भारत-अमेरिका संबंधों में हालिया रक्षा और तकनीकी सहयोग (ICET) के महत्व की चर्चा करें।
Q. भारत-अमेरिका संबंधों में हालिया रक्षा और तकनीकी सहयोग (ICET) के महत्व की चर्चा करें।
Ans -
भूमिका
21वीं सदी की वैश्विक भू-राजनीति में भारत-अमेरिका संबंध 'संकोची लोकतंत्रों' (Estranged Democracies) के अपने ऐतिहासिक अतीत से निकलकर वर्तमान में एक 'व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Global Strategic Partnership) के स्तर पर पहुँच गए हैं। इस रणनीतिक अभिसरण (Strategic Convergence) का सबसे अद्यतन और परिवर्तनकारी स्तंभ वर्ष 2023 में प्रारंभ की गई 'क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पर पहल' (iCET) और रक्षा औद्योगिक सहयोग है। एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में, जहाँ प्रौद्योगिकी ही नई मुद्रा और शक्ति का पैमाना है, भारत-अमेरिका का यह सहयोग क्रेता-विक्रेता (Buyer-Seller) के पारंपरिक संबंधों को सह-विकास (Co-development) और सह-उत्पादन (Co-production) के नए प्रतिमान में बदल रहा है।
1. भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग: नए आयाम
दोनों देशों के मध्य रक्षा संबंध अब केवल हथियारों की खरीद तक सीमित न रहकर एक एकीकृत सैन्य और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की ओर अग्रसर हैं:
क. तकनीकी हस्तांतरण और सह-उत्पादन
भारत में GE F414 जेट इंजन के निर्माण हेतु 'जनरल इलेक्ट्रिक' (GE) और 'हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड' (HAL) के मध्य अभूतपूर्व समझौता हुआ है। इसमें अमेरिका द्वारा उच्च स्तर का तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) शामिल है, जो भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान (LCA Tejas Mk2) कार्यक्रम के लिए मील का पत्थर है।
रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप (2023): इसके तहत आपूर्ति श्रृंखलाओं को जोड़ने और सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन की रूपरेखा तैयार की गई है।
ख. INDUS-X (इंडिया-यूएस डिफेंस एक्सेलरेशन इकोसिस्टम)
रक्षा क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स और निजी कंपनियों के नवाचार को बढ़ावा देने के लिए INDUS-X लॉन्च किया गया है। यह दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक बेस को एकीकृत कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अंतरिक्ष रक्षा तकनीक में संयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहित करता है।
ग. मूलभूत समझौतों का क्रियान्वयन
भारत और अमेरिका ने सभी चार फाउंडेशनल एग्रीमेंट्स—LEMOA, COMCASA, BECA, और GSOMIA—पर हस्ताक्षर कर लिए हैं, जिससे दोनों देशों की सेनाओं के मध्य 'अंतर-संचालनीयता' (Interoperability) और वास्तविक समय में खुफिया जानकारी (Real-time Intelligence) साझा करने की क्षमता उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है।
2. iCET (क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पर पहल) का महत्व
iCET दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSAs) द्वारा संचालित एक कूटनीतिक-तकनीकी ढांचा है, जिसका उद्देश्य भविष्य की तकनीकों पर लोकतांत्रिक देशों के प्रभुत्व को सुनिश्चित करना है:
क. सेमीकंडक्टर और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन (Supply Chain Resilience)
चीन पर निर्भरता (China Plus One) कम करने की रणनीति के तहत, अमेरिकी कंपनी 'माइक्रोन टेक्नोलॉजी' (Micron Technology) भारत में सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण सुविधा (ATMP) स्थापित कर रही है। यह भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने में सहायक है।
ख. अंतरिक्ष और उन्नत दूरसंचार
भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले 'आर्टेमिस समझौते' (Artemis Accords) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो शांतिपूर्ण चंद्र अन्वेषण को बढ़ावा देता है। साथ ही, NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) उपग्रह का संयुक्त विकास पृथ्वी अवलोकन के क्षेत्र में एक युगांतरकारी कदम है।
iCET के अंतर्गत 5G/6G और ओपन RAN (O-RAN) नेटवर्क के विकास पर कार्य किया जा रहा है, ताकि पारदर्शी और सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना का निर्माण हो सके।
ग. क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
दोनों देश 'क्वांटम को-ऑर्डिनेशन मैकेनिज्म' के माध्यम से उच्च-स्तरीय अनुसंधान संस्थानों को जोड़ रहे हैं, जो भविष्य के साइबर युद्ध और डेटा सुरक्षा के लिए निर्णायक सिद्ध होगा।
3. पटना और बिहार के सभी ज़िलों के संदर्भ में प्रासंगिकता
रक्षा और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी (iCET) के इस वैश्विक सहयोग का प्रभाव केवल राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पटना और बिहार के सभी ज़िलों की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए भी यह नवीन अवसर उत्पन्न करता है:
तकनीकी मानव संसाधन का वैश्विक एकीकरण: iCET के तहत AI, मशीन लर्निंग और क्वांटम कंप्यूटिंग पर जोर दिया जा रहा है। पटना और बिहार के सभी ज़िलों के इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों (जैसे NIT, IIT पटना) से निकलने वाले उच्च-कुशल STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) स्नातकों के लिए अमेरिकी तकनीकी दिग्गजों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर सृजित होंगे।
कृषि में डीप-टेक (Deep-Tech) का उपयोग: iCET के तहत विकसित होने वाली पृथ्वी अवलोकन तकनीक (जैसे NISAR) और AI-आधारित जलवायु मॉडलिंग का सीधा लाभ पटना और बिहार के सभी ज़िलों के किसानों को मिल सकता है। इससे बाढ़ पूर्वानुमान, मृदा विश्लेषण और 'स्मार्ट कृषि' (Precision Agriculture) के क्षेत्र में क्रांतिकारी नीतियां लागू की जा सकेंगी, जिससे राज्य की कृषि-उत्पादकता में वृद्धि होगी।
स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को गति: INDUS-X जैसी पहलों से प्रेरणा लेते हुए राज्य में 'डिफेंस और स्पेस टेक' स्टार्ट-अप्स को इनक्यूबेट करने के अवसर बढ़ेंगे, जिससे प्रतिभा पलायन (Brain Drain) को रोकने में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष एवं आगे की राह
भारत-अमेरिका रक्षा और तकनीकी सहयोग (iCET) यह प्रमाणित करता है कि 21वीं सदी का शक्ति संतुलन सैन्य अड्डों से अधिक तकनीकी-आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर करेगा। यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के तकनीकी और सैन्य विस्तारवाद को संतुलित करने का सबसे प्रभावी उपकरण है।
आगे की राह (Way Forward):
निर्यात नियंत्रण नियमों में ढील: अमेरिका को अपने कड़े ITAR (International Traffic in Arms Regulations) कानूनों में लचीलापन लाना होगा ताकि भारत को निर्बाध रूप से उच्च-तकनीक का हस्तांतरण हो सके।
वीज़ा और मानव पूंजी की गतिशीलता: H-1B वीज़ा प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाया जाना चाहिए ताकि दोनों देशों के वैज्ञानिक और शोधकर्ता बिना किसी बाधा के संयुक्त परियोजनाओं पर कार्य कर सकें।
रणनीतिक स्वायत्तता का संरक्षण: भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि अमेरिका के साथ अत्यधिक तकनीकी एकीकरण उसकी 'रणनीतिक स्वायत्तता' को बाधित न करे और रूस तथा अन्य पारंपरिक साझेदारों के साथ संबंध संतुलित रहें।
तकनीक और रक्षा के इस युगांतरकारी अभिसरण के माध्यम से भारत स्वयं को मात्र एक 'टेक्नोलॉजी कंज्यूमर' के बजाय वैश्विक पटल पर एक 'टेक्नोलॉजी क्रिएटर' और 'सुरक्षा प्रदाता' (Net Security Provider) के रूप में स्थापित कर रहा है।