 'प्रथम अनुक्रियाकर्ता' (First Responders) के रूप में कार्य करने के लिए अपनी नौसेनाओं के मध्य समन्वय (जैसे- मालाबार नौसैन्य अभ्यास) बढ़ा रहे हैं।

2. चीन के बढ़ते प्रभुत्व को संतुलित करने में क्वाड की प्रासंगिकता

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की 'सलामी स्लाइसिंग' (Salami Slicing) और 'ग्रे-ज़ोन' (Grey-Zone) रणनीति के विरुद्ध क्वाड एक मजबूत प्रतिरोधक के रूप में कार्य कर रहा है:

  • 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' और BRI का विकल्प: चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के तहत अपनाई गई 'ऋण-जाल कूटनीति' (Debt-trap Diplomacy) का सामना करने के लिए क्वाड देश पारदर्शी और टिकाऊ बुनियादी ढांचा निवेश (जैसे- ब्लू डॉट नेटवर्क) के विकल्प प्रस्तुत कर रहे हैं।

  • दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में नियम-आधारित व्यवस्था: चीन द्वारा 'नाइन-डैश लाइन' (Nine-Dash Line) के आधार पर दक्षिण चीन सागर के 90% हिस्से पर किए जाने वाले अवैध दावों और UNCLOS (संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि) के उल्लंघनों का क्वाड ने मुखर विरोध किया है।

  • प्रशांत द्वीप देशों (Pacific Island Nations) की सुरक्षा: चीन द्वारा सोलोमन द्वीप जैसे छोटे द्वीपीय देशों के साथ सुरक्षा समझौते कर सामरिक ठिकाने बनाने के प्रयासों को संतुलित करने के लिए क्वाड ने इस क्षेत्र में अपने राजनयिक और आर्थिक जुड़ाव को सघन किया है।

  • भारत के लिए रणनीतिक कवच: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी आक्रामकता और हिंद महासागर (Indian Ocean Region - IOR) में चीनी नौसेना की बढ़ती घुसपैठ के मध्य, क्वाड भारत को वैश्विक शक्तियों के साथ सूचना और नौसैन्य समन्वय का एक शक्तिशाली मंच प्रदान करता है।

3. बिहार के विशेष संदर्भ में भू-आर्थिक प्रासंगिकता

यद्यपि विदेश नीति और रणनीतिक गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर संचालित होते हैं, परंतु क्वाड द्वारा उत्पन्न किए जा रहे भू-आर्थिक प्रतिमानों (Geo-economic Paradigms) का बिहार जैसे राज्य पर दूरगामी प्रभाव संभावित है:

  • 'चाइना प्लस वन' (China Plus One) का लाभ और औद्योगिक विकास: क्वाड देश वैश्विक विनिर्माण को चीन से बाहर स्थानांतरित करने का प्रयास कर रहे हैं। बिहार अपने विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend), सस्ती और कुशल श्रम शक्ति, और बेहतर होती अवसंरचना के बल पर एमएसएमई (MSME) और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (जैसे- पटना और बेगूसराय के औद्योगिक क्लस्टर) के लिए जापानी और अमेरिकी निवेश (FDI) को आकर्षित कर सकता है।

  • कृषि निर्यात के लिए सुरक्षित समुद्री मार्ग: बिहार के भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्राप्त विशिष्ट उत्पाद—जैसे मखाना, जर्दालू आम और शाही लीची—की मांग जापानी और ऑस्ट्रेलियाई बाज़ारों में बढ़ रही है। क्वाड द्वारा सुरक्षित समुद्री परिवहन मार्गों (Sea Lines of Communication) की गारंटी, बिहार के कृषि-निर्यात को निर्बाध वैश्विक पहुंच प्रदान करेगी।

  • मानव संसाधन और अनुसंधान: 'क्वाड फेलोशिप' (Quad Fellowship) का उद्देश्य सदस्य देशों के मेधावी छात्रों को STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) विषयों में उच्च शिक्षा हेतु प्रायोजित करना है। बिहार के मेधावी छात्र और नवोन्मेषी युवा इस फेलोशिप का लाभ उठाकर राज्य की बौद्धिक संपदा में अभिवृद्धि कर सकते हैं।

निष्कर्ष एवं आगे की राह

क्वाड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का भविष्य किसी एक देश के आधिपत्य (Hegemony) से नहीं, बल्कि बहुपक्षीय सहयोग, संप्रभुता के सम्मान और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुपालन से तय होगा। चीन की आक्रामकता को संतुलित करने में क्वाड की सफलता इसकी आर्थिक और सुरक्षा पहलों की निरंतरता पर निर्भर है।

आगे की राह (Way Forward):

  1. संस्थागत आर्थिक ढांचा: क्वाड को अपनी सैन्य-सुरक्षा छवि से आगे बढ़कर इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF) के साथ अधिक समन्वय स्थापित करना चाहिए।

  2. 'क्वाड प्लस' (Quad Plus) का विस्तार: समान विचारधारा वाले देशों जैसे दक्षिण कोरिया, वियतनाम और फ्रांस को क्वाड के संवाद तंत्र में शामिल कर 'क्वाड प्लस' के स्वरूप को मजबूत किया जाना चाहिए।

  3. तकनीक-हस्तांतरण की गति: भारत को तकनीकी विकास और रक्षा उत्पादन (आत्मनिर्भर भारत) के लिए सदस्य देशों के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) समझौतों को तेजी से धरातल पर उतारना होगा।

अंततः, क्वाड 21वीं सदी की भू-राजनीति में 'ग्लोबल गुड' (विश्व कल्याण) के लिए एक शक्ति-वर्धक (Force Multiplier) है, जो बिना किसी उकसावे के क्षेत्रीय स्थिरता और भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' (Act East Policy) को सुदृढ़ता प्रदान करता है।

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